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बिहार में जारी सियासी घमासान के बीच में कई तरह के बयान सामने आ रहे हैं. राजद और जदयू के बीच में खिंच तान जारी है तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी नीतीश कुमार और राजद पर हमला बोल रही है. ऐसे में अब कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर एक प्लेटफॉम तैयार किया जा रहा है. खैर में अब तो बिहार में रैलियों का दौर शुरू होने ही वाला है लेकिन इन सब के बीच में एक बात है जोकि बड़े ही जोर के साथ कहा जा रहा है कि महागठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. इसका मतलब है कि महाठबंधन में अदंर का जो बंधन है वह खुलने लगा है. जदयू और राजद के बीच में लगातार आ रहे बयान इस ओर इशारा कर रहे हैं. बता दें कि जदयू से उपेंद्र कुशवाहा के अलग होने के बाद जदयू के अंदर ही खिंचतान की स्थिति बनती दिख रही है तो वहीं राजद लगातार जदयू पर सत्ता पाने को लेकर दवाब बना रहा है.

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इन सब चीजों के बीच में एक बात है जो बड़े ही जोर से यह कहा जा रहा है कि 25 फरवरी को पूर्णिया में होने वाली रैली में लगे पोस्टर में राहुल गांधी की तस्वीर नहीं लगाई गई है. ऐसे में यह कहा जा रहा है कि कांग्रेस के लोग इससे नाराज हो सकते हैं. हालांकि कांग्रेस के बड़े नेताओं की तस्वीर लगाई गी है लेकिन राहुल गांधी की नहीं. ऐसे में राजनीतिक जानकार कई तरह की बातें कह रहे हैं. जिसमें बिहार महागठबंधन अपने पुराने दिनों को याद कर रहा है. जब पूरे देश में महागठबंधन को एकजुट करने के लिए लालू यादव और नीतीश कुमार दिल्ली गए थे उस दौरान सोनिया गांधी के साथ इन दोनों नेताओं की तस्वीर सामने नहीं आई थी. लेकिन यह कहा गया था कि हम आपके साथ हैं. ऐसे में इन दोनों नेताओं के मन में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को लेकर एक विचार बना है जिसका नतीजा आज हमें देखने को मिल रहा है.

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एक दूसरी स्थिति यह भी है कि कांग्रेस राहुल गांधी को अपना पीएम उम्मीदवार मानती है जबकि नीतीश की पार्टी के कार्यकर्ता और राजद के नेता नीतीश कुमार को पीएम उम्मीदवार के रूप में देख रहे हैं. ऐसे में यह कहा जा रहा है कि एक है पोस्टर पर दो पीएम उम्मीदवारों का चेहरा होगा. खैर नीतीश कुमार तो अपने आप को पीएम उम्मीदवार के रूप में नहीं देख रहे हैं वे लगातार यही कह रहे हैं कि हम मिलजुल कर बात करेंगे और एक मजबूत विपक्ष को अपना चेहरा बनाएँगे. नीतीश कुमार थर्ड फ्रंट की भी बात नहीं करते हैं वे मेन फ्रंट की बात करते हैं जिसमें कहते हैं कि सारा विपक्ष एक साथ होगा. हालांकि सभी नेता एक साथ कैसे होंगे यह तो नीतीश कुमार ही बता पाएंगे.

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बिहार में ही सत्ता हासिल करने के लिए राजद और जदयू के बीच में खिंचतान की स्थिति है. नीतीश कुमार ने भरे मंच से जब यह कह दिया कि बिहार की सियासत का अगला उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव होंगे. हालांकि जब जदयू से कुशवाहा अलग हुए तो उसके बाद जदयू में भुचाल आ गए जदयू के नेता यह कहने लगे कि नीतीश कुमार 2030 तक सीएम उम्मीदवार के रूप में अपनी सेवा दे सकते हैं. हालांकि नीतीश कुमार ने कहा कि हमारी उम्र 74 हो गई है अब हम कितने दिनों तक राजनीति में रहेंगे. ऐसे में बिहार महाठबंधन में बड़ा उठापटक जैसे हालात हैं. ऐसे में अब सबकुछ देखना है 25 फरवरी को पूर्णिया में होने वाली रैली में क्या होता है. कांग्रेस का किस तरह का जवाब आता है. क्योंकि बिहार की सियासत इन दिनों कई अलगअलग हिस्सों में बंटी हुई है. ऐसे में अब देखना है कि क्या बिहार महागठबंधन कांग्रेस से अपने आप को अलग करती या फिर कोई नई चाल का हिस्सा बनती है.

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