Mahendra singh dhoni: महेंद्र सिंह धोनी, जो क्रिकेट जगत के सबसे बड़े और लोकप्रिय नामों में से एक हैं, इन दिनों आलोचनाओं के घेरे में हैं। हाल ही में चेन्नई सुपर किंग्स के आईपीएल मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ उनके देरी से मैदान पर उतरने पर सवाल उठे हैं। फैंस यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर क्यों धोनी को नौवें नंबर पर बैटिंग के लिए भेजा गया और क्यों उन्होंने खुद से पहले रविचंद्रन अश्विन को भेजा, जो एक गेंदबाज हैं।

क्या अब धोनी में वही करिश्मा नहीं बचा?
यह सही है कि चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान ऋतुराज गायकवाड हैं, लेकिन मैदान पर असली कप्तान धोनी ही होते हैं। धोनी की रणनीतियों और फैसलों पर टीम निर्भर रहती है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अब धोनी में वो करिश्मा नहीं बचा, जो उन्हें महान बनाता था? क्या यह उनका आखिरी आईपीएल सीजन होगा? इन सवालों का उत्तर शायद धोनी खुद अपने आने वाले मैचों में अपने बल्ले से देंगे।

चेन्नई की खराब शुरुआत और धोनी की देरी से एंट्री
इस मैच में, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने चेन्नई सुपर किंग्स को 197 रन का लक्ष्य दिया था। हालांकि, आईपीएल के हिसाब से यह एक साधारण लक्ष्य था, लेकिन चेन्नई की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम के तीन विकेट मात्र 26 रन पर गिर गए थे, और एक समय पर चेन्नई का स्कोर 99 रन पर सात विकेट हो चुका था। ऐसे में जब टीम को 14 रन प्रति ओवर की दर से रन चाहिए थे, धोनीउस वक़्त नहीं उतरे और अश्विन को भेज दिया जो एक बल्लेबाज नहीं है.

धोनी की बॉडी लैंग्वेज और आलोचनाएँ
धोनी के लिए यह कोई कठिन काम नहीं था, क्योंकि वे पहले भी कई बार ऐसे मुश्किल हालातों में टीम को जीत दिला चुके हैं। हालांकि, इस बार उनकी बॉडी लैंग्वेज से ऐसा प्रतीत हुआ कि वे टीम को जिताने के लिए ज्यादा उत्साहित नहीं थे। धोनी ने 16 गेंदों में 30 रन बनाए और नाबाद रहे, जिसमें तीन चौके और दो छक्के शामिल थे। यह रन आए जरूर, लेकिन अगर वे पहले मैदान में आते तो शायद नतीजा कुछ और हो सकता था।

पूर्व क्रिकेटर्स की प्रतिक्रियाएँ
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर रवि शास्त्री ने तो यह तक कह दिया कि अगर धोनी को नौवें नंबर पर बैटिंग के लिए आना था, तो उन्हें आईपीएल नहीं खेलना चाहिए था। वहीं, इरफान पठान जैसे पूर्व क्रिकेटर का मानना था कि धोनी को कभी नौवें नंबर पर बैटिंग नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह टीम के लिए फायदेमंद नहीं है। सोशल मीडिया पर कुछ फैंस ने तो धोनी को ‘ओवररेटेड क्रिकेटर‘ तक करार दे दिया।
धोनी की उम्र और चेन्नई सुपर किंग्स का समर्थन
अब जबकि धोनी 44 साल के हो गए हैं और आईपीएल के सबसे बुजुर्ग खिलाड़ी हैं, उनकी फैन फोलोविंग और उनके पिछले रिकॉर्ड के आधार पर चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें टीम में बनाए रखा है। लेकिन यह भी सच है कि अब उनकी भूमिका में बदलाव आ चुका है। लोग चेन्नई के लिए चियर्स करने नहीं आते बल्कि धोनी की बल्लेबाजी देखने आते हैं की कब उपरी क्रम के बल्लेबाज आउट हो और धोनी बैटिंग करने आये जो की टीम के लिए कहीं से भी सकारात्मक नहीं है. उनकी बल्लेबाजी में पुरानी धार नजर नहीं आ रही है।
चेन्नई सुपर किंग्स के फैंस उम्मीद करते हैं कि धोनी जल्द ही अपने आलोचकों को जवाब देंगे और अपनी पुरानी लय में लौटकर टीम को संकट से उबारेंगे। वे अपनी अद्वितीय बल्लेबाजी शैली और चतुर रणनीतियों से यह साबित करेंगे कि वे आज भी क्रिकेट के मैदान पर एक ताकतवर खिलाड़ी हैं।
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