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Bihar Land News: बिहार की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज़ से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का हालिया ऐलान एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। जिस राज्य को लंबे समय तक केवल कृषि और श्रम प्रवासन के लिए जाना जाता रहा, अब वही बिहार देश की सबसे आधुनिक तकनीक — सेमीकंडक्टर उद्योग — की दौड़ में शामिल होने जा रहा है। नीतीश सरकार का यह फैसला न सिर्फ निवेशकों को आकर्षित करेगा, बल्कि बिहार की छवि को भी राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान देगा।

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औद्योगिक निवेश को तेज़ करने के उद्देश्य से राज्य कैबिनेट ने बिहार सेमीकंडक्टर पॉलिसी–2026 को मंजूरी दे दी है। इस नीति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सेमीकंडक्टर उद्योग लगाने वाले निवेशकों को महज 1 रुपये की टोकन राशि पर 1 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। यानी करोड़ों की जमीन अब कौड़ियों के भाव में मिलेगी। यही वजह है कि इस ऐलान के बाद पूरे देश में इसकी चर्चा तेज़ हो गई है और उद्योग जगत में इसे “बिहार का मास्टरस्ट्रोक” माना जा रहा है।

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नई नीति के तहत निवेशकों को सिर्फ जमीन ही सस्ती नहीं मिलेगी, बल्कि उन्हें पूंजीगत सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी में छूट, रजिस्ट्रेशन शुल्क में राहत और भूमि संपरिवर्तन शुल्क में भी छूट दी जाएगी। सरकार का साफ़ मकसद है कि जो भी उद्यमी बिहार में सेमीकंडक्टर यूनिट लगाना चाहता है, उसके सामने सरकारी प्रक्रियाएं बाधा न बनें, बल्कि प्रोत्साहन का जरिया बनें। नीति के अनुसार, प्रोजेक्ट लागत के हर 100 करोड़ रुपये पर 1 एकड़ जमीन 1 रुपये में दी जाएगी, जो निवेशकों के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है।

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उद्योग विभाग ने कैबिनेट को दी गई जानकारी में साफ किया है कि सेमीकंडक्टर आज के दौर की आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं। मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहन, मेडिकल उपकरण, रक्षा प्रणाली, संचार नेटवर्क और यहां तक कि अंतरिक्ष तकनीक तक — हर जगह चिप्स का इस्तेमाल हो रहा है। विभाग के मुताबिक, भारत का सेमीकंडक्टर और चिप बाजार बेहद तेज़ी से बढ़ रहा है और 2030 तक इसके 100 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का होने का अनुमान है। ऐसे में बिहार का इस सेक्टर में कदम रखना भविष्य की बड़ी तैयारी माना जा रहा है।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सपना है कि बिहार केवल पिछड़ा राज्य कहलाने की पहचान से बाहर निकले और पूर्वी भारत का टेक्नोलॉजी हब बने। यही वजह है कि सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने का संकल्प मुख्यमंत्री के “सात निश्चय पार्ट-3” में भी शामिल किया गया है। सरकार मानती है कि हाईटेक इंडस्ट्री के आने से बिहार में केवल पूंजी निवेश ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।

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इस नीति का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिहार से बाहर काम करने जाने वाले युवाओं को अब अपने ही राज्य में रोजगार मिलने की उम्मीद बढ़ेगी। इंजीनियरिंग, आईटी, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में पढ़े लाखों युवाओं के लिए यह एक नया रास्ता खोलेगा। साथ ही, सेमीकंडक्टर उद्योग के साथसाथ उससे जुड़े सहायक उद्योग भी विकसित होंगे, जिससे राज्य की आर्थिक विकास दर को नई रफ्तार मिलेगी।

कुल मिलाकर, नीतीश सरकार का यह फैसला बिहार को औद्योगिक नक्शे पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगर यह नीति ज़मीनी स्तर पर सही तरीके से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में बिहार केवल राजनीति के लिए नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के लिए भी जाना जाएगा। यही वजह है कि यह खबर सिर्फ उद्योगपतियों के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए अहम है जो बिहार के विकास की नई कहानी देखना चाहता है।

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