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रिद्धिमान साहा वो क्रिकेटर जिसे सिस्टम ने सन्यास लेने पर मजबूर किया….

इंटरव्यू ना देने पर जब एक नेशनल न्यूज के पत्रकार ने रिद्धिमान साहा को धमकाया

चीते माफिक फुर्तीले विकेट कीपर साहा को क्यों नजरंदाज किया गया

खेल से ज्यादा एक विवाद ने साहा को फेम दिलाया

एक टेस्ट में 10 कैच पकड़ने वाले साहा पहले भारतीय विकेट कीपर है

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क्रिकेट … अनिश्चितताओं से भरा एक ऐसा खेल जिसे लाखों की संख्या दर्शक स्टेडियम में बैट और गेंद के बीच होने वाले घमासान को देखने के लिए आते है। मैदान पर बल्लेबाज द्वारा छक्कों की बारिश हो या फिर एक गेंदबाज की विकटों की झड़ी लगते ही स्टेडियम तालियों से गूंज उठता है। एक गेंदबाज और बल्लेबाज के बीच चल रहे घमासान को तो सभी देखते है लेकिन क्रिकेट में एक किरदार ऐसा भी होता है जो विकेट के पीछे अपनी करिश्माई और चतुराई भरी विकेट कीपिंग से तालियां बजवाने पर मजबूर कर देता है। इसलिए क्रिकेट के मैदान पर जितना अहम रोल एक बल्लेबाज और गेंदबाज का होता है उतना ही अहम रोल एक विकेट कीपर का भी होता है। दोस्तों भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमेशा से ही एक से बढ़कर एक योद्धा विकेट कीपर आए है। जिन्होंने अपनी शानदार विकेट कीपिंग से भारतीय क्रिकेट में चार चांद लगाए।

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे पहले विकेट कीपर जनार्दन नवले थे। इसके बाद 60 के दशक में फारुख इंजीनियर ,80 के दशक में सय्यद किरमानी, 90 के दशक में नयन मोगिया, और 21वीं सदी के आते आते महेंद्र सिंह धोनी, और मौजूदा दौर में ऋषभ पंत जैसे जादुई विकेट कीपर टीम को मिले। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा विकेट कीपर टीम में रहा जो गुमनामी की तरह खेला। और उसका करियर सिस्टम की भेंट चढ़ गया। उसे टीम में तभी मौका मिलता जब कोई खिलाड़ी चोटिल होता। अपने करियर में कम मैच खेलने के बाऊजुद विकेट के पीछे चीते जैसी फुर्ती रखने वाले इस विकेट कीपर को सन्यास लेने पर मजबूर किया।

हम बात करने वाले हैं भारतीय क्रिकेट के एक ऐसे विकेट कीपर बल्लेबाज की जिसे विराट कोहली सदी का सबसे अच्छा और महान विकेट कीपर मान चुके है। जी हां हम बात कर रहे है रिद्धिमान प्रशांत साहा की…..

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24 अक्तूबर 1984 को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में जन्मे रिद्धिमान साहा जिसे दुनिया आज फ्लाइंग साहा के रूप में जानती है। रिद्धिमान साहा ने अपनी स्कूली शिक्षा सिलीगुड़ी बॉयज हाई स्कूल से पूरी की। साहा को बचपन से ही क्रिकेट पसंद था। साहा जब छोटे थे तो वो क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को टीवी पर खेलते हुए देखते थे। साहा सचिन को अपना भी मानते है। सचिन को टीवी पर खेलते हुए देखकर साहा ने भी क्रिकेटर बनने का ख्वाब देखा। और इस ख्वाब को हकीकत में बदलने के लिए साहा ने पहले अपना क्रिकेटिंग करियर स्कूल क्रिकेट फिर एज ग्रुप क्रिकेट से शुरू किया। साहा ने विकेट के पीछे हाथ आजमाए साथ बैट से बेखौफ बल्लेबाजी का जौहर भी दिखाया। अंडर 19 और अंडर 20 में विकेट कीपिंग और बल्ले से कमाल करने वाले साहा को बंगाल की तरफ से घरेलू क्रिकेट उस समय खेलने को मिला जब बंगाल के ही विकेट कीपर दीपदास गुप्ता इंडियन क्रिकेट लीग खेलने चले गए थे। साल 2007 में रणजी क्रिकेट में पदार्पण करने वाले साहा ने अपने डेब्यू मैच में 111 रनों की शानदार पारी खेली। घरेलू क्रिकेट में रनों का पहाड़ खड़ा करने वाले साहा ने अपनी धाक जमा ली थी। तभी साल 2008 में आईपीएल के पहले सीजन की नीलामी में कोलकाता नाइट राइडर्स ने साहा को टीम में शामिल कर लिया। 3 सालों तक साहा कोलकाता फ्रेंचाइजी से जुड़े रहे। इस बीच उन्होंने 2009 और 2010 के रणजी सीजन में साहा के बल्ले ने खूब आग उगला। और 5 मैचों मे 318 रन ठोक डाले। साहा जिस तरह से खेल रहे थे। उनके लिए भारतीय टीम के दरवाजे जल्द ही खुलने वाले थे। उस समय इंडियन क्रिकेट के मुख्य चयनकर्ता रहे कृष्णमाचारी श्रीकांत की नजर साहा पर पड़ी।

