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Parvatijayanti: 21 जुलाई 2026 को माता पार्वती जयंती है। हिंदू धर्म में माता पार्वती को देवी दुर्गा और मां काली का ही स्वरुप बताया जात है। हर साल आषाढ़ महीने की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को माता पार्वती की जयंती मनाई जाती है। पूरी दुनिया में हिंदू धर्म को मानने वाले इस दिन माता पार्वती की विशेष पूजा अर्चना करते हैं। पार्वती जयंती के दिन मां पार्वती और भगवान भोलेनाथ की संयुक्त पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। कुंवारों को जीवन बिताने के लिए पसंदीदा शख्स मिल जाता है और विवाहित जातकों को सुखी वैवाहिक जीवन प्राप्त होता है। घर परिवार धन वैभव से परिपूर्ण हो जाता है।

किन्तु इसके लिए माता पार्वती को प्रसन्न करना पड़ता है। पार्वती जयंती के दिन प्रातःकाल स्नान करें और माता पार्वती को 16 श्रृंगार की वस्तुएं, लाल चुनरी और पुष्प अर्पित करें। इसके साथ ही 108 बार ओम पार्वत्यै नः का जाप करें।

इसके साथ ही हम चर्चा करेंगे उन खास उपायों की जिन्हें पार्वती जयंती के दिन करने से माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है।

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श्रृंगार सामग्री का करें दान…. माता पार्वती जयंती के दिन किसी माता के मंदिर में सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी और साड़ी दान करें। माता पार्वती के साथ ही किसी सुहागन महिला को भी ये सारी सामग्री उपहार के तौर पर दें। इससे आपका मंगल ही मंगल होगा। इससे वैवाहिक बाधाएं भी दूर होती हैं। इस दिन आप मां पार्वती को समर्पित मंत्र ओम उमामहेश्वराभ्यां नमः का जाप करें।

माता को लगाएं सिंदूर : कुंवारी कन्याओं को पार्वती जयंती के दिन माता पार्वती को सिंदूर पर अर्पित करें। इस बात का ध्यान रखें कि सिंदूर माता की मांग में लगाया जाता है। मूर्ति या चित्र के चेहरे पर नहीं।

शिवलिंग का करें अभिषेक: माता पार्वती तो भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना से भी प्रसन्न हो जाती हैं। पार्वती जयंती के दिन दूध,दही,शहद, घी और चीनी से शिवलिंग का अभिषें करें। ऐसा करने से घर में सुख शांति और धन सौभाग्य में वृद्धि होती है।

सात्विक भोजन करें: पार्वती जयंती के दिन शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करें। मांस, मछली, अंडे और शराब के साथ ही प्याज एवं लहसुन का सेवन भी इस दिन पूर्णतः वर्जित है। माता पार्वती का आर्शीवाद सुखी वैवाहिक जीवन के लिए अति आवश्यक है। उन्हें प्रसन्न करना है तो इस दिन स्वयं सात्विक भोजन ग्रहण करें और यथासंभव अन्य महिलाओं को भी कराएं।

यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। किसी भी मान्यता का पालन करना व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है।

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