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तूफानी बल्लेबाजी से दिग्गजों को धूल चटाने वाला बल्लेबाज, टेस्ट क्रिकेट में छक्के के साथ खाता खोलने वाला पहला भारतीय खिलाड़ी

आईपीएल इतिहास में सबसे बड़ा स्कोर बनाने वाला भारतीय बल्लेबाज

खिलाड़ी जिसके नाम है रणजी ट्रॉफी में सबसे तेज शतक लगाने का रिकॉर्ड, जो है तिहरा शतक लगाने वाला तीसरा सबसे युवा भारतीय बल्लेबाज

एक टेस्ट मैच में भारत के लिए सबसे अधिक डीस्मिसल्स, बतौर विकेटकीपर , ऑस्ट्रेलिया में शतक ठोकने वाला पहला भारतीय विकेटकीपर

भारत का वह विकेटकीपर जिसके नाम है सबसे तेज 1000 टेस्ट रन और 50 डीस्मिसल्स का रिकॉर्ड

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विश्व क्रिकेट में वैसे तो एक से बढ़कर एक खिलाडी हुए लेकिन सबकी अपनी पहचान है, एक खास स्टाइल है खेलने का, जिस वजह से उस खिलाडी की एक छवि बन जाती है, यही कारण होता है कि हर एक एक अपना एक पसंदीदा खिलाडी होता है. जिंदगी हो या क्रिकेट, जो बेख़ौफ़ होकर रहता है उसे कभी परेशानी नहीं आती बल्कि वो उस स्थिति में अपना सर्वश्रेष्ठ देता है. लोग ऐसे लोगों से प्रेरणा लेते हैं और सलाम करते हैं. और भारतीय क्रिकेट की जहां तक बात है, यहाँ तो धुरंधर बल्लेबाजों की फ़ौज है. इसी देश ने 100 शतक लगाने वाला बल्लेबाज दिया है और यहीं से 6 गेंदों पर 6 छक्के लगाने वाला बल्लेबाज निकला है. आधुनिक युग में भी एक से बढ़कर एक बल्लेबाज हैं, जो उनकी विरासत संभाल रहे हैं लेकिन आज हम जिस खिलाडी की बात करेंगे वो इस युग का शायद सबसे खतरनाक बल्लेबाज है.

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ऑस्ट्रेलिया को उसके गढ़ गाबा में 24 साल के इस लड़के ने धो डाला और भारत को सीरीज जित्वा दिया. दक्षिण अफ्रीका की खतरनाक पिच और घातक गेंदबाजी के आगे भी जिसके पांव ना लडखडाए और शतक ठोक दिया, ऐसे बल्लेबाज की बात करने वाले हैं, जो अकेले विरोधी टीम पर भारी पड़ जाता है. जो अपने अजब गजब तरीकों से दिग्गज तेज गेंदबाजों का सर चकरा देता है. विकेट के आगे तो इसका खेल निराला है ही, विकेट के पीछे भी यह कमाल करता है. अब आप सोच रहे होंगे विकेट के पीछे और बल्लेबाजी. जनाब, हम बल्लेबाजी की बात नही कर रहे हैं. विकेट के पीछे यह खिलाडी ग्लव्स लगाए और चस्मा पहने बल्लेबाजी कर रहे बल्लेबाजों को चकराता है. किसी भी बल्लेबाज के लिए आसान नहीं रहता वहां खड़े रहना, जब पीछे यह खिलाडी होता है खासकर जब गेंदबाज मध्यम गति का हो और स्पिनर हो तो क्या कहने. विकेटों के पीछे इस खिलाडी की फुर्ती देखने लायक रहती है.

 बात हो रही है टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज और विकेटकीपर ऋषभ पंत की. आज के अंक में हम आपको ऋषभ पंत के जीवन के कुछ जाने अनजाने और अनछुए पहलुओं को जानने की कोशिश करेंगे.

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ऋषभ पंत का जन्म 4 अक्टूबर, 1997 को उत्तराखंड के रुढकी शहर में हुआ था. उनके पिता का नाम श्री राजेन्द्र पंत और माता का नाम श्रीमती सरोज है. पंत की एक बहन भी हैं, जिनका नाम साक्षी पंत है. पंत की स्कूली पढ़ाई लिखाई उत्तराखंड में ही हुई लेकिन अच्छे प्रशिक्षण के लिए राजधानी जाना जरुरी था. ऋषभ पंत जब 12 साल के थे तो वीकेंड पर मां के साथ दिल्ली जाते थे, जहां सोनेट क्रिकेट अकैडमी में तारक सिन्हा पंत को क्रिकेट की तालीम देते थे. तब पंत और उनकी मां को दिल्ली के मोति बाग स्थित गुरुद्वारा में रहते थे.

