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क्रिकेट के खेल में आंकड़ों की भूमिका अधिक मानी जाती है। या तो आप रिकॉर्ड बनाते है या आपके विरुद्ध कोई रिकॉर्ड बन जाता है। अगर आपने रिकॉर्ड बनाया तो आपको सब याद रखेंगे अगर नहीं बनाया तब तो जरूर याद रखेंगे। उद्धरण के लिए, युवराज सिंह ने 6 छक्के किस गेंदबाज़ के खिलाफ मारे थे यह सभी को याद होगा? अगर नहीं याद तो आप सच में क्रिकेट खेल के दीवाने है या नहीं ये सवाल अपने आप से जरूर पूछियेगा। आज हम आपको कुछ ऐसे शर्मनाक रिकार्ड्स के बारे में बतायंगे जिसने कई क्रिकेटर्स का करियर तबाह कर दिया।

सबसे ज्यादा बार वनडे में जीरो पर आउट होना

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वनडे क्रिकेट को लोकप्रिय बनाने में श्रीलंका के सलामी बल्लेबाज़ सनत जयसूर्या (Sanath Jaysuriya) का बहुत बड़ा हाथ रहा है। वह अपने जामने में 50 ओवर के खेल को टी 20 के अंदाज़ में खेलते थे। वनडे क्रिकेट में 300 से ज्यादा मैच खेलकर 10 हजार से ज्यादा रन बनाने वाले जयसूर्या के नाम इस फॉर्मेट में एक शर्मनाक रिकॉर्ड भी शामिल है। दरअसल 50 ओवरों के खेल में सबसे ज्यादा बार शून्य पर आउट होने का रिकॉर्ड बाएं हाथ के इस लीजेंडरी बल्लेबाज़ के नाम ही है। महज 17 गेंद में 50 रन का रिकॉर्ड अपने नाम रखने वाले जयसूर्या ने अपने करियर में 34 बार शून्य का स्कोर बनाया था। इसके बाद दूसरे और तीसरे नंबर पर पाकिस्तान टीम के दो खिलाडियों का नंबर आता है। शाहिद आफरीदी (Shahid Afridi) ने 30 बार और वसीम अकरम (Wasim Akram) ने 28 बार जीरो पर आउट होकर अपनी नाक कटाई है।

सबसे ज्यादा बार टेस्ट क्रिकेट में बोल्ड आउट

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The Wall के नाम से मशहूर दाए हाथ के महान बल्लेबाज राहुल द्रविड़ ने भी शर्मनाक रिकार्ड्स की लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराया है। उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा बार बोल्ड आउट होने का रिकॉर्ड है। करीब 13 हजार टेस्ट रन बनाने वाले द्रविड़ अपने करियर में 54 बार बोल्ड हुए थे। इसके बाद दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया के एलन बॉर्डर (Allen Border) का नाम आता है जोकि अपने करियर में 53 बार बोल्ड आउट हो चुके है। वही तीसरे नंबर पर क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) है। जिन्हे गेंदबाज़ो द्वारा 48 बार बोल्ड आउट किया गया था।

किसने फेंका है टेस्ट क्रिकेट का सबसे महंगा ओवर

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टेस्ट क्रिकेट फॉर्मेट में बल्लेबाज चौके और छक्के लगाने से ज्यादा अपनी विकेट बचाने का प्रयास करता है। वही कुछ खिलाडी ऐसे भी है जो आक्रामक क्रिकेट ही खेलते है और आगे खड़े फील्डर्स का फ़ायदा उठा कर खूब चौके छक्के लगाते है। आज कल के खिलड़ियों में भारत के ऋषभ पंत इसका सटीक उद्धरण है। लेकिन टेस्ट क्रिकेट के एक ओवर में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड तो ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज जॉर्ज बैले (George Bailey) के पास है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 600 से ज्यादा विकेट लेने वाले इंग्लैंड के जिमी एंडरसन के एक ओवर में 28 रन बनाकर यह रिकॉर्ड बनाया था। एंडरसन के साथ दक्षिण अफ्रीका के रॉबिन पीटरसन ( Robin Peterson) ने भी एक ओवर में 28 रन लुटाये है।

टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा नो बॉल फेंकने वाले गेंदबाज

क्रिकेट के किसी भी प्रारूप में टीम को ऐसा गेंदबाज़ नहीं चाहिए जो फ्री के रन लुटाये। लेकिन कभी कभी गेंदबाज़ ज्यादा जोर लगाने के चक्कर में नो बॉल कर बैठता है। भारत ने नो बॉल के चलते एक चैंपियंस ट्रॉफी और एक टी 20 वर्ल्ड कप गवाया था। बल्लेबाज आउट होने के बाद भी नॉट आउट रहता है अगर वह गेंद नो बॉल होती है। आज हम आपको बताते है कि एक ओवर में सबसे ज्यादा नो बॉल फेकने का रिकॉर्ड किसके पास है? दरअसल टेस्ट क्रिकेट में एक ओवर में सबसे ज्यादा बार नो बॉल फेंकने का रिकॉर्ड अपने नाम पर रखने वाले वेस्टइंडीज कर्टले एंब्रोस थे। एंब्रोस अपने वक़्त के सबसे खतरनाक गेंदबाज़ो में से एक थे। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 400 से ज्यादा विकेट लिए है। एंब्रोस ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1993 की सीरीज के पर्थ टेस्ट में एक ओवर में 9 नोबॉल फेंकी थी। यह ओवर 15 गेंद का रहा था, जो टेस्ट क्रिकेट की रिकॉर्ड बुक में सबसे लंबे ओवर के तौर पर दर्ज है।

टेस्ट इतिहास का सबसे धीमा शतक

टेस्ट क्रिकेट पहले से ही धीमे खेल की श्रेणी में आता है उसके बाद भी पाकिस्तान के आल राउंडर के पास टेस्ट क्रिकेट में सबसे धीमा शतक लगाने का रिकॉर्ड है। पाकिस्तान के ऑलराउंडर मुदस्सर नजर (Mudassar Nazar) ने 1977-78 के लाहौर टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ शतक लगाने के लिए पिच पर 557 मिनट बल्लेबाजी की थी। क्रिकेट के इतिहास में यह सबसे धीमा शतक है। आज कल इंग्लैंड की टीम ने टेस्ट क्रिकेट में भी ताबतोड़ बल्लेबाज शुरू कर दी है हाल ही में बीते पाकिस्तान बनाम इंग्लैंड टेस्ट मैच में इंग्लैंड की टीम ने 100 में ही 600 से अधिक रन थोक डाले थे। जहा टेस्ट क्रिकेट में 3 रन प्रति ओवर का एवरेज बेहतरीन माना जाता वह इंग्लैंड ने 6 रन प्रति ओवर से भी अधिक तेजी से बल्लेबाज की अंत में काम समय होने के कारण भी इंग्लैंड की टीम जीत दर्ज करने में कामयाब हुई।

 

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