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आज इस वीडियो की शुरुआत उर्जावान पक्तियों के साथ करते हैं. यह पंक्ति देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम बोला करते थे मंजिल उन्ही को मिलती है जिनके हौसलों में जान होती है. पंख से कुछ नहीं होता. हौंसलों से ही उड़ान होती है. इन्हीं हौसलों के बदौलत एक ऑटो चालक का बेटा भारतीय टीम का हिस्सा बन गया. उस खिलाड़ी के परिवार के लोगों ने सपनों में भी नहीं सोचा होगा कि हमारा बेटा एक दिन भारतीय टीम का हिस्सा होगा. अपने यहां तो एक कहाबत है कि पढ़ोगे लिखोंगे बनोगे नवाब खेलोगे कुदोगे बनोगे खराब आज इस खिलाड़ी ने यह सिद्ध कर दिया है कि आप अगर खेल कुद की दुनिया में भी बेहतर कर रहे हैं तो आप अपना अपने परिवार का और अपने समाज के साथ ही देश का नाम रौशन कर सकते हैं. बिहार का यह बेटा आज प्रदेश का मान गर्व से ऊंचा कर दिया है. हर तरफ इस खिलाड़ी की चर्चा हो रही है. लंबे समय से बिहार के बेटे को भारतीय टीम में डेब्यू का इंतजार था. वेस्टइंडीज में चल रहे भारत वेस्टइंडीज टेस्ट सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच में डेब्यू करने का मौका मिल गया है. मुकेश कुमार को टेस्ट मैच के प्लेइंग इलेवन में शामिल कर लिया गया है. जैसे ही यह खबर सामने आई की मुकेश कुमार भारतीय टीम के प्लेइंग इलेवन में शामिल हो गया है पूरे बिहार के गाथ ही उनके गांव में खुशी की लहर छा गई है. मां के आंखों से खुशी के आंसु निकल रहे थे. वह छन ही ऐसा था मानों हर कोई भावुक हो जा रहा था. इतने दिनों की कठिन मेहनत के बाद बेटा आज उस मुकाम तक पहुंचा था.

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मुकेश के गांव में हर कोई इसके बारे में बात कर रहा है. मुकेश कुमार के भाई धनचेत ने नेटवर्क 18 से बात करते हुए बताया है कि जब वे चार साल के उम्र से ही क्रिकेट के प्रति लगाव है. इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा थी. शुरुआत में दो गांव के बीच जब मुकाबला होता था तो लोग मुकेश को ले जाते थे. उन्होंने कहा कि गलीमोहल्ले में खेलने वाला लड़का आज अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बन गया है. इधर मुकेश कुमार की मां ने बताया कि हम बहुत खुश बानीमोबाइल पर मैच देखते हैं और जबजब वो दिखता है बहुत खुशी मिलती है. जब वो गेंदबाजी करने आएगा तो और अच्छा लगेगा देखकर. मेरा आशीर्वाद हमेशा उसके साथ है. खुब खेले आगे बढ़े.

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भारत और वेस्टइंडीज के बीच में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में बिहार के मुकेश कुमार को डेब्यू करने का मौका मिला है. पहले टेस्ट मैच में भारतीय टीम के विकेटकीपर बल्लेबाजी ईशान किशन को डेब्यू करने का मौका मिला था तो वही दूसरे टेस्ट मैच में तेज गेंदबाज मुकेश कुमार को डेब्यू करने का मौका मिला है. इस तरह से इस टेस्ट सीरीज में बिहार के खिलाड़ियों का जलवा देखने को मिलने वाला है. मुकेश कुमार इससे पहले घरेलू क्रिकेट के साथ ही आईपीएल खेल चुके हैं. आईपीएल में मुकेश कुमार दिल्ली कैपिटल्स का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. वहीं, मुकेश कुमार घरेलू क्रिकेट में बंगाल का प्रतिनिधित्व करते हैं. मुकेश कुमार इंडिया ए, रेस्ट ऑफ इंडिया, इंडिया और ईस्ट जोन के लिए खेल चुके हैं. इस दौरान इस खिलाड़ी ने अपनी गेंदबाजी से बल्लेबाजों को काफी परेशान किया है और चनयकर्ताओं को काफी प्रभावित किया है. ऐसे में अब कहा जा रहा है कि इंडिया वेस्टइंडीज के बीच में खेले जा रहे मुकाबले में इस खिलाड़ी का वेस्ट देखने को मिले. आईपीएल में इस खिलाड़ी ने 10 मैचों में 7 विकेट अपने नाम दर्ज किया था.

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मुकेश कुमार के लिए भारतीय टीम तक का सफर इतना आसान नहीं रहा है. मुकेश के पिता कोलकाता में टैक्सी चलाते थे. ऐसे में उनके पास इतनी सुविधाएं नहीं थी कि क्रिकेट से जुड़ी सभी सुविधाओं को पार कर सके. ऐसे में कई बार इस तरह की स्थिति हो गई थी कि वे कुपोषण के शिकार हो गए थे. लेकिन उनकी हिम्मत और पूर्व क्रिकेटर राणादेव बोस की मदद से मुकेश को इस मुकाक तक पहुंचाया है. राणादेव बोस ने मुकेश कुमार की रहने की व्यव्स्था की साथ ही सौरभ गांगुली से पैरबी कर उनके इलाज का खर्च और उनके खाने का खर्च बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन की तरफ से करबाई थी. इस दौरान गागुली के साथ ही मनोज तिवारी ने भी उनकी मदद की थी.

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