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बॉल बॉय से लेकर टीम इंडिया का सफर तय करने वाला भारत का यह खिलाड़ी

रणजी ट्रॉफी में तिहरा शतक जड़ने वाला पहला विकेट कीपर बल्लेबाज

बाउंड्री पर गेंद पकड़ने वाला बॉल बॉय के एस भरत कैसा बना क्रिकेटर

मैच से पहले मां को गले लगाया फिर रच दिया इतिहास

के एस भरत की विकेट कीपिंग देख धोनी भी दंग रह जाएंगे

जब राहुल द्रविड़ ने के एस भरत के विकेट कीपिंग की तारीफ

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क्रिकेट की दुनिया में कई ऐसे खिलाड़ी अपने देश के लिए खेले हैं जिन्होंने बाउंड्री लाइन पर बॉल बॉय का काम किया है। अपने चहेते खिलाड़ी को लाइव अपनी आंखो से देखना किसे पसंद नहीं आयेगा। जब भी आप क्रिकेट के पन्ने पलटेंगे तो आपको उन खिलाड़ियों की जर्नी नजर आ जायेगी जिन्होंने पहले बॉल बॉय की भूमिका निभाई और फिर एक सपना देखा क्रिकेटर बनने का .. उसी सपने को ना जाने कितने बॉल बॉय ने कड़ी मेहनत और संघर्ष से क्रिकेटर बनने का सपना पूरा किया।

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साल 2005 पाकिस्तान का भारत दौरा , जहां दोनो टीमों में एक से बड़े एक धुरंधर मौजूद थे। 6 वनडे मैचों की सीरीज.. का दूसरा वनडे मैच आंध्रप्रदेश के विशाखापत्तनम में खेला जा रहा था.. तभी मैदान पर भारत की ओर से लंबे बालों वाला एक खिलाड़ी जिसका नाम महेंद्र सिंह धोनी था वो मैदान चौके छक्के लगाकर पाकिस्तान के गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा रहा था। उस मैच में धोनी की 148 रनों की आतिशी पारी से स्टेडियम में बैठे हजारों की तादात में दर्शक ताली बजा रहे थेइस बीच गेंद जितनी बार बाउंड्री लाइन पर जाती , एक 12 साल का लड़का गेंद को उठाकर मैदान में फेंक देता उसके चेहरे पर मुस्कराहट .. आंखो में सज रहा सपना उसे अंदर से मजबूत कर रहा था। धोनी की पारी ने उसे इस कदर प्रभावित किया कि उसने धोनी के जैसे बनने की इच्छा ठान ली.. और कसम खाई एक दिन वह टीम इंडिया के लिए खेलेगा…..

आज हम अपनी सीरीज में लेकर आएं है टीम इंडिया के उस खिलाड़ी के जीवन की अनसुनी कहानी .. जिसे सुनकर आप हार मानना छोड़ देंगे, हम बात करने वाले है हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ डेब्यूटेंट विकेट कीपर बल्लेबाज के एस भरत की…..

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आंध्र प्रदेश के छोटे से गांव रामचंद्रपुरम से ताल्लुक रखने वाले, के एस भरत का जन्म 3 अक्तूबर 1993 को हुआ था। के एस भरत का पूरा नाम कोना श्रीकर भरत है। भरत के परिवार में पिता श्रीनिवास राव एक नेवल डाकिया इंप्लॉय है, माता कोना देवी हाउसवाइफ है। बहन मनोघना देवी और पत्नी अंजलि नेदुनुरी है। जिनसे भरत की शादी साल 2020 में हुई थी। भरत बचपन में बहुत शरारती थे। गली मोहल्ले में क्रिकेट खेलते समय किसी घर का कांच तोड़ देते थे तो कभी चुपके से बॉल लाने के लिए किसी के घर में घुस जाते थे। भरत को क्रिकेट खेलने का बहुत शौक था। सभी दोस्तों में भरत अच्छा खेलते थे। उनके इस खेल को उनके परिवार वालों ने भी खूब सराहा, एक दिन उनके पिता ने सोचा कि क्यों ना भरत को क्रिकेट एकेडमी में डाल दिया जाए। जिससे वह क्रिकेट भी खेल सकेगा और पड़ोसियों को तंग भी नही करेगा। भरत के पिता ने नेवल क्रिकेट एकेडमी में भरत का एडमिशन करा दिया। यह ग्राउंड शहर के दूसरे कोने में था। सुबह स्कूल जाना और शाम को बस स्टॉप पर उतरना जहां उनकी मां क्रिकेट किट लिए भरत का इंतजार करती थी। इसके बाद मां के साथ ग्राउंड पर जाना यह रोज की दिनचर्या बन गई थी। भरत ने ऐसा करीब 7 सालों तक किया। साल 2001 में कोच जनप्पा राव रेड्डी की नजर के एस भरत पर पड़ी। रेड्डी की क्रिकेट क्लब के ट्रायल के लिए ग्राउंड पर आए हुए थे। भरत अपनी 8 साल की उम्र से जनप्पा राव रेड्डी से कोचिंग ले रहे है। भरत अब पूरी तरह से क्रिकेट के रंग में रंग चुके थे। वैसे भरत के लिए क्रिकेट एक बहाना बन गया था स्कूल ना जाने का.. भरत गेम की बेसिक्स को अच्छी तरह सीखने लगे थे। भरत ने एकेडमी लेवल पर खूब रन मारे।

