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सामान्य प्रशासन और नगर विकास विभाग द्वारा बिहार के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त सवा दो लाख से अधिक पदों के लिए प्रस्तावित नयी नियमावली को हरी झंडी दे दी गयी है. कैबिनेट में शिक्षक नियमावली को लाने से पहले इसे बड़ी सफलता मानी जा रही है. वहीँ विभिन्न विभागों की तरफ से पूछे जा रहे सवालों का उत्तर शिक्षा विभाग तैयार कर रहा है. सोमवार को शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समिति ने अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह की अध्यक्षता में इस पर विचार मंथन किया. दरअसल अनुमति से पहले विभागों की तरफ से पूछे जा रहे सवालों के उत्तर तैयार रखना विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती है. विभाग फिलहाल ऐसा चाह रहा है की कैबिनेट से इसी महीने हर हाल में नियमावली को पास करवा लिया जाए.

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वित्त और विधि के साथसाथ कुल तीन विभागों की अनुमति शिक्षक नियमावली पर बाकी रह गयी है. इन विभागों के तरफ से अनुमति हर हाल में इसी हफ्ते में मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. इस विधिवत नियमावली को मंजूरी अगले बार कैबिनेट की बैठक में मिल सकती है. फिर नियुक्तियों के लिए आवेदन परीक्षा का विज्ञापन जारी कर के माँगा जाएगा. इस नियमावली पर कई बार अफसरों द्वारा भी चर्चा की जा रही है. अगले कैबिनेट में शिक्षक नियोजन नियमावली को मंजूरी मिलने की पूरी सम्भावना वाली बात शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर द्वारा भी हाल में हीं की जा चुकी है. विभागों द्वारा जिस तरह से सक्रियता दिखाई जा रही है उसे देख कर भी ऐसा लग रहा है की इस नियमावली को जल्द हीं मंजूरी भी मिल जाए. प्राथमिक और माध्यमिक निदेशकों और अपर मुख्य सचिव के अलावे समिति के सदस्य भी सोमवार को इससे सम्बंधित हुई बैठक में शामिल थे.

आइये अब अपने इस चर्चा में हम जानते हैं शिक्षक नियोजन नियमावली के बारे में. दरअसल शिक्षक नियोजन नियमावली 2020 में बदलाव करने की तैयारी राज्य सरकार के तरफ से की जा रही है. इस बदलाव में शिक्षकों के नियोजन की प्रक्रिया और नियोजन इकाई को केन्द्रीयकृत किया जाना है. पंचायती राज संस्थाओं को इससे उनकी भूमिका से या तो सीमित कर दिया जायेगा या फिर इससे अलग कर दिया जाएगा और फिर उस संसोधित नियमावली को जल्द हीं कैबिनेट में पेश कर दिया जायेगा. मीडिया में चल रही रिपोर्ट्स के अनुसार सभी अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन केन्द्रीयकृत नियोजन सिस्टम के जरिये हीं करने होंगे. वे विभिन्न नियोजन इकाइयों के लिए भी वरीयताक्रम में आवेदन कर सकेंगे. आवेदन लेने के साथसाथ और भी कई प्रक्रिया को केन्द्रीयकृत किया जाना है, जिसमे इंटरव्यू या परीक्षा, काउंसिलिंग और मेरिट लिस्ट जारी करने तक की प्रक्रिया भी शामिल है. बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग यानी BPSC को इसकी जिम्मेदारी दी जा सकती है. कई शिक्षक संगठनों ने शिक्षक नियोजन को पारदर्शी बनाने के लिए पिछले दिनों शिक्षा विभाग के साथ बैठक में पंचायती राज संस्थाओं को इससे मुक्त करने का सुझाव दिया था.

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शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर द्वारा विभागीय अफसरों से बातचित के दौरान ये भी बात सामने आई थी की नियमावली में संसोधन सातवें चरण से पहले हर हाल में जरुरी है. ऐसा करने से अच्छे शिक्षकों का चयन भी किया जा सकेगा.

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