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बिहार में मुख्यमंत्री के जनता दरबार में लगभग 70 फीसदी मामले राजस्व और भूमि सुधार से हीं आ रहे हैं. वहीँ राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के कार्यालय में भी प्रतिदिन सैकड़े के हिसाब से मामले सामने आते रहते हैं. फ़िलहाल इस रवैये को देखते हुए राजस्व एवं भूमि विभाग के मंत्री आलोक मेहता ने नाराजगी जताई है. नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा है की म्युटेशन और परिमार्जन इत्यादि विभाग के जितने भी कार्य है उनके आवेदन के निस्तारण में जानबूझ कर की गयी देरी को अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा.

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आपको बता दें की राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ने सभी जिलों के डीएम और एसडीएम से राजस्व कर्मी के पदाधिकारियों की रिपोर्ट मांगी है. इसके साथ हीं उन्होंने कहा है की आवेदनों का न्याय के साथ निस्तारण नहीं करने वाले राजस्व कर्मी पदाधिकारियों को दंडित किया जायेगा. साथ हीं साथ यदि वे ऐसे मामले में आंशिक रूप से भी संलिप्त पाए जाते हैं तो उन पर भी कार्यवाई तय होगी. वहीँ समय को ध्यान में रख कर और न्यायपूर्ण तरीके से काम करने वाले 50 अधिकारीयों को पुरस्कृत भी किया जाएगा. आपको बताते चलें की राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री आलोक मेहता ने पत्रकारों से बात चित के दौरान कहा की दो से तीन महीने में लंबित मामले को निस्तारण करने का ये मतलब नहीं की अधिकारीयों द्वारा आवेदन को ख़ारिज कर दिया जाये. यदि अधिकारी आवेदन ख़ारिज करते हैं तो अधिकारीयों को आवेदन ख़ारिज करने की वजह देनी होगी. यदि वे वजह देने में सक्षम नहीं हो पाए तब उनपर कार्यवायी की जाएगी.

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आपको बता दें की इस मामले में अब तक 9 सीओ को निलंबित किया जा चूका है और 12 अधिकारीयों के खिलाफ अभी कार्यवायी चल रही है. इसके साथ हीं राजस्व मंत्री द्वारा ये भी कहा गया की जनता को परेशान करने पर किसी को भी बक्शा नही जाएगा. मिली जानकारी के अनुसार शिकायतें ये भी मिली है की राजस्व अधिकारी लोगो से ठीक तरीके से पेश नहीं आते. इसके साथ हीं लंबित मामलों को निस्तारित करना हीं अधिकारियों की पहली प्राथमिकता होगी.

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जमीनी दस्तावेजों का डिजिटलीकरण होगा, जिससे जमीनी विवाद के मामलों में काफी कमी आएगी. रसीद काटने जैसी अन्य गतिविधियों को भी ऑनलाइन कर दिया गया है. आपको बता दें की दाखिल और ख़ारिज समेत अन्य दूसरे कामों में शिकायत को कम करने के लिए न्याय दिलाने पर भी जोर दिया जाएगा. रैयत मापी के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दे दी गयी है. अब आवेदन के लिए अंचल कार्यालय नहीं दौड़ना पड़ेगा. अब घर बैठे हीं जमीन का नक्शा डाक के जरिये घर पहुचाया जाएगा. इसके अलावा जमीन के नक़्शे की प्राप्ति ऑनलाइन भी हो सकती है. साथ हीं साथ प्रशिक्षण पूरा किये जाने वाले अधिकारियों को भी पंचायतों में तैनात किया जाएगा. लगभग 80 फीसदी पंचायत में कर्मचारी नियुक्त हो जाने के बाद इन मामलों के नियम में कुछ जरुरी बदलाव किये जायेंगे. साथ हीं साथ इस बात को भी सुनिश्चित किया जाएगा की राजस्व कोर्ट पूरे विधि और नियम के साथ समय की बाध्यता को ध्यान में रखते हुए अपना फैसला दे. राजस्व कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए विशेषरूप से ध्यान दिया जा रहा है. आज के लेख में इतना हीं उम्मीद करते हैं की आपको आज

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