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भूमिका

आज के इस विडियो में हम आपको बतायेंगे बिहार के एक ऐसे जिले के बारे में जिसने स्वतंत्रता संग्राम में अपनी अहम् भूमिका अदा की. जो भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जन्मभूमि है. अब हम और सस्पेंस ना रखते हुए आपको बता दें की हम बात कर रहें हैं सिवान जिले के बारे में. सिवान जिले का नामकरण शिव मान नाम के एक राजा के नाम पर हुआ था. बाबर के आने से पहले राजा शिव मान के पूर्वज यहाँ शासन करते थे. सिवान जिले का हीं एक अनुमंडल महाराज गंज है. ऐसा कहा जाता है की इस क्षेत्र में महाराजा का किला होने से महाराजगंज का यह नाम पड़ा. इतिहासकार के अनुसार इस जिले को अलीगंज नाम से भी पुकारा जाता था. दरअसल सिवान का नाम अलीगंज यहाँ के एक सामंत अली बक्श के नाम पर पड़ा. बता दें की बिहार के पश्चिमी भाग में यह जिला स्थित है. कभी सारण जिले का एक अनुमंडल सिवान हुआ करता था. अपने वर्त्तमान अस्तित्व में यह जिला साल 1972 में आया.

  • चौहद्दी और क्षेत्रफल

गोपालगंज और सारण जिला बिहार के उत्तर और पूर्व में स्थित है. वहीँ उत्तर प्रदेश के क्रमशः दो जिले देवरिया और बलिया दक्षिण और पश्चिम दिशा में स्थित हैं. बता दें की इस जिले में 2 अनुमंडल और 19 ब्लॉक हैं. लगभग 2219.00 वर्ग किलोमीटर इस जिले का कुल क्षेत्रफल है. वहीँ 33,30,464 की संख्या में 2011 के जनगणना के अनुसार यहाँ की जनसँख्या है.

इतिहास

आइये अब आगे इस चर्चा में हम जानते हैं यहाँ के इतिहास के बारे में. सिवान जिले का हीं एक गाँव भेरबानिया है. यहाँ भगवान विष्णु की सुन्दर प्रतिमा खुदाई के समय मिली थी. भगवान विष्णु के इस प्रतिमा को देख कर ऐसा प्रतीत होता है की यहाँ भगवान विष्णु को मानने वाले भी अधिक थे. लोकजीवन में एक ऐसी कथा भी प्रचलित है की महाभारत के द्रोणाचार्य भी दरौली प्रखंड के दोन गाँव के हीं रहने वाले थे. कई लोगों का तो ये भी कहना है की भगवान् बुद्ध की मृत्यु भी सिवान जिले में हीं हुई थी. कोशल महाजनपद का एक अंग पांचवी सदी ईसापूर्व सिवान की यह भूमि हुआ करती थी. आगे चलकर बनारस के शासकों का आधिपत्य यहाँ आठवीं सदी में हुआ. 13वी सदी में यहाँ मुसलमानों का आगमन शुरू हो गया. एक समय ऐसा भी आया जब 15वी सदी में इस पर अपना आधिपत्य सिकंदर लोदी ने भी जमा लिया. आगे चलकर यह मुग़ल शासन के अधीन आ गया. डच और फिर बाद में अंग्रेज भी 17 वी सदी के अंत तक यहाँ पहुंचे. बक्सर की लड़ाई जब साल 1765 में हुई उसके बाद सिवान बंगाल में सम्मलित हो गया. 1857 में स्वतंत्रता आंदोलन के समय सिवान की भूमिका भी अहम् रही. यह क्षेत्र उस वक्त राष्ट्र हित में लड़ाकू भावना और शारीरिक धीरज के लिए प्रसिद्ध भी रहा था. यहाँ से अधिकत्तर सेना और पुलिस कर्मचारी बाबु कुंवर सिंह के साथ 1857 के विद्रोह का हिस्सा बने थे. श्री ब्रज किशोर प्रसाद जो की बिहार के सिवान जिले के हीं रहने वाले थे. उन्होंने हीं पर्दा प्रथा विरोधी आन्दोलन को शुरू किया था. सिवान में पूरी तरह से 1930 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन को असहयोग आन्दोलन के अगले चरण में लागू किया गया था. 1937 से 1938 के बीच यहाँ किसान आन्दोलन की शुरुआत देश के प्रसिद्ध साहित्यकार पंडित राहुल संक्रित्य्यन ने की थी. स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भी सिवान के जीरादेई गाँव के हीं रहने वाले थे. महात्मा गाँधी और मदन मोहन मालवीय चंपारण यात्रा के दौरान जब सिवान गए थे तब एक रात उन्होंने राजेंद्र प्रसाद के घर पर हीं बिताई थी.

