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बिहार समेत पूरे देश में लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारी शुरू हो गई है. कई राज्यों में विधानसभा का चुनाव भी चल रहा है. लेकिन बिहार में लोकसभा का चुनाव अपने खुमार पर पहुंचने वाला है. हर तरफ चुनाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है. बिहार में सियासत गरमाने का एक कारण यह भी है कि इस बार विपक्ष को एकजुट करने की जिम्मेदारी नीतीश कुमार ने उठाई है जिसके बाद से लोकसभा चुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है. हर छोटी बड़ी खबरों को बिहार के साथ जोड़कर देखा जा रहा है. साथ ही साथ नीतीश कुमार के साथ भी जोड़कर देखा जा रहा है. राजद और जदयू के कुछ नेता तो नीतीश कुमार को पीएम उम्मीदवार के रूप में नीतीश कुमार को मानने भी लगे हैं. हालांकि नीतीश कुमार ने इस बात से अपने आप को खारिज कर दिया है.

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हालांकि नीतीश कुमार को लेकर अब सांसद अपनी सीट छोड़ने के लिए भी तैयार भी हो रहे हैं. आपको बता दें कि साल 2004 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आखिरी बार चुनाव लड़ा था. साल 2004 में नीतीश कुमार वाढ़ और नालंदा दो लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे जिसमें उन्हें बाढ़ से हार का सामना करना पड़ा और नालंदा से जीतने में कामयाव रहे थे. बाढ़ से हारने के बाद नीतीश कुमार का काफी झटका लगा था कहते हैं की नीतीश कुमार को बख्तियारपुर से बहुत लगाव रहा है. उनका बचपन और पढ़ाई लिखाई यहीं से हुई है जिसके कारण वे बाढ़ के जुड़े रहना चाहते थे. चुनाव हारने के बाद नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव लड़ने का मन ही नहीं बनाया. और उसके बाद लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे. अब देश की सियासत एक बार फिर से बदल रही है तो नीतीश कुमार के बारे में यह कहा जा रहा है कि क्या वे एक बार फिर से लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं.

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नीतीश कुमार के लोकसभा चुनाव लड़ने को लेकर बोलते हुए जदयू के नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार ने कहा है कि मैं नीतीश कुमार से अनुरोध करूंगा कि नालंदा उनकी पारंपरिक सीट है और मैं उनका प्रतिनिधि हूं. हम चाहते हैं कि वह देश के प्रधानमंत्री बने. जब पत्रकारों ने सांसद कौशलेंद्र कुमार के बयान को लेकर नीतीश कुमार से पुछा तो उन्होंने कहा कि छोड़िए ना आप लोग काहे चिंता करते हैं. ऐसे में अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या नीतीश कुमार के मन में प्रधानमंत्री बनने की इच्छा है. अगर हां तो फिर क्यों नहीं खुले मंच से इस बात को स्वीकार क्यों नहीं कर रहे हैं.

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दरअसल जदयू और राजद ने बड़े जोड़ के साथ नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री उम्मीदवार के लिए मीडिया में बयान दिया था. लेकिन नीतीश कुमार बार बार यही कह रहे हैं कि हम बस विपक्ष को एकजुट करना चाहते हैं. हमारी इच्छा नहीं है कि हम प्रधानमंत्री बने. चुनाव समाप्त होने के बाद जैसी सहमती बन पाएगी उस तरह से विचार किया जाएगा. लेकिन जदयू के सांसद अपनी सीट छोड़ने के लिए तैयार हैं. साल 2022 में एक खबर बहुत तेजी से चली थी जिसमें यह कहा गया था कि नीतीश कुमार उत्तर प्रदेश से लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं. और वह सीट था फूलपुर सीट जिस सीट से कभी जवाल लाल नेहरू चुनाव लड़ा करते थे. इस सीट के जातीय समीकरण इस तरह के हैं कि नीतीश कुमार यहां से चुनाव लड़ सकते हैं लेकिन बाहरी का मसला अगर वहां पर उठता है तो यह नीतीश कुमार के लिए नुकसान देह हो सकता है. खैर नीतीश कुमार क्या करेंगे यह तो भविष्य के गर्त में हैं लेकिन उनके सांसद उनके लिए अपनी सीट छोड़ने को तैयार हैं. अब नीतीश कुमार को डिसाइड करना है कि उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ना है या नहीं.

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