Hindutradition: हिंदू परंपरा में सावन का महीना परिवार के रिश्तों को मजबूती देने वाले महीने के रुप में जाना जाता है। कभी ध्यान से सोचिएगा कि जिस परिवार में विवाहित बेटियों और बहनों की इज्जत होती है, वो परिवार खुशहाल और सुखी संपन्न रहता है। आज भी अधिकांश हिंदू परिवारों में सावन के महीने में बेटियों और बहनों को विशेष आमंत्रण देकर बुलाया जाता है। जिस घर में बेटियों और बहनों को सावन के महीने में प्रेम और आग्रह के साथ बुलाया जाता है, उस घर पर मां लक्ष्मी की अपार कृपा बरसती है।
आइए, आज आपको बताते हैं कि क्यों खास होता है सावन में बेटियों और बहनों का मायके में आना….

सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस पवित्र महीने में कई पारिवारिक परंपराओं का पालन किया जाता है, जिससे खुशहाली, समृद्धि और धन दौलत का संयोग बनता है। अक्सर देखने में आता है कि शादी के बाद बेटियों का घर आना बंद हो जाता है। बहनों का तो आना जाना और भी ज्यादा कम हो जाता है। जिस घर में बेटियां नहीं आती, वहां नकारात्मकता बढ़ती जाती है। बेटियों और बहनों के कदम जिस घर में समय समय पर पड़ते रहते हैं, वो परिवार हमेशा आगे बढ़ता है। उस घर से दरिद्रता दूर भागती है।
यहां पर एक बात और देखने वाली होती है कि जब बेटी की शादी हो जाती है तो मायकों में बहनों की इज्जत कम हो जाती है। इसे कभी भी स्वाभाविक न मानें। बेटी और बहन में जिस घर में फर्क होता है, उसके घर आंगन से लक्ष्मी धीरे धीरे वापस लौटने लगती है। मान्यता है कि जिस परिवार में शादीशुदा बेटी और बहन में फर्क किया जाता है, उसकी मान मर्यादा, आवभगत और इज्जत में कमी की जाती है, उस परिवार में धीरे धीरे गरीबी, बीमारी, दुर्गति घर करने लगती है।
ऐसे में भूल कर भी विवाहित बहन और बेटी में फर्क न करें। बेटी या बहन में से कोई भी अगर अपने मायके से नाराज हो गई या उनका मन दुखी हो गया तो ये परिवार के वर्तमान और भविष्य के लिए अच्छा नहीं माना जा सकता। इससे परिवार से बरकत चली जाती है।
सावन के महीने मे जब विवाहित बेटी या बहन आए तो उसका स्वागत दिल खोल कर करें। बेटी जब घर आए तो दरवाजे पर उसकी आरती उतारे। इसके बाद उसके पैर धोकर सम्मानपूर्वक घर में उसे प्रवेश कराएं। यह याद रखना जरुरी है कि सनातन पंरपरा में बेटियों को देवी का रुप माना जाता है।
माथे पर रोली या चंदन का तिलक लगाकर उस पर अक्षत लगाएं। बेटी का मुंह जरुर मीठा करवाएं। अच्छा हो अगर बेटी या बहन को सावन स्पेशल मिठाई जैसे घेवर, मालपुआ, खीर आदि खिलाए। जब बेटी घर आए तो उसके हाथों से एक तुलसी का पौधाभी अपने घर आंगन में लगवाएं। बेटी को श्रृंगार की सामग्री या कोई अच्छा सा उपहार दें।
अगर परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी है तो बेटी या बहन को उनकी पसंद का उपहार दिलवाएं। देखिएगा, कामयाबी और तरक्की कैसे कदम चूमती है।
आखिर में याद रखिए, सावन केवल व्रत, पूजा और त्योहारों का महीना नहीं है, बल्कि रिश्तों को प्रेम, सम्मान और अपनापन देने का भी अवसर है। जिस घर में बेटियों और बहनों का सम्मान होता है, वहां सुख, शांति और समृद्धि का वास माना जाता है। इसलिए इस सावन अपनी बेटी, बहन या बहू को प्रेमपूर्वक मायके बुलाइए, उनका आदर–सत्कार कीजिए और उन्हें यह एहसास कराइए कि यह घर आज भी उतना ही उनका है जितना पहले था।
यही अपनापन परिवार में बरकत, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा का आधार बनता है। सनातन परंपरा का संदेश भी यही है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का निवास माना जाता है। इसलिए इस सावन रिश्तों की मिठास बढ़ाइए, बेटियों के चेहरे पर मुस्कान लाइए और अपने घर–आंगन को प्रेम, सौभाग्य और मंगलमय आशीर्वाद से भर दीजिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक विश्वासों और लोक–प्रचलित धारणाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है, किसी दावे की पुष्टि या वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करना नहीं।
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