पटना: बिहार में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण की प्रक्रिया अब महत्वपूर्ण चरण में पहुंचती दिख रही है। खासकर अत्यंत पिछड़ा वर्ग यानी EBC के लिए कितना आरक्षण होगा, किन पंचायतों में इसका लाभ मिलेगा और पंचायतवार आरक्षण की तस्वीर कैसी होगी, इसे लेकर जल्द स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग EBC वर्ग की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक स्थिति का अध्ययन कर सरकार को अपनी अनुशंसा देगा।
राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव में EBC आरक्षण के निर्धारण के लिए अति पिछड़ा वर्ग आयोग को समर्पित आयोग की जिम्मेदारी दी है। पंचायती राज विभाग की ओर से अध्ययन के लिए आवश्यक दिशा–निर्देश और प्रक्रिया तैयार की जा रही है। इसके बाद आयोग इन्हीं मानकों के आधार पर अलग–अलग क्षेत्रों में EBC की स्थिति का आकलन करेगा।
EBC आरक्षण के लिए होगा सर्वे
आयोग के अध्ययन में यह देखा जाएगा कि अलग–अलग क्षेत्रों और पंचायतों में EBC समुदाय की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति क्या है। इसके साथ ही शैक्षणिक स्थिति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का भी आकलन किया जाएगा। जरूरत के अनुसार EBC बहुल गांवों के साथ शहरी क्षेत्रों से भी आंकड़े जुटाए जा सकते हैं।
बिहार में EBC वर्ग के अंतर्गत कई जातियां शामिल हैं। इनमें कहार, कुम्हार, धानुक, लोहार, तेली, मल्लाह, कानू और नाई जैसी जातियां प्रमुख हैं। आयोग का अध्ययन इन समुदायों की स्थिति और स्थानीय निकायों में उनके प्रतिनिधित्व को समझने पर केंद्रित रहेगा।
क्या है ट्रिपल टेस्ट?
स्थानीय निकाय चुनाव में पिछड़े वर्ग के आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। इसके तहत समर्पित आयोग द्वारा पिछड़े वर्गों की स्थिति का अध्ययन किया जाता है और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों के आधार पर आरक्षण की जरूरत का आकलन किया जाता है। साथ ही स्थानीय निकायों में कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
बिहार में EBC आरक्षण तय करते समय SC और ST के लिए उपलब्ध संवैधानिक प्रावधानों को भी ध्यान में रखा जाएगा। उपलब्ध जनगणना आंकड़ों के आधार पर SC-ST की आबादी के अनुपात में आरक्षण निर्धारित होने के बाद 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर बची हिस्सेदारी में EBC आरक्षण तय किया जाएगा।
क्या 20 प्रतिशत ही रहेगा EBC आरक्षण?
पिछले पंचायत चुनाव में पिछड़े वर्ग के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था। आगामी पंचायत चुनाव में भी EBC आरक्षण को लेकर इसी स्तर के आसपास चर्चा है, लेकिन अंतिम प्रतिशत अभी तय नहीं हुआ है। यह आयोग के अध्ययन, उसकी अनुशंसा और सरकार की आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। इसलिए फिलहाल किसी निश्चित प्रतिशत को अंतिम मानना जल्दबाजी होगी।
परिसीमन से भी बदलेगी आरक्षण की तस्वीर
EBC आरक्षण के साथ पंचायतों के नए परिसीमन का भी सीधा संबंध है। राज्य में फिलहाल करीब 8,049 ग्राम पंचायतें हैं। नए परिसीमन के बाद ग्राम पंचायतों की संख्या 12,500 से अधिक होने की संभावना जताई गई है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पंचायत परिसीमन से संबंधित प्रक्रियाएं और अधिसूचनाएं जारी की जा रही हैं।
नई पंचायतों और निर्वाचन क्षेत्रों के गठन के बाद आरक्षण की पंचायतवार स्थिति में भी बदलाव हो सकता है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव 2026 के लिए जनसंख्या संबंधी प्रपत्र-1 का अंतिम प्रकाशन भी किया है, जिसमें वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल आरक्षण निर्धारण के लिए किया गया है।
रिपोर्ट के बाद तय होगा अंतिम आरक्षण
पूरी प्रक्रिया को देखें तो आगामी पंचायत चुनाव में EBC आरक्षण केवल एक प्रतिशत तय करने का मामला नहीं है। पहले पंचायतों का परिसीमन, फिर संबंधित आंकड़ों का अध्ययन, ट्रिपल टेस्ट के तहत पिछड़ेपन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का आकलन तथा इसके बाद आयोग की अनुशंसा—इन सभी चरणों के आधार पर अंतिम आरक्षण व्यवस्था तैयार होगी।
इसलिए अभी EBC आरक्षण को लेकर किसी निश्चित प्रतिशत या पंचायत की अंतिम स्थिति पर फैसला नहीं हुआ है। अब सबकी नजर राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्ययन और उसकी रिपोर्ट पर रहेगी। आयोग की अनुशंसा मिलने के बाद सरकार आगे की प्रक्रिया पूरी करेगी और तभी आगामी पंचायत चुनाव में EBC आरक्षण की पंचायतवार तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।