प्रसिद्ध व्यक्ति

आइये अब हम अपने आगे के इस इस चर्चा में सिवान जिले के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व के बारे में जानते हैं. यहाँ के प्रतिष्ठित व्यक्ति में हम सबसे पहले बात करेंगे डॉ. राजेंद्र प्रसाद की. यह भारत के पहले राष्ट्रपति थे. इनका जन्म 3 दिसम्बर 1884 में सिवान के जीरादेई गाँव में हुआ था.

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दूसरे प्रसिद्ध व्यक्तित्व में शामिल है मौलाना मजहरुल हक़ का. मौलाना मजहरुल हक़ एक शिक्षाविद और वकील होने के साथसाथ भारतीय राष्ट्रिय आन्दोलन के एक स्वतंत्रता सेनानी भी थे. वैसे तो इनका जन्म 22 दिसम्बर 1866 में राजधानी पटना के ब्रह्मपुर में हुआ था, पर आगे चलकर वे सिवान जिले में आकर बस गए. इन्होने यहाँ अपने गाँव में एक घर का निर्माण किया जिसका नाम आशियाना रखा. यहाँ उनके घर आशियाना का दौरा पंडित मोतीलाल नेहरु, श्रीमती सरोजनी देवी, पंडित मदन मोहन मालवीय मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद और के. एफ नरीमन जैसे बड़े व्यक्तित्व भी कर चुके हैं.

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अब हम आखिरी में बात करते हैं खुदा बख्श खान की. इनका जन्म 2 अगस्त 1842 में सिवान के उखई में हुआ था. ये राजा आलमगीर के शासन में बहीखाता और राज्य का रिकॉर्ड रखने का काम करते थे.

इनके अलावे यहाँ के प्रसिद्ध व्यक्ति में साहित्यकार पंडित राहुल संक्रित्य्यन, श्री ब्रज किशोर प्रसाद जैसे प्रसिद्ध व्यक्ति भी शामिल हैं जिनकी चर्चा हम पहले भी कर चुके हैं.

कैसे पहुंचे

आइये अब अपने इस चर्चा में हम जानते हैं यहाँ रेल, सड़क और वायु मार्ग के जरिये कैसे पहुंचा जा सकता है.

  • रेल मार्ग

सबसे पहले हम बात करते हैं रेल मार्ग की. बिहार के सबसे व्यस्त जंक्शनो में से एक सिवान जंक्शन भी है. जिसका स्टेशन कोड SV है. यहाँ से कई ट्रेने भारत के प्रमुख नगर और महानगर के लिए भी चलती हैं. जिनमें लखनऊ, दिल्ली, कोलकाता और कानपूर जैसे शहर शामिल हैं. सिवान कचहरी जिसका स्टेशन कोड SVC, अमलोरी सरसर जिसका स्टेशन कोड ALS है, महाराजगंज जिसका स्टेशन कोड MGZ है और मैरवा स्टेशन जिसका स्टेशन कोड MW आदि भी सिवान जंक्शन के अलावे यहाँ मौजूद है. जानकारी के लिए बता दें की यदि आप पटना से सिवान ट्रेन से जाना चाहते हैं तो वहां जाने के लिए ट्रेन पाटलिपुत्रा जंक्शन या हाजीपुर जंक्शन से हीं मिलेगी. जो की पटना जंक्शन से थोड़ी हीं दूरी पर स्थित है. ठीक वैसे हीं सिवान जंक्शन से भी ट्रेन पाटलिपुत्रा जंक्शन तक हीं जाती है.

