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बिहार में जारी सियासी घमासान के बीच में कब राजनीति किस करवट बदल जाए कोई कुछ नहीं कह सकता है. ऐसे में देश की राजनीति के साथ ही बिहार की राजनीति में भी एक बड़ा बदलाव सामने आने वाला है. बता दें कि देश में इन दिनों लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर राजनीतिक पार्टियों की तरफ से तैयारियां शूरू हो गई है. ऐसे में गैर बीजेपी राजनीतिक पार्टियों की तरफ से बयान आने शुरू हो गई है. इधर तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर एक बार फिर से मीडिया की सुर्खियों में हैं. बता दें कि 17 फरवरी को तेलंगाना के नए सचिवालय का उद्घाटन होना है और इस मौके पर देश की कई रीजनल पार्टियों का जुटान भी होगा. जिसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बुलाया गया है. लेकिन सीएम नीतीश कुमार ने काम का हवाला देते हुए जाने से मना कर दिया है.

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जब नीतीश कुमार इस सभा में जाने से मना कर दिए तो उन्होने कहा कि आप पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह को भेजे इसबात पर सहमती बन गई तो अब बिहार से जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव केसीआर के इस सभा में पहुंचेंगे. ऐसे में यह कहा जा रहा है कि केसीआर के द्वारा बुलाई जा रही यह सभा आने वाले समय में थर्ड फ्रंट का हिस्सा बो सकती है. और नीतीश कुमार इसके सुत्रधार बन सकते हैं. इस पूरे मामले पर दिए अपने बयान में नीतीश कुमार ने साफ साफ कहा है कि उनकी कोशिश है कि बीजेपी के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा बने. हालांकि केसीआर अपने इस मोर्चे में कांग्रेस को शामिल करना नहीं चाहते हैं. लेकिन नीतीश कुमार कई बार यह बयान दे चुके हैं कि बिना कांग्रेस के एक मजबूत विपक्ष नहीं हो सकता है. ऐसे में यह कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में अगर एक मजबूत विपक्ष बनता है तो उसमें नीतीश कुमार की अहम भूमिका होगी. ऐसे में आपके दिमाग में यह भी चल रहा होगा कि तब नीतीश कुमार भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होंगे या नहीं. ऐसे में नीतीश कुमार ने कहा कि वे इन दिनों सामाधान यात्रा में व्यस्त हैं और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उसी दिन नालालैंड में चुनावी सभा को संबोधित करने के लिए जा रहे हैं. ऐसे मे नीतीश कुमार ने कांग्रेस को न कह कर और केसीआर की सभा में ललन सिंह को भेजकर यह साफ कर दिया है कि वे आने वाले समय में केंद्र की राजनीति के केंद्र में रहना चाहते हैं. वे थर्ड फ्रंट नहीं मेन फ्रंट की बात कहते हैं ऐसे में अब देखना है कि नीतीशकुमार की यह नई चाल मेन फ्रंट को बनाने में कितना कारगर साबित होता है.

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2024 की लड़ाई को लेकर हर कोई अपने अपने स्तर से लड़ाई में जुटा हुआ है. ऐसे में बिहार में लेफ्ट भी अपनी ताकत का प्रदर्शन करने जा रहा है. बता दें कि बिहार में लेफ्ट के 12 विधायक हैं. ऐसे में लेफ्ट ने नीतीश और तेजस्वी को बाहर से समर्थन देकर यहदिखा दिया है कि वे बीजेपी के विरोध में अपने स्वर को बुलंद करेंगे. साथ ही बिहार सरकार में शामिल नहीं होकर यह स्पष्ट कर दिया कि वे सदन में गरीबों की आवाज को बुलंद करते रहेंगे. हमने शीतकालीन सत्र के दौरान देखा है कि किस तरह से माले के विधायक नीतीश और तेजस्वी के विरोध में नारेबाजी करते रहे हैं. ऐसे में अब माले 15 से 20 फरवरी के बीच में राष्ट्रीय महाधिवेशन का आयोजन किया जा रहा है. इसमें 18 फरवरी को लेफ्ट के सभी धड़ों के नेता एक साथ जुटने वाले हैं. जिसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी नेताओं को आमंत्रित किया गया है. जिसमें नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव ने आने पर हामी भर दी है और कहा जा रहा है कि मल्लिकार्जुन खड़के से इस महाधिवेशन को लेकर बात चल रही है.

बतादें कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष एक मजबूत गठबंधन चाह रहा है जिससे की बीजेपी को सीधी टक्कर दी जा सके. ऐसे में टुकड़ों में बटे विपक्ष को एक साथ करने की मुहीम चल रही है. जिसमें केसीआर कांग्रेस और माले विखरे नेताओं को एक माले में पिरोने का प्रयास कर रहे हैं ऐसे में अब देखना है कि विखरा हुआ विपक्ष कब एक माला बन पता है. और नीतीश कुमार किस हदतक थर्ड फंड को मेन फ्रंट में बदल पाते हैं.

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