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बिहार में जारी सियासी घमासान के बीच में अब अपडेट आने शुरू हो गए हैं. राजद ने सुधाकर सिंह के किलाफ कारण बताओं नोटिस जारी कर दिया है. जिसमे उन्हें 15 दिनों के अंदर जवाब देने का कहा है. हालांकि बिहार में जिस मसले पर विवाद अभी चल रहा है उस मामले में राजद ने किसी तरह का एक्शन नहीं लिया है. बता दें कि रामचरित मानस को लेकर शिक्षा मंत्री के बयान पर जदयू राजद के नेता प्रो. चंद्रशेखर से इस्तीफे की मांग की जा रही है लेकिन उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि सबकुछ ठीक है. हालांकि दोनों ही तरफ से बयानवीर लगातार अपना बयान दे रहे हैं.

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इधर राजद प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दिकी ने सुधारक सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर नीतीश कुमार के खिलाफ टिप्पणी को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की है. साथ ही यह भी कहा है कि 15 दिन के अंदर जवाब की मांग की है. आपको बता दें कि पिछले दिनों सुधाकर सिंह ने नीतीश कुमार को शिखंडी तक कह दिया था. जिसके जदयू ने कार्रवाई की मांग की थी. जिसका असर अब दिख रहा है. हालांकि उस समय उन्हें मंत्री पद से बाहर किया गया था. अब जब बिहार के शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर ने रामचरित मानस को लेकर बयान दिया है तो ऐसे में इनके खिलाफ पार्टी के नेताओं का सॉफ्ट कॉर्नर क्यों हैं. खास कर नीतीश कुमार जोकि सुधाकर सिंह के मसले पर ज्यादा एग्रेसीव दिख रहे थे इस समय क्यों पिछे हटे हुए हैं.

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ऐसे में अब यही कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार के सामने ऐसी क्या मजबूरी हो गई है कि वे चंद्रशेखर को हटाने के लिए अपनी शक्ति का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं. ऐसे में कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार राजद के नाराज होने के डर से नीतीश कुमार इस तरह का फैसला नहीं ले पा रहे हैं. नीतीश कुमार ने इस पूरे मसले पर एक्शन लेने की जिमम्मेदारी राजद पर छोड़ दिया है. वहीं तेजस्वी यादव ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ऐसे बयान देने वाले बीजेपी के एजेंट हैं. दोनों तरफ से जारी बयान के बाद यह कहा जा रहा है कि दोनों तरफ से कोटा पूरा कर लिया गया है. हालांकि अभी भी लोगों के जेहन में यही चल रहा है कि आखिर नीतीश कुमार इस पूरे प्रकरण पर मुखर होकर क्यों नहीं बोल रहे हैं. नीतीश कुमार के पास इतना अधिकार है कि मंत्री का आचरण उन्हें अच्छा नहीं लग रहा है तो वे उस मंत्री को हटा सकते हैं. लेकिन नीतीश कुमार इस बार ऐसा नहीं कर रहे हैं. वह इस बार इसकी जिम्मेदारी राजद के ऊपर छोड़ दिए हैं. इससे पहले सुधाकर सिंह का मसला हो या फिर कार्तिके सिंह का नीतीश कुमार ने खुद इस मसले पर एक्शन लिया था. ऐसे में इस बार नीतीश कुमार को लग रहा है कि वे राजद की वैशाखी पर चल रहे हैं ऐसे में कुर्सी जाने का खतरा मंडरा रहा है.

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हालांकि नीतीश कुमार जिस तरह से अपने नेता और मंत्री को बोलने की आजादी दे रखे हैं उससे यही लगता है कि इस पूरे मामले में नीतीश कुमार राजद को भी डैमेज करने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि लालू यादव ने खुद कई बार यह बात कहा है कि नीतीश कुमार के पेट में दांत है. वह दिखता नहीं है लेकिन काट लेता है. इसीलिए राजद के बड़े नेता भी संभलकर बयान दे रहे हैं. कि नीतीश कुमार कब क्या कर दें कोई नहीं जानते हैं. इससे पहले भी नीतीश कुमार जितनी बार पाला बदले हैं किसी को इस बात का आभास भी नहीं था कि वह कब किस पार्टी से कट लें.

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