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वर्ष 2005 में पूरा परिवार दिल्ली आ गया. ये फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि पंत को क्रिकेट खेलना था और पंत के क्षमता को पिता ने पहचान लिया था और इसलिए उनका ही फैसला था, दिल्ली आने का. कोच सिन्हा ने सुझाव दिया कि पंत को राजस्थान में अंडर-13 और अंडर-15 क्रिकेट खेलने के लिए जाना चाहिए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. तब ऋषभ पंत के मेंटोर ने उनको अपनी पूरी बैटिंग टेकनिक बदलने को ही कह दिया ताकि पंत एक बेहतर बल्लेबाज बन सकें. पंत के क्रिकेट जीवन का टर्निंग पॉइंट आया जब वो दिल्ली की तरफ से आसाम के खिलाफ अंडर-19 खेल रहे थे. पंत ने पहली पारी में तो 35 रन ही बनाए लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने 150 रन बना दिए और टॉप स्कोरर बन गए. पंत भी अपनी इस पारी को अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक मानते हैं.

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1 फरवरी, 2016 को अंडर-19 वर्ल्ड कप के दौरान ऋषभ पंत ने नेपाल के खिलाफ 18 गेंदों में अर्धशतक ठोककर तहलका मचा दिया. यह उस लेवल पर सबसे तेज अर्धशतक था और पंत ने उसे बनाकर क्रिकेट वर्ल्ड में सनसनी मचा दी थी. वो यहीं नहीं रुके 2016-17 रणजी सीजन में महाराष्ट्र के खिलाफ पंत ने एक पारी में 308 रन बना दिए और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले भारत के तीसरे सबसे युवा बल्लेबाज बन गए. 8 नवंबर, 2016 को झारखंड के खिलाफ मुकाबले में पंत ने 48 गेंद पर शतक ठोक दिया. पंत ने रणजी ट्रॉफी इतिहास का सबसे तेज शतक बना दिया था. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 2-2 रिकॉर्ड बनाकर पंत ने क्रिकेट पंडितों को अपना मुरीद बना दिया था और क्रिकेट के गलियारे में अब पंत के नाम की चर्चा थी. यही वजह रही कि उनको फरवरी, 2017 में 2016-17 विजय हजारे ट्रॉफी टूर्नामेंट के लिए दिल्ली का कप्तान घोषित कर दिया गया, पंत ने गौतम गंभीर से कप्तानी ली थी, जिन्होंने पिछले सीजन में दिल्ली को फाइनल तक पहुंचाया था.

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दिल्ली के कोच भास्कर पिल्लई ने कहा, दिल्ली के कोच भास्कर पिल्लई ने कहा कि पंत को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए यह एक “सर्वसम्मत निर्णय” था. इधर तो सबकुछ ठीक चल रहा था लेकिन लेकिन परमात्मा पंत का अब असली इम्तिहान लेने वाले थे. 2017 के अप्रैल महीने में पंत के पिता उनको हमेशा के लिए छोड़कर चले गए. पंत के सर से पिता का साया चला गया और अब घर की भी सारी जिम्मेदारी पंत के ही कंधे ही आ गई. लेकिन पंत ने भी हार नहीं मानी और क्रिकेट खेलते रहे. वो मन ही मन संकल्प कर चुके थे कि अब वो क्रिकेट ही खेलेंगे.

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आईपीएल 2016 के ऑक्शन में दिल्ली डेयरडेविल्स ने ऋषभ पंत को खरीद लिया, जिस दिन ये हो रहा था, पंत अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारत को जीता रहे थे. पंत ने शतक बनाया था और मैच जीताकर भारतीय टीम को सेमीफाइनल में पहुंचाया था. अपने तीसरे आईपीएल मुकाबले में पंत ने 40 गेंदों पर 69 रन बनाए थे और गुजरात लायंस के खिलाफ अपनी टीम को 8 विकेटों से शानदार जीत दिलाई थी. फिर अगले सीजन में इसी टीम के विरुद्ध पंत ने 43 गेंदों पर 97 रनों की पारी खेली थी.

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अब ऋषभ पंत ने टीम इंडिया का भी दरवाजा खटखटा दिया था. इंग्लैंड की टीम भारत आई थी और टी20 सीरीज के लिए ऋषभ पंत को टीम इंडिया के स्क्वाड में शामिल किया गया था. 1 फरवरी, 2017 वो दिन था, जिसके लिए पंत उत्तराखंड से दिल्ली जाते थे,इसी दिन के लिए उनकी मां गुरूद्वारे में दिन और रात गुजारा करती थी. बैंगलोर के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में 19 साल और 120 दिन की उम्र में ऋषभ पंत ने भारत के लिए अपना टी20 अन्तराष्ट्रीय डेब्यू किया.