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कहते हैं दुनिया में दो तरह के लोग होते है एक वो जिनपर किस्मत मेहरबान होती है और एक वो जिन्हे अपनी किस्मत खुद लिखनी पड़ती है। साहा उन खिलाड़ियों में शुमार है जिन्होंने अपने खेल से अपनी किस्मत खुद लिखी है। प्रतिभा से भरे और हौंसले से लबरेज साहा को 9 फरवरी 2010 को साउथ अफ्रीका के खिलाफ अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला। 263 नंबर की कैप पहनकर नागपुर के जामथा क्रिकेट स्टेडियम में खेलने उतरे साहा कुछ खास कमाल नहीं कर पाए। पहली पारी में शून्य और दूसरी पारी में 36 रन बनाए। भारत यह मैच हार गया और साहा को प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया। निराश और हताश साहा को इसी साल 28 नवंबर 2010 को न्यूजीलैंड के खिलाड़ी वनडे क्रिकेट में भी डेब्यू करने का मौका मिला। लेकिन सिर्फ 5 रन ही बना सके। उस समय टीम में धोनी भी थे जो विकेट कीपिंग की पहली पसंद थे। साथ ही उनके पीछे पार्थिव पटेल और दिनेश कार्तिक भी खड़े थे। जाहिर सी बात थी कि साहा को टीम में सिर्फ औचारिक ही शामिल किया जाता था। यही कारवां उनके साथ आईपीएल में भी देखने को मिला।

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साल 2012 में बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में साहा को एक बार फिर सफेद जर्सी में खेलने का मौका मिला। जब धोनी को धीमे ओवर रेट के चलते एक मैच में बैन कर दिया गया। साहा ने यहां सिर्फ 35 रन बनाए। इसके बाद उन्हें 2013, 2014 में टीम में तो लिया जाता लेकिन खिलाया नहीं जाता था। साल 2014 में बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी का तीसरा मैच जो एडिलेड में था। और धोनी का आखिरी टेस्ट भी। मैच के बाद धोनी ने सन्यास का एलान किया। यहां से साहा के लिए दरवाजे खुल गए गए थे। साहा आईपीएल के 7 वें सीजन में किंग इलेवन पंजाब की तरफ से खेले। इस सीजन में साहा अलग ही टशन में थे। आईपीएल के फाइनल में साहा ने 49 गेंदों पर शतक ठोक डाला और ऐसा करने वाले पहले बल्लेबाज बन गए। साहा ने उस मैच में 115 रन बनाए फिर भी पंजाब मुकाबला हार गई। यहां से साहा को कामयाबी के पंख लग गए। साल 2015 में श्री लंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में मौका मिला। साहा ने दो टेस्ट में दो अर्द्ध शतक लगाए। इसके बाद 2016 वेस्टइंडीज दौरे पर साहा ने करियर का पहला शतक लगाया। साल 2017 में साहा ने पहले बांग्लादेश फिर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शतकीय पारी खेली। 2018 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ साहा ने एक टेस्ट मैच में 10 कैच लपके ऐसा करने वाले साहा पहले भारतीय विकेट कीपर बने। सबकुछ अच्छा चल रहा था। तभी उन्हें हैमिस्ट्रिंग में चोट लग गई , चोट के बाउजुद साहा ipl खेले और चोट गंभीर हो गई। जिसके चलते उन्हें 2018 में इंग्लैंड के खिलाफ 5 टेस्ट मैच की सीरीज में नहीं चुना गया। उनकी जगह ऋषभ पंत टीम के साथ गए। पहले ही टेस्ट में छक्का लगाकर खाता खोलने वाले ऋषभ ने उस सीरीज में कई अच्छी पारियां खेली। और टीम की पहली पसंद बन गए। और फिर यहां से शुरू हुआ साहा का बुरा दौर। 2019 में वापसी के बाद भी साहा कुछ खास कमाल नहीं दिखा रहे थे। साल 2020 – 21 की न्यूजीलैंड श्रृंखला में साहा को अंदाजा भी नहीं था कि वो अपना आखिरी टेस्ट खेल रहे है। कोच राहुल द्रविड़ के आते ही साहा की छुट्टी हो गई। और ऋषभ पंत पहली प्राथमिकता तो के एस भरत दूसरी प्राथमिकता बन गए।

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साल 2022 में साहा एक छोटे से विवाद के चलते सुर्खियों में रहे जब एक नेशनल न्यूज चैनल के पत्रकार ने साहा का इंटरव्यू लेना चाहा लेकिन साहा ने मना कर दिया तो उस पत्रकार ने साहा को मारने की धमकी तक दे डाली। फिर शिकायत हुई तो पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई की गई।

रिद्धिमान साहा ने भारत के लिए 37 टेस्ट , 9 वनडे मैच खेले जिसमें तकरीबन 1300 रन बनाए। लेकिन हां घरेलू सीजन में साहा ने करीब 9 हजार रन बनाए है। वहीं IPL में साहा ने 144 मैचों 2477 रन बनाए जिसमें एक शतक भी शामिल है।

दोस्तों, क्या रिद्धिमान साहा को कुछ और मौके मिलने चाहिए थे? आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं .

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