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भारतीय टीम का यह खिलाड़ी जब टीम इंडिया का हिस्सा बना तो लोग इस खिलाड़ी की तुलना कपिल देव से करने लगे और कहने लगे कि भारत को एक दूसरा कपिल देव मिल गया है. क्रिकेट को जानने वाले कपिल देव को तो जरूर जानते ही जानते होंगे. आज हम आपको एक ऐसे ही खिलाड़ी से मिलवाने वाले हैं जिसे आप गेंदबाजी करते हुए तो देखें ही हैं साथ ही आपने उसके बल्लेबाजी भी देखें ही हैं. टीम को जब जरूरत हुई तब उसने टीम को एक मुकाम हासिल करवाया है. जब इस खिलाड़ी के शुरुआती दिनों की देखेंगे तो बहुत अच्छा नहीं रहा था. वह खिलाड़ी जब चप्पल पहनकर क्रिकेट मैदान में गेंदवाजी करने पहुंचा तो कोच ने उसे बाहर जाने को कह दिया था. लेकिन कुछ ही देर के बाद वह खिलाड़ी जब जूता पहनकर आया तो लगातार 40 मिनट तक गेंद फेकता रहा. बाद के दिनों में कोच ने इस बात का खुलासा किया तो उन्होने बताया कि 40 मिनट के बाद भी वह खिलाड़ी थका नहीं था अगर हम उससे गेंदबाजी नहीं रुकवाते तो वह कितने बल्लेबाजों को चोटिल कर देते.

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तो चलिए इस गेंदबाज के बारे में हम आपको बताते हैं. जिसे गेंदबाजी में सचिन तेंदुलकर के नाम से जाना जाता है. इस गेंदबाज को भारतीय टीम के स्विंग गेंदबाजी का युवराज कहा जाता है. यह वह गेंदबाज है जो पुरानी गेंद से स्विंग करवाने की क्षमता रखता है. तो आखिरी के ओवरों में छक्के मारने की भी क्षमता रखता है. जी हां आप सही समझ रहे हैं हम बात कर रहे हैं भारतीय टीम के तेज गेंदबाज जाहीर खान के बारे में… जहीर खान को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था. जहीर खान का यह जुनून कब पागलपन में बदल गया उन्हें पता भी नहीं चला. जहीर ने क्रिकेटर बनने की ठान ली थी. अब जहीर के पिता का भी सपोर्ट मिलना शुरू हो गया था. हालांकि उनके पिता की इच्छा थी कि वह इंजिनियर बने लेकिन जुनून जब पागलपन बन जाए तो कौन किसकी सुनता है. जहीर के पिता ने बेटे को क्रिकेट सिखने के लिए मुंबई नेशनल क्रिकेट क्लब के बारे में ज्वाइन कर ली थी. लेकिन पैसे की बहुत तंगी थी. मुंबई में एक रिश्तेदार के यहां रह कर किसी तरह से गुजारा किया यहां तक की जमीन पर भी सोना पड़ा था. जब उन्होंने क्लब ज्वाइन किया तो कोच सुधीर नाईक का खुब साथ मिला. यह वही कोच हैं जिन्होंने चप्पल पहनकर नेट में आने से मना कर दिया था. कोच के ही सहयोग से जहीर को एक निजी कंपनी में 5000 का जॉव मिल गया था, इसी जॉब के बाद जहीर ने अपना पहला किट खरीदा था.

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नेशनल क्रिकेट क्लब से खेलते हुए उनका प्रदर्शन बेहतर रहा, उन्होंने अपने क्लब के लिए कई मैच जिताएं इसके बाच क्लब के कोच ने उन्हें चेन्नई के MRF पेस फाउंजेशन में भेजा जहां उनपर नजर पड़ी महान तेज गेंदबाज डेनिस मिली को. जब उन्होंने जहीर को पहली बार देखा तो उसी समय पहचान लिया कि यह खिलाड़ी लंबी रेस का घोड़ा है. यहां के बाद जहीर का चयन वडोदरा रणजी के लिए हुआ. जहां उनका शानदार प्रदर्शन रहा. इसमें बडोदरा टीम ने रेलवे को हरा कर 43 साल बाद रणजी पर कब्जा जमाया. इस टूर्नामेंट में जहीर ने 145 रन देकर 8 विकेट अपने नाम किया. अब जहीर पीछे मुड़कर देखने वालों में से नहीं थे… साल 2000 में उनका चयन भारतीय टीम के लिए हुआ. 3 अक्टूबर 2000 को उन्होंने पहला एकदिवसीय मैच कीनिया के खिलाफ खेला. इसमें उन्हें 3 विकेट मिला. वन-डे में उनके बेहतर प्रदर्शन के बदौलत इसी 10 नवंबर को उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू भी कर लिया. जहीर की गेंदबाजी यहां भी खुब चमकी. अब जहीर की स्विंग गेंदबाजी भारतीय टीम को विकेट दिला रही थी और वे टीम में रास आने लगे थे. विपक्षी बल्लेबाजों में जहीर नाम का खौफ भी था.

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उस समय भारतीय टीम में जवागल श्रीनाथ, आशीष नेहरा, अजीत अगरकर जैसे गेंदबाज थे ऐसे में जहीर ने अपनी गेंद से सभी को प्रभावित किया. और कप्तान का दिल जीत लिया. तब आया साल 2003 का विश्वकप इसमें उनका प्रदर्शन शानदार रहा. साल 1983 के बाद भारतीय टीम पहली बार फाइनल में पहुंची थी. इस टूर्नामेंट में जहीर की गेंदबाजी कहर बरपा रही थी. भारत की तरफ से सबसे ज्यादा विकेट इन्ही के नाम था. इसके बाद इनके कैरियर में कई बड़े उतार चढ़ाव देखने को मिले. कई बार चोट की वजह से वे टीम से बाहर रहे. इस दौरान भारतीय टीम को इरफान पठान, श्रीसंत, आरपी सिंह और मुनाफ पटेल की एंट्री हो चुकी थी. जहीर खान को 2011 के विश्वकप के लिए भी याद किया जाता है. यहां उन्होंने विश्व को नकल बॉल के बारे में बताया था और इंग्लैड के साथ हुए मैच में लगभग हारी हुई मैच को टाई करवा दिया था. इस विश्वकप में जहीर ने 9 मैचों में 21 विकेट अपने नाम कर लिए. सबसे ज्यादा विकेट इनके ही नाम था. और भारत विश्व कप जीत गया था. इस में जहीर का अहम योगदान था.

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