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बैन होने के बावजूद टीम को दो विश्व कप जीतने वाला खिलाड़ी

15 साल की उम्र में 16 शतक जड़ने वाला जांबाज खिलाड़ी

जब मैच की जानकारी लीक करने के आरोप में बैन हुआ ये खिलाड़ी

वेस्टइंडीज को दो टी 20 विश्व कप दिलाने में इस खिलाड़ी ने निभाया था अहम योगदान

जब घरेलू क्रिकेट खेलने के लिए इस खिलाड़ी ने विश्व कप खेलने से मना किया

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क्रिकेट का एक ऐसा दौर जहां सिर्फ वेस्टइंडीज टीम का दबदबा हुआ करता है। ये टीम चाहे घरेलू धरती पर खेले या विदेशी सरजमीं पर उसकी जीत तय थी। क्योंकि दुनिया के सभी टीमों में जीत की भूख तो थी मगर वेस्ट इंडीज टीम जैसी नहीं । इस टीम को और खास बनाते थे इसके खिलाड़ी। खजूर के पेड़ जैसे ऊंचे लंबे कद के खिलाड़ी जब मैदान पर उतरते तो इन्हे अपने ऊंचे कद का कई बार अधिक फायदा मिलता था। इस टीम का एक बुरा दौर भी आया। जब 1979 के बाद इसकी झोली में एक भी आईसीसी ट्रॉफी ना गिरी। ऐसा नहीं है कि टीम में खराब खिलाड़ी थे या फिर टीम का प्रदर्शन लचर था। हां इतना कहा जा सकता है कि टीम में एकजुटता की कमी कई बार दिखी। 3 दशक बीतने के बाद आखिर इस टीम ने आईसीसी ट्रॉफी पर कब्जा जमा ही लिया । और इस ट्राफी में उस खिलाड़ी का बहुत बड़ा योगदान है जिसे आईसीसी ने उसके गलत बोलिंग एक्शन के चलते बैन कर दिया था वो भी एक बार नहीं दो बार बैन किया गया। ….

आज हम बात करने वाले है वेस्ट इंडीज क्रिकेट के उस महान ऑल राउंडर खिलाड़ी की जिसने ना सिर्फ बल्ले से बल्कि अपनी धारदार गेंदबाजी की बदौलत टीम को कई मैच जिताए साथ ही दो बार विश्व कप भी जिताया। वो कोई और नहीं मार्लोन सैमुअल्स है..

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मार्लोन सैमुअल्स का जन्म 5 फरवरी 1981 को जमैका के किंग्सटन में हुआ था। इनका पूरा नाम मार्लोन नथानिएल सैमुअल्स है सैमुअल्स के पिता का नाम फिलिप सैमुअल और मां का नाम दरफेन सैमुअल्स है मार्लोन सैमुअल्स वेस्ट इंडीज क्रिकेट के पूर्व खिलाड़ी रॉबर्ट सैमुअल्स के छोटे भाई है। रॉबर्ट सैमुअल्स ने वेस्ट इंडीज क्रिकेट की तरह से 6 टेस्ट और 8 वनडे मुकाबले खेले है। सैमुअल्स के परिवार में उनसे बड़े दो भाई और तीन बहनें है। सैमुअल्स के भाई रॉबर्ट जब क्रिकेट की प्रैक्टिस के लिए ग्राउंड जाते तो मार्लोन सैमुअल्स भी उनके साथ जाने की जिद करते। ग्राउंड्स पर रॉबर्ट को देख मार्लोन सैमुअल्स की भी क्रिकेट में दिलचस्पी बढ़ने लगी। रॉबर्ट जब घर आते तो सैमुअल्स उनके क्रिकेट किट से गेंद बैट निकलकर घर से दूर दोस्तो के साथ खेलने चले जाते। एक दिन सैमुअल्स पकड़े गए तो उन्हें खूब डांट पड़ी। सैमुअल्स भी क्रिकेट खेलना चाहते थे तब उनके पिता ने उनका एडमिशन स्कूल में करा दिया। जहां सैमुअल्स को क्रिकेट खेलने का मौका नही मिलता था। इसलिए वो स्कूल से भागकर चोरी छिपे क्रिकेट खेलते थे। सैमुअल्स जब 10 साल के हुए तो उन्होंने क्रिकेट में अपना करियर बनाने का मन बनाया और वो वेस्ट इंडीज के लिए खेलने का सपना देखने लगे। सैमुअल्स को अपनी मेहनत पर भरोसा था। इसलिए उन्होंने स्कूली और क्लब क्रिकेट में खूब मेहनत की। जिसका नतीजा यह हुआ कि सैमुअल्स जब 15 साल के हुए तब तक उन्होंने 16 शतक जड़ दिए थे। उनके इस प्रदर्शन को देखते हुए जमैका क्रिकेट क्लब ने उन्हें टीम में रख लिया और इस प्रकार सैमुअल्स को जमैका की तरफ से फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू करने का मौका मिला। सैमुअल्स घरेलू क्रिकेट में शानदार खेल दिखा रहे थे। अब सैमुअल्स वेस्ट इंडीज की टीम से खेलने के लिए जगह बना रहे थे। लेकिन यह इतना आसान नहीं था। क्योंकि टीम में पहले से कई धुरंधर खिलाड़ी मौजूद थे। इसलिए सैमुअल्स को टीम में जगह बनाने के लिए अतरिक्त मेहनत करनी पड़ी।

