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जिसके नाम है भारत के लिए वनडे में पहला चौका लगाने का रिकॉर्ड

भारत के लिए वनडे क्रिकेट में पहला चौका लगाने वाला खिलाड़ी

अपने टेस्ट डेब्यू पर ठोका अर्द्धशतक, फिर भी मिला सिर्फ 3 टेस्ट खेलने का मौका

जिसने अपनी कप्तानी में मुंबई को जितवाया रणजी ट्रॉफी

जहीर खान के करियर को संवारा, पिच क्यूरेटर के रूप में भी किया काम

जिसकी बनाई पिच पर हुआ वर्ल्ड कप फाइनल और भारत बना चैंपियन

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दोस्तों, इंसान की जिंदगी का कोई भरोसा नहीं होता, कब किसका टाइम आ जाए, कोई नहीं जानता. इसलिए हर दिन ऐसा जीना चाहिए जैसे आखिरी दिन हो. ऐसे लोग ही सही मायने में जिंदगी जीते हैं. एक महान दार्शनिक ने बड़ी ही अनोखी बात कही है. वो कहते हैं कि भूतकाल और भविष्य होता ही नहीं है होता है तो बस वर्तमान. भूतकाल हमारी स्मृति है और भविष्य हमारी कामनाएं इसलिए जो है वर्तमान है. जो मनुष्य यह बात जान लेता है, फिर जिंदगी खुलकर जीता है और बेहतर ढंग से जीता है.

भारतीय क्रिकेट का इतिहास बेहद सुनहरा है. इसमें एक से बढ़कर एक खिलाड़ी हुए, जिन्होंने अपने खेल से ना सिर्फ लोगों के दिलों में घर किया है बल्कि रिकॉर्ड बुक में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में भी दर्ज करवाया है. आज बात करेंगे एक ऐसे ही खिलाड़ी के बारे में. इस खिलाड़ी के नाम भारत के लिए वनडे में पहला चौका लगाने का भी रिकॉर्ड है. भारतीय क्रिकेट में इनका नाम बेहद सम्मान से लिया जाता है.

दोस्तों, चक दे क्रिकेट की टीम लेकर आई है टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर सुधीर नाइक की अनकही दास्तां. आज के अंक में हम टीम इंडिया के पूर्व ओपनर सुधीर नाइक के जीवन और क्रिकेट करियर से जुड़ी कुछ जानीअनजानी और अनकही बातों को जानने की कोशिश करेंगे.

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दोस्तों, सुधीर सखाराम नाइक का जन्म 21 फरवरी, 1945 को बोम्बे में हुआ था. बचपन से ही क्रिकेट में दिलचस्पी रखने वाले नाइक पढ़ाईलिखाई में भी काफी अच्छे थे. सुधीर नाइक ने सही मायने में अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत बोम्बे यूनिवर्सिटी की तरफ से खेलते हुए शुरू किया था. बाद में उन्होंने टाटा ऑइल मिल्स टीम की कप्तानी भी की, जहां वो काम करते थे. सुधीर एक क्रिकेटर और एक आर्गेनिक केमिस्ट का बेहतरीन मिश्रण थे. उन्होंने बोम्बे के रूपरेल कॉलेज से आर्गेनिक केमिस्ट्री में एमएससी कर रखी थी. यही वजह थी कि उनको टाटा आयल मिल्स में नौकरी मिली थी लेकिन क्रिकेट में दिलचस्पी और बेहतरीन प्रदर्शन के चलते उनको टीम का कप्तान भी बनाया गया था. नाइक के लाजवाब प्रदर्शन की गूंज धीरेधीरे बोम्बे घरेलु क्रिकेट के गलियारों में गूंजने लगी थी. और वो चयनकर्ताओं की रडार में आ गए थे.

1966/67 सत्र में सुधीर को बोम्बे की रणजी टीम से डेब्यू करने का मौका मिला. लेकिन रणजी खेलना और भारत की अंतराष्ट्रीय टीम से खेलना दोनों में बहुत फर्क था. लेकिन नाइक ने हार नहीं मानी. वो सीजन दर सीजन बेहतर होते जा रहे थे. 1973-74 सीजन सुधीर नाइक के लिए ड्रीम सीजन साबित हुआ, जहां उन्होंने पूरे सीजन में 40.10 की औसत से 730 रन बना डाले थे और बरोडा के विरुद्ध नाबाद 200 रन उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर रहा था. बरोडा के खिलाफ इस शानदार पारी ने सुधीर नाइक को पहचान दिलाई थी. लेकिन उनके करियर में टर्निंग पॉइंट आ गया था 3 साल पहले 1970-71 रणजी सीजन में ही. इस सीजन सुधीर नाइक को बोम्बे का कप्तान बनाया गया था और उनकी कप्तानी में बोम्बे ने करिश्माई तरीके से ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया था. उस वक्त बोम्बे की टीम बुरी तरह से चरमराई टीम थी क्योंकि टीम के लगभग सभी स्टार खिलाड़ी वेस्टइंडीज में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. लेकिन नाईक ने सीमित संसाधनों का कुशल उपयोग करके खुद को एक चतुर कप्तान साबित कर दिया.