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  • सड़क मार्ग

यह जिला बिहार के लगभग सभी प्रमुख मार्गों के साथ जुड़ता है. यदि राजधानी पटना से सिवान आने की बात करें तो वाया पटनापरसा सिवान हाईवे है. इस रूट से सिवान की दूरी 131 किलोमीटर है यह दूरी साढ़े तीन घंटे में तय की जा सकती है. इसके अलावे हम पटना से सिवान NH 531 और NH 227 A इ जरिये भी जा सकते हैं. लेकिन इस रूट से सफ़र तय करने में लगभग 4 घंटे तक का समय लग सकता है. राष्ट्रिय राजमार्ग 331 सिवान के क्षेत्र से होकर गुजरती है. जो की छपरा से महम्मदपुर तक होते हुए जाती है. इस जिले से बिहार के किसी भी क्षेत्रों में सड़क मार्ग द्वारा आसानी से जाया जा सकता है.

जानकारी के लिए बता दें की जब भी आप पटना या कहीं से भी सिवान जिले के लिए जा रहें हैं और आपको रास्ते में BR 29 RTO कोड नंबर वाली गाड़ियाँ दिखाई दें तो समझ जाइये की आप सिवान जिले में प्रवेश कर चुके हैं.

  • हवाई मार्ग

इस जिले का अपना कोई हवाई अड्डा नहीं है. लेकिन नजदीकी हवाई अड्डे की बात करें तो यहाँ का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जयप्रकाश नारायण हवाई अड्डा है. यह हवाईअड्डा पटना में स्थित है और पटना से सिवान की दूरी 144 किलोमीटर है. यहाँ आपको सरकारी और निजी बस, निजी गाड़ी या ट्रेन की सुविधा आसानी से मिल जाएगी.

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कृषि , व्यवसाय और अर्थव्यवस्था

आइये अब हम अपने इस चर्चा में आपको यहाँ के कृषि, व्यवसाय और अर्थव्यवस्था के बारे में बताते हैं. इस जिले में कृषि लोगों के आय का मुख्य स्त्रोत है. यहाँ कृषि के अलावे हथकरघे से बने चीजों का भी उत्पादन लोग बड़े पैमाने पर करते हैं. हथकरघे से उत्पादन की गयी वस्तुओं का निर्यात देश के कई हिस्सों में किया जाता है. हथकरघे से निर्मित करने वाली चीजों में साड़ी, सौल, चादरें और तौलिये जैसी कई चीजें शामिल हैं. यहाँ की प्रमुख फसलों में चीनी, गेंहू, मक्का आदि शामिल है. चीनी उत्पादन कारखाने और जिनिंग फैक्ट्री यानी कपास के रेशे से बीजों को अलग करने वाले कारखाने आदि स्थापित हैं. यहाँ चार औद्योगिक इकाइयाँ भी वर्त्तमान में संचालित हो रहीं हैं. इनमे से दो सीमेंट इकाइयाँ हैं. किसी भी देश, राज्य या क्षेत्र के आर्थिक प्रगति के लिए वहां के उच्च साक्षरता दर का होना जरुरी होता है. बिहार का साक्षरता दर 63.8% है और वहीँ सिवान जिले का साक्षरता दर 72% है. इन आंकड़ो को देख कर साफ़ कहा जा सकता है की राज्य के साक्षरता दर के मुकाबले इस जिले का साक्षरता दर अधिक है. इसके अलावे यहाँ कागज आधारित उत्पाद, चमड़े से सम्बंधित उत्पाद और लकड़ी के फर्नीचर का काम भी करते हैं. जो यहाँ के अर्थव्यवस्था में मुख्य रूप से भूमिका अदा करती है. इन सब के अलावे यहाँ के डेयरी उद्योग भी अर्थव्यवस्था में अपनी अहम् भूमिका निभाते हैं. साथ हीं साथ यहाँ की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह से बदलने में सबसे बड़ा योगदान उनलोगों का भी है जो विदेशों में जाकर बसे हैं. विदेशी पैसों की कमाई भी इस जिले के समृधि का एक कारण माना जाता है. एक समय में यहाँ के अर्थव्यवस्था को मनी आर्डर इकॉनमी भी कहा जाता था.

