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बीजेपी और महागठबंधन का बना पॉलिटिकल बैटल ग्राउंड बिहार का सिमांचल बनता जा रहा है. अपनी जोर आजमाइश को बीजेपी और महागठबंधन दोनों हीं इस क्षेत्र में बढाने में लगे हुए हैं. शायद इसलिए महागठबंधन किशनगंज में 25 फरवरी को अपनी रैली करने जा रहा है. वहीँ केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी साल 2022 सितम्बर के महीने में अपनी बिहार की पहली चुनावी सभा सिमांचल से की थी. राजनितिक जानकारों का कहना है की लोकसभा चुनाव का शंखनाद नीतीश और तेजस्वी इस सभा से हीं कर सकते हैं.

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चलिए अब आगे के इस चर्चा में हम जानते हैं की आख़िरकार सिमांचल में हीं ये राजनितिक दल इतने जोरोशोरों की आजमाइश क्यों करते हैं. इसके लिए हमें 2019 के लोकसभा चुनाव के परिणाम को समझना सबसे ज्यादा जरुरी है. दरअसल पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज सिमांचल में लोकसभा की ये चार सीटें हैं. इनमे कांग्रेस प्रत्याशी एक सीट पर चुनाव जीते थे और तीन पर एनडीए का कब्ज़ा था. लेकिन इसका समीकरण पूरी तरह से तब बदला जब नीतीश कुमार बीजेपी से अलग हुए. अब सिमांचल की चार सीटों में एक पर बीजेपी का कब्ज़ा है और तीन सीटों पर महागठबंधन. बता दें की तब बीजेपी के साथ जदयू चुनाव लड़ी थी और जदयू के दो प्रत्याशी विजय हुए थे. लेकिन बीजेपी और जदयू के अलग होते हीं बीजेपी इस क्षेत्र में कमजोर पर गयी. लेकिन फिर भी 2024 के लोकसभा चुनाव में कमजोर होते हुए भी बीजेपी अपना कब्ज़ा तीनों सीटों पर चाहती है. बीजेपी के तरफ से इस बात का तर्क दिया जाता है की बीजेपी के कारण हीं उन दो सीटों पर जीत मिली थी. बीजेपी के वजह से हीं सिमांचल के लोगो ने अपना वोट जदयू को दिया था. इसलिए तीनो सीटों को बचाने की चुनौती जदयू के महागठबंधन में आने के बाद इनके सामने है. इन्ही वजहों से यहाँ पर अपनी रैली महागठबंधन 25 फरवरी को करने जा रही है.

वहीँ सिमांचल में बदलती डेमोग्राफी बीजेपी के चिंता का कारण बना हुआ है. केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के अनुसार 20 गुना मुसलमानों की संख्या 1970 के बाद इस क्षेत्र में बढ़ गयी है और वहीँ हिन्दुओं की संख्या में कमी आई है. साथ हीं साथ इस क्षेत्र में अलगाववादी तत्व भी सक्रीय हो गये हैं. बांग्लादेश की सीमा का भी होना एक वजह मालूम पड़ता है. पूरे देश में मुस्लिम आबादी बढ़ने की रफ़्तार साल 1951 से 2011 के दौरान चार प्रतिशत तक रही. वहीँ 16 फीसदी तक की वृद्धि दर बिहार के इस सिमांचल क्षेत्रों में आंकी गयी थी. बिहार के किशनगंज जिले में भी मुस्लिम आबादी अधिक है.

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इसलिए महागठबंधन के लिए मुस्लिमों की बढती आबादी एक अवसर की तरह है. लेकिन वहीँ बीजेपी के लिए यह चिंता का विषय बन सकता है. यानी MY कार्ड अर्थात मुस्लिम यादव कार्ड के बल पर RJD इस क्षेत्र में अल्पसंख्यक वोटरों को गोलबंद करने में लगी है. सिमांचल क्षेत्र में 25 फरवरी के इस रैली में तेजस्वी यादव बीजेपी पर जुबानी हमला भी कर सकते हैं. इसलिए जोरोशोरों से इस रैली की तैयारी भी की जा रही है.

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