इसी बीच 2017-18 जोनल टी20 लीग में हिमाचल और दिल्ली के बीच मैच खेला जा रहा था और पंत ने 32 गेंदों पर शतक बनाकर फिर से रिकॉर्ड बना दिया. यह टी20 क्रिकेट का दूसरा सबसे तेज शतक था.

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इसके बाद फरवरी, 2018 में निद्हास ट्रॉफी के लिए पंत को टीम इंडिया के स्क्वाड में शामिल किया गया. 2018 आईपीएल सीजन में ऋषभ पंत ने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच में 63 गेंदों पर 128 रन बना दिए, जो कि भारतीय खिलाडियों में आईपीएल इतिहास का सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत स्कोर था. इसके अलावा वो आईपीएल में शतक ठोकने वाले दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी बन गए. आईपीएल में दमदार प्रदर्शन के इनाम्स्वरूप जुलाई, 2018 में उनको इंग्लैंड के विरुद्ध टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम में चुन लिया गया और 18 अगस्त, 2018 को ऋषभ पंत ने अपना अन्तराष्ट्रीय टेस्ट डेब्यू भी कर लिया. ऋषभ पंत ने इंटरनेशनल क्रिकेट में भी अपनी खतरनाक बैटिंग स्किल दिखाया वो भारत के पहले बल्लेबाज बने जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में छक्के के साथ अपना खाता खोला था. 11 सितम्बर, 2018 को पंत ने अपने टेस्ट अन्तराष्ट्रीय करियर का पहला शतक जड़ दिया. ऐसा करके वो भारत के पहले और विश्व के दूसरे सबसे युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज बने, जिन्होंने इंग्लैंड में शतक लगाया था. उसी महीने उनको वेस्टइंडीज के विरुद्ध खेली जाने वाली वनडे सीरीज के लिए टीम इंडिया में शामिल किया गया. और पंत ने 21 अक्टूबर,2018 को भारत की तरफ से वनडे डेब्यू भी कर लिया.

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दिसंबर, 2018 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के पहले टेस्ट में पंत ने कुल 11 कैच लपके थे, जो किसी भी टेस्ट मैच में भारतीय खिलाड़ियों में सबसे अधिक है. फिर जनवरी, 2019 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ही चौथे टेस्ट मैच में पंत ने शतक लगाकर इतिहास रच दिया. ऑस्ट्रेलिया की धरती पर शतक लगाने वाले वो भारत के पहले विकेटकीपर बने थे.

2019 वर्ल्ड कप के दौरान जब दिग्गज बल्लेबाज शिखर धवन इंजरी के चलते टूर्नामेंट से बाहर हो गए, ऋषभ पंत को उनके रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम में शामिल किया गया था. वर्ल्ड कप के बाद ICC ने ऋषभ पंत को स्क्वाड का राइजिंग स्टार कहा था.

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सितंबर, 2019 में वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच के दौरान ऋषभ पंत टेस्ट क्रिकेट में 50 डीस्मिसल्स करने वाले भारत के सबसे तेज विकेटकीपर बन गए. लेकिन 2019-20 होम सीजन ऋषभ पंत के लिए निर्णायक होने वाला था, यह सीजन उनके लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण भी था. दिग्गज विकेटकीपर और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया और अब भारत को उसके नए विकेटकीपर-बल्लेबाज की तलाश थी और पंत रेस में सबसे आगे थे. लेकिन पंत उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाए जिस वजह से केएल राहुल, एक दूसरे विकेटकीपर का उदय हुआ, इसका साफ़ मतलब था, पंत की दावेदारी अब कमजोर हो रही थी. और रही कसर 2020 आईपीएल ने पूरी कर दी. पिछले 2 सिजनों में जिन्होंने 168 की स्ट्राइक रेट से 1172 रन बनाए थे, वह बल्लेबाज इस सीजन 113 की स्ट्राइक रेट से 343 रन ही बना पाया. टूर्नामेंट में उनके बल्ले से एकमात्र अर्धशतक फाइनल में निकला, जहां टीम को हार मिली थी. इसके बाद पंत को 2020-21 ऑस्ट्रेलिया के विरुद्द्ध लिमिटेड ओवर सीरीज के लिए टीम इंडिया से ड्राप कर दिया गया. लेकिन टेस्ट स्क्वाड में वो जगह बनाने में कामयाब हो रहे थे लेकिन एडिलेड में खेले गए पहले टेस्ट मैच में उनको प्लेयिंग-11 में शामिल नहीं किया गया. ये वो दौर था, जब फैंस और मीडिया पंत की जमकर आलोचना कर रहा था. वे सब पंत में धोनी की छवि ढूंढ रहे थे, जब भी मैदान में पंत से कोई गलती होती, भीड़ धोनी-धोनी चिल्लाने लगती थी. पंत फैंस की उम्मीदों तले दबे हुए थे लेकिन अब वो समझ गए थे, उन्हें क्या करना है.