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आखिर वो दिन भी आ गया जिसका मार्लोन सैमुअल्स को इंतजार था। अक्टूबर 2000 में आईसीसी नॉक आउट मुकाबले के लिए सैमुअल्स को टीम में जगह मिल गई। और 4 अक्टूबर 2000 को श्रीलंका के खिलाफ मार्लोन सैमुअल्स को अपना पहला अंतरराष्ट्रीय वनडे मैच खेलने का मौका मिल गया। लेकिन सैमुअल्स अपने काबिलियत के अनुरूप प्रदर्शन नही कर सके और डेब्यू मैच में सिर्फ 19 रन ही बना सके। निराशाजनक प्रदर्शन के बावजूद टीम के सेलेक्टरों को सैमुअल्स में काबिलियत नजर आई और उन्होंने सैमुअल्स को टेस्ट टीम में भी चुन लिया। 15 दिसंबर 2000 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सैमुअल्स रंगीन जर्सी के बाद व्हाइट जर्सी में नजर आए। यह उनका पहले टेस्ट था। लेकिन सैमुअल्स ने वनडे डेब्यू की तरह टेस्ट डेब्यू में भी निराश किया। जिसके चलते उन्हें टीम से ड्रॉप होना पड़ा। सैमुअल्स जिसने स्कूली क्रिकेट में 16 शतक जड़े और घरेलू क्रिकेट में विरोधियों के छक्के छुड़ा दिए हों वो खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कमजोर कैसे हो रहा था। सैमुअल्स अपने करियर के शुरुआती दौर में खराब प्रदर्शन की वजह से टीम से अंदर बाहर हो रहे थे। वेस्टइंडीज क्रिकेट को सैमुअल्स से बड़ी उम्मीदें थी। और सैमुअल्स को भी एक बड़ी पारी की जरूरत। साल 2002 वेस्टइंडीज का भारत दौरा जहां सैमुअल्स ने वो कर दिखाया जिसके लिए वो जाने जाते थे। कोलकाता के ईडन गार्डन मैदान पर सैमुअल्स भारतीय गेंदबाजों पर जमकर बरसे।और 102 रनों की पारी खेलकर उन्होंने अपने इरादे साफ कर कर दिए। साथ ही उन्होंने टेस्ट का पहला शतक भी लगा डाला। इतना ही नहीं सैमुअल्स ने भारत के खिलाफ ओडीआई सीरीज के 7 वें वनडे मैच में सिर्फ 77 गेंदों पर 11 चौंको और पांच छक्कों की मदद से 108 रनों की आतिशी पारी खेली। इसके साथ ही सैमुअल्स ने वनडे क्रिकेट का भी पहला शतक जमा दिया। और वेस्ट इंडीज़ टीम ने यह सीरीज अपने नाम की। सही मायनों में ये दौरा सैमुअल्स का ही था।

