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इन दिनों एक मिम्स काफी चर्चा में है… देख रहे हो न विनोद… यह विनोद का जो किरदार है वह पंचायत वेब सिरिज-2 से निकलर आज हमारे आपके आसपास घूम रहा है. लोग विनोद का नाम लेकर एक दूसरे के ऊपर आरोप लगा रहे हैं. जैसा कि उस वेब सिरिज भी विनोद के बहाने सचिव जी पर आरोप लगाया गया था. इस पूरे वेब सीरीज को देखेंगे तो समाज में लंबे समय से चली आ रही परिपाटी पर एक चोट है. इस सीरीज के हर किरदार अपने आप में अलग है. इन सभी किरदारों में विनोद की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है. इसी वेब सीरीज में विनोद के घर में लगेन वाले टॉयलेट विकास से टूट जाता है जिसका सपना वह लंबे समय से देख रहा था. इस सीरीज में विनोद को जिस तरह से दिखाया गया है उनका शुरुआती दिन भी इसी तरह की गरीबी के साथ गुजरा है. विनोद ने उन दिनों को भी देखा है कि कैसे दिनभर में 100 रुपये कमाने के बाद उस पैसे से घर भी चलाना है और उसी में से कुछ पैसे बचा कर भी रखना भी है ताकि भविष्य में कुछ जरूरत हो तो उसमें खर्च हो सके.

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विनोद के घर का नाम अशोक पाठक है. घर के लोग उन्हें अशोक के नाम से बुलाते हैं. अशोक का परिवार बिहार के सिवान जिले का रहने वाला है. गरीबी और आर्थिक तंगी की वजह से पूरा परिवार बिहार से पलायन कर गया और वे हरियाणा के फरीदाबाद चले गए. किसी तरह से विनोद के पिताजी जी घऱ परिवार को चला रहे थे. एक तरह से कहें कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी. हरियाणा में ही अशोक बचपन से बड़े हो रहे थे. वहां स्कूल में पढ़ने जाते थे. लेकिन उनको पढ़ाई में मन नहीं लगता था. उन्होंने यह भी बताया है कि उनकी गलत लड़कों के साथ दोस्ती भी हो गई थी जिसके बाद उनको कई बार डांट भी सुननी पड़ी. लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब अशोक को यह लगने लगा कि परिवार को हमारी जरूरत है तो उन्होंने अपने चाचा के साथ रुई बेचने का काम शुरू कर दिया. अशोक ने बताया है कि वे तपती धूप में अपने चाचा के साथ रुई बेचने के लिए जाते थे और दिन भर में करीब 100 से 150 रुपये की कमाई हो जाती थी. काम के साथ अशोक ने पढ़ाई को भी जारी रखा और 12 वीं तक की पढ़ाई उन्होंने किसी तरह से पास कर लिया. इस समय तक परिवार की भी स्थिति कुछ कुछ ठीक हो गई थी. पिता जी को जिंदल कंपनी में नौकरी मिल गई थी. इधर अशोक को दोस्तों ने बताया कि जीवन में आगे कुछ करना है तो ग्रेजुएशन करना बहुत जरूरी है फिर क्या था ग्रेजुएशन में एडमिशन ले लिया. और यहीं से शुरू होती है अशोक से विनोद बनने की पूरी कहानी. कॉलेज में आने के बाद अशोक को नॉलेज मिलने लगा. अशोक को स्कूल का सिलेबस नहीं उसे कहानीयां पढ़नी अच्छी लगती थी. उस समय कॉलेज में कल्चरल इवेंट की शुरुआत होने वाली थी. तो दोस्तों ने बताया कि चलो नाटक करते हैं. फिर उन्हें नाटक में रोल मिल गया और वे अपनी युनिवर्सिटी यानी की कुरुक्षेत्र युनिवर्सिटी में उन्हें कई अवॉर्ड से नवाजा गया. वे पूरी तीन साल तक अपनी युनिवर्सिटी के बेताज बादशाह की तरह रहे. अब अशोक को लगने लगा था कि अभिनय की दुनिया में आगे बढ़ना है तो उन्होंने NSD की तरफ जाने का रुख किया लेकिन वहां दो प्रयास में भी सफलता नहीं मिली तब उन्हें गुरुजनों और दोस्तों का साथ मिला उन्हें बताया गया कि वे भारतेंदु अकैडमी में अपना दाखिला करवा सकते हैं यहां आपको पढ़ने के लिए फेलॉशिप भी मिल जाएगा. यहां से पढ़ाई के बाद विनोद ने मुंबई का रुख किया, तब उनके पास पैकेट मे खर्च करने के लिए 40 हजार रुपये थे जोकि उन्होंने हिसार में नाटक कर कमाया था.

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अशोक जब मुंबई पहुंचे तो वहां उन्हें विज्ञापन में काम मिलने लगा था. उन्होंने अपने एक इंटरव्यु में बताया कि वे एक महिने के अंदर ही लाख पति हो गए थे. उन्होंने बताया कि हमारे परिवार ने एक साथ इतना पैसा नहीं देखा था. वो मेरे पास था. उन्होंने कहा कि अगर आप ईमानदारी से किसी भी काम को करते हैं तो आपको सफलता जरूर मिलेगी. क्योंकि हमको मुंबई आने के बाद पैसे के लिए बहुत भाग दौड़ नहीं करना पड़ा. जहां जहां ऑडिशन दिया हमको वह रोल मिला ही लेकिन अभी भी फिल्म का इंतजार था और फिल्मी कैरियर की पहली मुवी मिली बिट्टू बॉस के रूप में. इसके बाद वेबसारीज की शुरुआत हुई तो सबसे पहला वेबसीरीज आर्या 2 में इनको काम मिल गया. लेकिन अभी भी अशोक को बॉलीवुड में एक पहचान की जरूरत थी. अशोक ने अपने इंटरव्यु में बताया कि उन्हें इस समय तक सिर्फ ड्राइवर और माली का रोल मिल रहा था उन्हें उम्मीद थी कि फिल्मों में मेन रोल मिल सके. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. बाद में अशोक के पास पंचायत के लिए रोल मिला. जिसने अशोक को विनोद बना दिया और आज हर कोई किसी को तंज कसता है तो इस बात का जिक्र जरूर करता है कि देख रहे हो न विनोद. अब विनोद किसी पहचान का मोहताज नहीं है.

अशोक ने अपने बुरे दिनों को याद करते हुए कहा कि जब हम मुंबई में थे तो बॉलीवुड में काम नहीं मिल रहा था तो पंजाब इंडस्ट्री ने मुझे काम दिया. और उनकी ही बदौलत मेरे घर का किचन चलता रहा था. आज बिहार का लाल अपनी अभिनय के बदौलत लोहा मनवा रहा है.

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