पर्यटन स्थल

आइये अब हम इस जिले के पर्यटन स्थलों के बारे में जानेंगे.

  • जीरादेई

तो सबसे पहले बात करते हैं जीरादेई की. यह भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेद्र प्रसाद का जन्मस्थान है. यह सिवान जिला मुख्यालय से 13 किलोमीटर की दूरी पर हीं स्थित है. यहाँ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद से जुड़ी चीजें देखने को मिल जाएँगी.

  • आशियाना

अब हम बात करेंगे मौलाना मजहरुल हक़ के मूल निवास के रूप में प्रसिद्ध आशियाना के बारे में. जब हम सिवान जिले के प्रसिद्ध व्यक्तित्व की चर्चा कर रहे थे, तभी हमने मौलाना मजहरुल हक़ की चर्चा भी थी. आशियाना के नाम से प्रसिद्ध उनका यह मूल निवास हिन्दूमुस्लिम एकता का प्रतिक है.

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  • आनंद बाग़ मठ और सुन्दर बाग़ मठ

आनंद बाग़ और सुन्दर बाग़ मठ सिवान जिले के सिवन बलॉक में बखरी नाम के एक गाँव में स्थित है. यह दोनों हीं मंदिर स्वामी जगन्नाथ दास और उनके गुरु भगवान दास के समाधी स्थल पर स्थित है. यहाँ अक्सर शुभ कार्य का शुभ अवसर पर भक्तों की भीड़ होती है. देश और राज्य के कई हिस्सों से लोग यहाँ दर्शन के लिए आते हैं.

  • रघुनाथपुर

अब हम बात करते हैं यहाँ के सुप्रसिद्ध मंदिर रघुनाथपुर के बारे में. ऐसी मान्यता है की जब भगवान राम दानव तारका का संहार कर के आ रहे थे तब उन्होंने यही पर आराम किया था. उसके बाद वे जनकपुर धाम की ओर आगे बढे थे. यह मंदिर जिला मुख्यालय से 27 किलोमीटर दक्षिण की दूरी पर स्थित है.

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इसके अलावे दरौली जहाँ मुग़ल काल का अवशेष देखने को मिलता है. यहाँ के दरौली ब्लॉक में भी किले का कुछ अवशेष महाभारत काल के समय का कुछ अवशेष है.

संस्कृति और विरासत

आइये अब अपने इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए हम जानते हैं यहाँ के संस्कृति और विरासत के बारे में. यदि यहाँ के लोक गीत और नृत्य की चर्चा करें तो झिझिया यहाँ का पारंपरिक लोक नृत्य है. यह नृत्य देवता को खुश करने के लिए किया जाता है. यह नृत्य इंद्र देवता को खुश करने के लिए किया जाता है ताकि वर्षा और फसल अच्छी हो. इसके अलावे यहाँ छौ नृत्य और मुखौटा नृत्य भी पारंपरिक रूप से प्रसिद्ध है. इसके अलावे यहाँ कला और शिल्प में हथकरघे से निर्मित वस्तुएं, हस्तनिर्मित चित्रकारी और पारंपरिक रूप से घरों के दीवालों पर बनाई गयी पेंटिंग भी देखने को मिलती है.

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