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साल 2005 में वेस्ट इंडीज़ की टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई जहां सैमुअल्स के घुटने में चोट लग गई और उन्हें बीच दौरे से स्वदेश लौटना पड़ा। कुछ हफ्ते बाद जब सैमुअल्स ने वापसी की तो उन्हे इस बार फॉर्म से जूझना पड़ा। और एक सीरीज के दौरान उन्होंने सिर्फ 141 रन ही बनाए। उनके खराब प्रदर्शन के चलते उन्हें फिर से टीम से बाहर करने पर विचार होने लगा। साल 2006 में पाकिस्तान दौरे पर सैमुअल्स फिर फॉर्म पर लौट आए जहां उन्होंने चौथे वनडे में पाकिस्तान के खिलाफ 100 रनों की विनिंग पारी खेली। ठीक अगले साल 2007 में साउथ अफ्रीका दौरे पर टेस्ट खेलने गई वेस्ट इंडीज़ की टीम में सैमुअल्स को जगह दी गई। जहां उन्होंने पहले टेस्ट की पहली पारी में 94 और दूसरी पारी में 40 रनों की मैच जिताऊ पारी ने सैमुअल्स को हीरो बना दिया था। इसी साल 2007 में होने वाले ओडीआई विश्व कप की टीम में सेलुअल्स को फिर जगह मिली और उन्होंने निराश नही किया। पाकिस्तान के खिलाफ पहले मैच में 63 रन बनाए और यह मैच वेस्ट इंडीज जीत गई। लेकिन आगे के मुकाबलों में सैलुअल्स का बल्ला खामोश रहा। जिसकी वजह से वेस्ट इंडीज को सुपर एट के मुकाबले में इंग्लैंड से हार मिली और वेस्ट इंडीज टूर्नामेंट से बाहर हो गई। यह मैच इसलिए खास बन गया था क्योंकि इसी मैच में सैमुअल्स ने ब्रायन लारा को रन आउट करा दिया था जो उनके करियर का आखिरी वनडे मैच साबित हुआ।

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टेस्ट और वनडे क्रिकेट में ठीक ठाक प्रदर्शन के बाद सैमुअल्स अब आधुनिक युग की क्रिकेट यानी टी20 क्रिकेट में अपनी पहचान बनाना चाहते थे। 27 जून 2007 को इंग्लैंड के खिलाफ सैमुअल्स ने टी 20 क्रिकेट में भी पदार्पण कर लिया। लेकिन सैमुअल्स ने यहां टेस्ट और वनडे डेब्यू की तरह निराश नहीं किया। बल्कि अपने डेब्यू टी 20 मैच में शानदार 51 रनों की पारी खेली और मैच वेस्टइंडीज की झोली में डाल दिया। सबकुछ ठीक ही चल रहा था कि साल 2008 में सैमुअल्स पर उनके गलत बोलिंग एक्शन की वजह से उन्हें बैन कर दिया गया। इतना ही नही इससे पहले साल 2007 में भारत दौरे पर उन पर मैच की जानकारी लीक करने का आरोप भी लगा।

