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बिहार में इन दिनों सियासी पारा ऊपर चढ़ा हुआ है. राजनीतिक पार्टियों की तरफ से लगातार बयान सामने आ रहे हैं. ऐसे में अब लालू यादव सिंगापुर से दिल्ली पहुंच गए हैं. लालू यादव से मुलाकात करने उनके छोटे बेटे और बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव दिल्ली पहुंच गए हैं. पिता से मुलाकात की तस्वीरें तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया में साझा करते हुए लालू यादव के स्वास्थ्य लाभ के बारे में बताया. आपको बता दें कि 5 दिसंबर 2022 को लालू यादव का किडनी ट्रांसप्लांट सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ हॉस्पिटल में हुआ था. लालू यादव के दिल्ली पहुंचने के बाद लालू यादव की बेटी मीसा भारती ने लालू यादव की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा है कि जीवना का सबसे बड़ा सुख है अपनों का साथ. जब अपने पास हों तो हर समस्या छोटी हो जाती है. अपनों को सहेज कर रखें. ये किसी भी खजाने से बहुमूल्य हैं. देश वापसी के बाद पापा अपने अंदाज में.

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ऐसे में अब कहा जा रहा है कि तेजस्वी यादव जब अपने पिता लालू यादव से मुलाकात करने के बाद जब पटना लौटेंगे तो कुछ बड़े फैसले ले सकते हैं. बता दें कि फरवरी महीने में ही बिहार का बजट भी प्रस्तुत होना है. साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि तेजस्वी यादव जब पटना लौटते हैं तो क्या सुधाकर सिंह पर कोई होगी ? साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है. कहा तो यह भी जा रहा है कि लालू यादव ने पहले ही नीतीश कुमार के दवाब में आकर सुधाकर सिंह को मंत्री पद से हटा दिया था. अब जब कैबिनेट विस्तार की बात सामने आई है तो नीतीश कुमार ने यह स्पष्ट करदिया है कि इसका फैसला तेजस्वी यादव लेंगे. राजद में दो मंत्रियों के पद खाली है ऐसे में अब इंतजार हैं कि इन दोनों पदों पर राजद कोटे से किसे मंत्री बनाया जाता है.

एक और सवाल का जवाब जब राजद के कार्यकर्ता जानना चाहेंगे कि तेजस्वी यादव बिहार के मुख्यमंत्री कब बनेंगे. हालांकि नीतीश कुमार ने कह दिया है कि 2025 का चुनाव तेजस्वी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा. लेकिन राजद के नेता और उनके कार्यकर्ता आए दिन यह कहते रहे हैं कि अब तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनना चाहिए. ऐसे में राजद के नेता और उनके कार्यकर्तां में इस बात को लेकर उत्कंठा है कि तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री को लेकर भी कुछ कहेंगे.

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एक सवाल और है जो बार बार पुछा जा रहा है कि क्या लालू यादव के बिहार आने के बाद बिहार की सियासत में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है. इसका जवाब है नहीं क्योंकि तेजस्वी यादव पिछले दिनों जितने भी घटनाक्रम देखने को मिले हैं इन सब में एक डिप्लोमेट की तरह जवाब दिया है. जिससे की सरकार भी बची रहे और पार्टी के नेताओं के बीच में अंतरविरोध की स्थिति उत्पन्न न हो. खासकर रामचरित मानस वाले बयान में तो जदयू राजद के विरोध में थी इसमें तेजस्वी ने कानून को सर्वोपरि मान लिया. ऐसे में अब कहा जा रहा है कि अगर बिहार कि सियासत में कोई बदलाव देखने को मिलता है तो इसमें पहले नीतीश कुमार की तरफ से पहले होगा. राजद इन दिनों डैमेज को मैनेज करके चल रही है.

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