Spiritual life: सनातन परंपरा में सप्ताह के प्रत्येक दिन का संबंध किसी न किसी देवी देवता और ग्रह से जुड़ा होता है। उसी कड़ी में गुरुवार का दिन देवगुरु वृहस्पति और भगवान विष्णु को समर्पित होता है। देवगुरु वृहस्पति को धर्म,ज्ञान,संतान, सौभाग्य और सदाचार का प्रतीक माना जाता है।
गुरुवार के दिन शुद्ध, सात्विक और शाकाहारी भोजन की परंपरा होती है। इस दिन शुद्ध और सात्विक दिनचर्या अपनाने से गुरु ग्रह और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कई लोगों की मान्यता है कि गुरुवार के दिन भूंजा का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके पीछे कई तर्क भी गिनाए जाते हैं। आज इस विषय पर हम विस्तारपूर्वक चर्चा करेंगे कि गुरुवार को भूंजा खाना चाहिए अथवा नहीं ? खाना चाहिए तो क्यों और नहीं खाना चाहिए तो क्यों !

मान्यता है कि गुरुवार के दिन भूंजा जैसा रुखा सूखा और तामसिक खाद्य पदार्थों का सेवन गुरु की कृपा में बाधा उत्पन्न कर सकता है। जिस प्रकार से गुरुवार को मांसाहार का सेवन सनातन परंपरा में वर्जित माना जाता है, ठीक वैसे ही गुरुवार को भूंजा का सेवन भी वर्जित है।
भूंजा में चना, पोहा, मक्का, मूंगफली, मुरही जैसे खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। इन्हें तामसिक और शुष्क पदार्थ माना गया है। इनके सेवन से शरीर मंे रुखापन, सुस्ती और असंतुलन पैदा हो सकता है। यह गुरुवार की सात्विक उर्जा के विपरीत होता है। यह तन और मन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
आप कभी भूंजा के दुकान पर गए होंगे तो आपने अक्सर पाया होगा कि भूंजा पहले से तैयार होता है या बासी होता है। इससे उसमें किसी भी प्रकार क पौष्टिकता नहीं होती बल्कि उल्टे वो हानिकारक ही हो जाता है। यही वजह है कि गुरुवार के दिन भूंजा खाने से मना किया जाता है। यह आस्था और विज्ञान दोनों कहता है।

अगर विज्ञान के दृष्टिकोण से देखें तो पाएंगे कि भूंजा में नमक की काफी मात्रा होती है। इससे वॉटर रिटेंशन और ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा होता है।
आप एक बात गांठ बांध लीजिए कि हिंदू धर्म में जो भी मान्यताएं हैं, वो कहीं न कहीं वैज्ञानिक सोच पर आधारित है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें तो माना जाता है कि वृहस्पति को किया गया हर कार्य गुरु ग्रह के प्रभाव में आता है और अगर इस दिन बासी पदार्थों का सेवन किया जाए तो गुरु ग्रह की कृपा रुक जाती है।
एक मान्यता यह भी है कि गुरुवार के दिन जो भी सच्चे मनोभाव से भगवान विष्णु की पूजा आराधना करता है, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। भगवान विष्णु जगत के पालनहार माने जाते हैं। ऐसे में अगर उनके लिए सप्ताह में एक दिन भूंजा और मांसाहार का त्याग कर दिया जाए तो कोई दिक्कत की बात नहीं होने वाली है।
कुल मिलाकर देखें तो गुरुवार के दिन भूंजा नहीं खाना चाहिए। इसके पीछे सिर्फ धार्मिक परंपरा या आस्था ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक शुद्धता और मानसिक संतुलन को बनाए रखने का एक पवित्र प्रयास है जिसका पालन हम सभी को करना चाहिए।