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1973-74 रणजी सीजन में जबरदस्त बल्लेबाजी का इनाम उनको मिला. 1974 में भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर जा रही थी. दाएं हाथ के बेखौफ बल्लेबाज सुधीर नाइक को बतौर ओपनर दौरे पर शामिल किया गया था. 1974 में सुधीर को बर्मिंघम टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू करने का मौका मिला और उन्होंने अर्द्धशतक भी जड़ा. इस टेस्ट की दूसरी पारी में भी उन्होंने 77 रन बनाए थे. हालांकि भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा था. 3 मैचों की टेस्ट सीरीज का यह चौथा टेस्ट मैच था, यानी 3 टेस्ट मैचों में सुधीर को सिर्फ 1 मैच में ही प्लेइंग-11 में शामिल किया गया था. लेकिन इसके बाद 2 मैचों की वनडे सीरीज में सुधीर नाइक भारतीय टीम में जगह बनाने में कामयाब रहे थे. 13 जुलाई, 1974 को लीड्स में इंग्लैंड के खिलाफ सुधीर नाइक ने अपना वनडे अंतराष्ट्रीय डेब्यू किया था. अपने पहले वनडे अंतराष्ट्रीय मुकाबले में सुधीर 18 रन बनाकर आउट हो गए थे. दूसरे वनडे में भी वो कुछ खास कमाल नहीं कर पाए और सिर्फ 20 रन बनाकर अपना विकेट गंवा बैठे थे. करियर का दूसरा वनडे ही उनके करियर का आखिरी वनडे मैच साबित हुआ, फिर इसके बाद उनको एक भी वनडे में नहीं खिलाया गया. वो टीम से ड्राप कर दिए गए.

इसी दौरे पर उनके इज्जत पर भी एक दाग लगा था. ये वो दौर था जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI काफी कमजोर हुआ करता था और उस दौरान सुधीर नाइक पर लंदन डिपार्टमेंटल स्टोर से दो जोड़ी मौजे चुराने का गलत आरोप लगा था. वो इसका बचाव नहीं कर सके थे. महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने अपनी किताब सनी डेजमें लिखा भी कि नाइक को मजिस्ट्रेट के सामने माफी नहीं मांगनी चाहिए थी और अच्छे वकील के साथ लड़ना चाहिए था. नाइक पर गलत आरोप लगाकर उनकी इज्जत पर दाग लगाया गया था.

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सुधीर नाइक ने इस सदमे से दमदार वापसी करते हुए अर्द्धशतक जमाया था लेकिन भारतीय क्रिकेट में षडयंत्र का शिकार हुए नाइक का अंतराष्ट्रीय करियर 1974 से आगे नहीं बढ़ सका.

1974 में वेस्टइंडीज की टीम भारत दौरे पर आई थी. यहां दो टेस्ट मैचों में खेलने के बाद वो पूरी तरह से साइडलाइन हो गए. 27 दिसंबर, 1974 को वेस्टइंडीज के खिलाफ नाइक ने अपने करियर का अंतिम अंतराष्ट्रीय टेस्ट मुकाबला खेला था.

सुधीर का अंतराष्ट्रीय करियर बेहद छोटा रहा. 3 टेस्ट मैचों में उन्होंने 141 रन बनाए जबकि 2 वनडे में उन्होंने 38 रन बनाए.

हालांकि उनका फर्स्ट क्लास करियर शानदार रहा. उन्होंने 85 फर्स्ट क्लास मुकाबलों में 15 बार नॉटआउट रहते हुए 4376 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 7 शतक और 27 अर्द्धशतक बनाए जबकि 1 दोहरा शतक भी जड़ा. नाबाद 200 उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर रहा.

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सुधीर नाईक को भले ही बेहद गिनेचुने मौके मिले थे लेकिन वो खुद को इस खेल से दूर नहीं रख पाए. क्रिकेट करियर के बाद उन्होंने कोचिंग करना शुरू किया. वो कहते हैं ना जिसके खुद के सपने पूरे नहीं होते, वो दूसरों के सपने को साकार करते हैं‘. नाइक ने जहीर खान का करियर संवारा. सुधीर नाइक ही जहीर खान को मुंबई लेकर आए और उन्हें एक्सपोजर दिया था. श्रीरामपुर के रहने वाले जहीर खान इंजीनियरिंग करना चाहते थे लेकिन नाइक को उनकी प्रतिभा पर विश्वास था और बाएं हाथ के तेज गेंदबाज को निखारा. जहीर के अलावा वसीम जाफर, राजेश पवार और पारस महाब्रे भी नाइक के शिष्य रहे.

सुधीर नाइक चयन समिति के चेयरमैन भी रहे और बाद में वानखेड़े स्टेडियम में मुफ्त में क्यूरेटर के रूप में काम भी किया. उन्होंने मुंबई के वानखेड़े क्रिकेट ग्राउंड की बहुप्रशंसित पिच और आउटफील्ड तैयार की, जिस पर 2011 विश्व कप का फाइनल खेला गया था. भारत ने विश्व कप जीता और नाइक के प्रयास स्पष्ट रूप से मनोरंजक दिन के खेल में सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक थे.

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नाइक बीसीसीआई की मैदान और पिच समिति के वेस्ट जोन प्रभारी की हैसियत से वेस्ट जोन के मैदानों और पिचों की तैयारी देख रहे थे. 5 अप्रैल, 2023 को मुंबई के अस्पताल में सुधीर नाईक का निधन हो गया. उनके निधन की पुष्टि मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के सूत्रों ने की. सुधीर 78 वर्ष के थे और अपनी बेटी के साथ रह रहे थे.

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सुधीर नाइक की नियमित स्वास्थ्य जानकारी रखने वाले मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के सूत्र ने कहा कि सुधीर नाइक अपने घर के बाथरूम में गिर गए थे और उनके सिर में चोट लगी थी. इसके बाद उन्हें मुंबई अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वो कोमा में गए और फिर ठीक नहीं हो सके. सुधीर नाइक मुंबई क्रिकेट में काफी सम्मानित व्यक्ति थे.

चक दे क्रिकेट की पूरी टीम टीम इंडिया के पूर्व ओपनर बल्लेबाज सुधीर नाइक को अपनी विनम्र श्रधांजलि अर्पित करती है.

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