Rishabh Pant. Photo GettyX

सीरीज के पहले टेस्ट में भारतीय टीम दूसरी पारी में सिर्फ 36 रनों पर ऑलआउट हो गई थी, और पहले इनिंग में अच्छी बढ़त के बावजूद टीम को 8 विकेटों से हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद मेलबर्न में खेले जाने वाले दूसरे टेस्ट मैच के लिए ऋषभ पंत को रिद्धिमान साहा की जगह शामिल किया गया. मेलबर्न टेस्ट में तो पंत पहली पारी में 29 रन ही बना पाए लेकिन सिडनी टेस्ट की वो पारी पंत के क्रिकेट करियर में मिल का पत्थर साबित हुई. भारत को अंतिम दिन मैच बचाने के लिए 97 ओवर खेलने थे लेकिन पंत ने काउंटर अटैक करते हुए 118 गेंदों पर 97 रनों की पारी खेल डाली, इस दौरान उन्होंने चेतेश्वर पुजारा के साथ मिलकर 148 रनों की साझेदारी की और भारत मैच बचाने में कामयाब हुआ.
4 मैचों की सीरीज 1-1 की बराबरी पर था और अब गाबा में निर्णायक टेस्ट मैच खेला जाना था. ब्रिसबेन का यह मैदान ऑस्ट्रेलिया का गढ़ था, जहां कंगारू टीम 1988 के बाद से कभी नहीं हारे थे. भारत के लिए परेशानी ये थी कि टीम के फर्स्ट चॉइस प्लेयर्स इंजरी से जूझ रहे थे.

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ऋषभ पंत ने मैच के अंतिम दिन मैच जिताऊ पारी खेली, भारत ने अंतिम दिन चौथी पारी में 328 रन बनाकर मैच जीता और नाबाद 89 रन बनाने वाले ऋषभ पंत मैच के हीरो थे. पंत की उस पारी को टेस्ट क्रिकेट इतिहास की सर्वश्रेष्ठ पारी कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. पंत इसके बाद टीम इंडिया के नियमित सदस्य बन गए. 2021 और 2022 टी20 वर्ल्ड कप दोनों में पंत टीम इंडिया का हिस्सा रहे. जनवरी, 2022 में हुए एनुअल icc अवार्ड्स में पंत को icc मेंस टेस्ट टीम ऑफ द इयर 2021 में चुना गया. मार्च, 2022 में श्रीलंका के विरुद्ध सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच में पंत महान कपिल देव का रिकॉर्ड तोड़ते हुए भारत की तरफ से टेस्ट क्रिकेट इतिहास में सबसे तेज अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए. पंत ने सिर्फ 28 गेंदों में वो अर्धशतक पूरा किया था.

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मई, 2022 में जब दक्षिण अफ्रीका की टीम लिमिटेड ओवर सीरीज खेलने भारत आई थी, पंत को टी20 आई सीरीज के लिए टीम इंडिया का उपकप्तान बनाया गया था लेकिन पहले मैच से एक दिन पहले कप्तान केएल राहुल इंजरी की वजह से बाहर हो गए, तब पंत ने टीम की कप्तानी की थी. 24 साल 248 दिनों के ऋषभ पंत किसी भी टी20 मैच में भारत की कप्तानी करने वाले दूसरे सबसे युवा कप्तान थे. जुलाई 2022 में इंग्लैंड दौरे पर ऋषभ पंत ने अपने वनडे अंतराष्ट्रीय करियर का पहला शतक भी ठोक दिया, वो 125 रन बनाकर नॉट आउट रहे थे.

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ऋषभ पंत टीम इंडिया के कोर खिलाड़ियों में से एक हैं और टेस्ट में तो उनका कद काफी बड़ा है, वो इस फॉर्मेट में स्थापित बल्लेबाज हैं. बांग्लादेश के खिलाफ भी अभी हालिया सीरीज में उन्होंने जबरदस्त बल्लेबाजी की थी. ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में मिली जीत में ऋषभ पंत के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है. वो इस साल भारत के लिए सबसे अधिक टेस्ट रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं.

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लेकिन अभी ऋषभ पंत अस्पताल में हैं, दिसंबर 2022 में रूरकी के पास उनके कार का एक्सीडेंट हो गया, हादसा तो बड़ा भीषण था लेकिन सौभाग्य से पंत सकुशल हैं. करीब 6 महीनों तक वो क्रिकेट से दूर रह सकते हैं. और इस बीच टीम इंडिया को उनकी बहुत कमी खलेगी. चक दे क्रिकेट की पूरी टीम ऋषभ पंत के जल्द स्वाश्थ लाभ की कामना करती है. आपके अनुसार पंत के बाहर होने से टीम इंडिया को कितना नुकसान होगा, जबकि आगे विश्व कप है. कमेंट में हमें बताएं.

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