Marlon Samuels batting vs Sri Lanka T20 world cup 2012

यहां से सैमुअल्स को लगने लगा कि उनका करियर अब दम तोड देगा। लेकिन साल 2010 में उन पर से बैन हटा लिया गया। जिसके बाद सैमुअल्स ने घरेलू क्रिकेट की ओर रुख किया और वहां उनका बल्ला जमकर बोला। साल 2011 के विश्व कप में डेवन ब्रावो के चोटिल होने पर सैमुअल्स को टीम में जगह मिली तो सैमुअल्स ने यह कहकर खेलने से मना कर दिया कि अभी वो इतने बड़े टूर्नामेंट में नहीं खेल सकते। इसी साल उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ टी 20 सीरीज से वापसी की। इसके बाद साल 2012 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में सैमुअल्स ने जबरदस्त वापसी की। पूरी सीरीज में उन्होंने 383 रन बनाए। अब बारी थी सैमुअल्स के असली किरदार की। साल 2012 में उन्हे आईसीसी टी 20 विश्व कप खेलने वाली वेस्ट इंडीज टीम में जगह मिली। सैमुअल्स ने बता दिया कि उनका चयन गलत नही हुआ। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में शानदार बल्लेबाजी की। साथ ही फाइनल में 78 रनों की पारी आज भी याद की जाती है। क्योंकि इस पारी वेस्ट इंडीज को टी20 चैंपियन बनाया था। इसी साल 2012 में बांग्लादेश के खिलाफ सैमुअल्स ने टेस्ट क्रिकेट में दोहरा शतक भी जमा दिया। उन्होंने इस टेस्ट मैच में लाजवाब बल्लेबाजी करते हुए 260 रन बना दिए। जो आगे चलकर उनके टेस्ट करियर का उच्चतम स्कोर बना।

West Indies hero in T20 2016 win

साल 2013 में सैमुअल्स विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर भी चुने गए। इस बीच 2014और 2015 में सैमुअल्स का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। लेकिन अगले साल यानी 2016 को सैमुअल्स को फिर से अपने बल्ले को तराशने का मौका मिला। मौका था टी 20 विश्व कप का , और वेस्ट इंडीज़ की टीम फाइनल में पहुंच गई थी। उसके सामने थी इयान मोर्गन की अगुवाई वाली इंग्लैंड की टीम जिसने कई बड़ी टीमों को मात देकर फाइनल में जगह बनाई थी। फाइनल मैच ।e इंग्लैंड की टीम ने पहले 156 रनों का टारगेट रखा फिर गेंदबाजी करते हुए क्रिस गेल सहित 11 रनों पर तीन प्रमुख बल्लेबाजों का विकेट निकालकर दिया। वेस्ट इंडीज टीम पूरी तरह से बैकफुट आ गई थी । एक छोर से विकेट गिरते रहे लेकिन सैमुअल्स अंगद की तरह क्रीज पर डटे रहे। और अंत तक उन्होंने टीम का साथ दिया और शानदार 85 रनों की पारी खेल डाली। बचा कुचा काम कप्तान कार्लोस ब्रेथवेट ने स्टुअर्ट ब्रॉड के अंतिम ओवर में चार गेंदों में चार छक्के लगाकर वेस्ट इंडीज़ को चैंपियन बना दिया। इस जीत के साथ ही कैरेबियाई टीम दो बार टी 20 विश्व कप जीतने वाली पहली टीम बन गई थी। और मार्लोन सैमुअल्स को शानदार पारी के लिए मैन ऑफ द मैच का अवार्ड मिला। अपने क्रिकेट करियर में कई बार प्रतिबंध खेलने के बाद मार्लोन सैमुअल्स ने जिस शानदार प्रदर्शन से वापसी की साथ ही टीम को दो बार विजेता भी बनाया। उस खिलाड़ी ने 20 नवंबर 2020 को क्रिकेट के सभी प्रारूपों से सन्यास ले लिया

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मार्लोन सैमुअल्स ने अपने क्रिकेट करियर में 71 टेस्ट , 204 वनडे और 67 टी 20 मैच खेले है जिसमें उन्होंने कुल 64 अर्द्ध शतक और 17 शतक के साथ लगभग 10 हजार रन बनाए है। साथ ही सैमुअल्स ने सभी फॉर्मेट में लगभग 150 विकेट हासिल किए है।

दोस्तों, मार्लोन सैमुअल्स ने जिस खूबी के साथ टीम को कई उपलब्धियां दिलाई क्या आपको लगता है उनके खेल में अभी पैनापन बाकी था। आप हमें अपनी राय कमेंट करके बता सकते है . 

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