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भरत ने अपने शानदार खेल से सभी को प्रभावित कर दिया। भरत जब10 साल के हुए तो उनका चयन अंडर 13 टीम में हुआ। और यही भरत के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने पीछे पलटकर नहीं देखा। भरत पूरी तरह से जूनियर क्रिकेट में कांसिस्टेंट खिलाड़ी बन चुके थे। सिर्फ बीच में एक साल ऐसा था जहां भरत को अंडर 16 टीम ड्रॉप कर दिया गया था। तब उन्होंने क्रिकेट छोड़ने का मन बना लिया था तभी एक दिन भरत को वो दिन याद आ गया जब महेंद्र सिंह धोनी ने 148 रनों की पारी खेली थी। उस मैच में भरत बॉल बॉय थे उन्होंने धोनी की पारी अच्छी लगी। धोनी से इंस्पायर होकर उन्होंने क्रिकेट को करियर बनाने की ठान ली। अपनी पढ़ाई में अच्छे होने के बाउजूद भरत ने क्रिकेट को नही छोड़ा। भरत जब 12 साल के हुए तो कोच कृष्णा राव ने उनकी क्रिकेट एबिलिटी को देखते हुए भरत से विकेट कीपिंग में हाथ आजमाने को कहा। भरत को बल्लेबाजी के बाद जब भी मौका मिलता वो विकेट कीपिंग में हाथ आजमाते।

17 साल की उम्र में भरत के साथ कुछ ठीक नही हो रहा था। एक मैच में भरत शून्य पर आउट हो गए , भरत काफी निराश थे। वे घर गए और पापा से उनकी बातचीत हुई यह बातचीत आर्गुमेंट में बदल गई। कोच राव जब भरत के मैच देखने नही जा पाते तो राव के छोटे भाई मैच देखने जाते। खेल को देखने के बाद राव के भाई ने भरत के पिता से बात की और कहा उसे गलती करने दीजिए उस पर गुस्सा मत करिए। इसके बाद सब नॉर्मल हो गया। भरत को समझ नहीं आया कि दोनो के बीच क्या बातचीत हुई। सच तो यह है की अगर भरत की लाइफ में कोच राव नहीं होते तो भरत आज क्रिकेट नहीं बल्कि किसी कम्पनी में नौकरी कर रहे होते।

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भरत ने हार नही मानी और कड़ी मेहनत की। अंडर 19 के एक मैच में भरत को विकेट कीपिंग करने का मौका मिला। इसके बाद दो साल बाद 19 साल की उम्र में 12 दिसंबर 2012 को भरत ने केरला के खिलाफ डेब्यू किया। आंध्र प्रदेश की रणजी टीम में एक विकेट कीपर की जरूरत थी तब चयनकर्ताओं को नजर भरत पर पड़ी और टीम में शामिल कर लिया। 20 फरवरी 2012 को भरत का तमिलनाडु के खिलाफ फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया। असल मायनों में भरत के पिता ने भरत की काबिलियत को तब पहचाना जब साल 2015 में गोवा के खिलाफ भरत ने तिहरा शतक जमाया। तब पिता ने भरत से कहा था कि एक दिन तुम्हारे कोच ने कहा था की आपका बेटा दो सालों में रणजी खेलेगा। उस टूर्नामेंट में भरत ने कुल 9 मैचों मे 758 रन बनाए।

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धोनी को अपना आदर्श मानने वाले भरत का यह प्रदर्शन उन्हे आईपीएल के दरवाजे पर लाकर खड़ा कर दिया। साल 2015 में दिल्ली डेयर डेविल्स ने 10 लाख की बेस प्राइस में भरत को खरीद लिया।लेकिन उन्हें एक भी मैच खेलने को नही मिले। इसके बाद उन्होंने इंडिया ब्लू के लिए खेला। और रणजी ट्रॉफी में एक शानदार पारी ने उनके लिए टीम इंडिया के दरवाजे खोल दिए। साल 2019 में बांग्लादेश के खिलाफ पिंक बॉल टेस्ट में उनका टीम इंडिया चयन हो गया। लेकिन रिद्धिमान साहा मुख्य विकेट कीपर थे इसलिए उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला। लेकिन ट्रॉफी जीतने के बाद कोहली ने ट्राफी भरत को ही दी। तब से सेलेक्टर की रडार पर भरत थे। भरत को इंग्लैंड ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड सीरीज के लिए भी चुना गया। लेकिन ऋषभ पंत मुख्य विकेट कीपर की भूमिका में थे।

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कहते हैं कि जो किस्मत में लिखा है वह होकर रहेगा। विधि का विधान आज तक कोई समझ नहीं पाया। ऋषभ पंत की वजह से के एस भरत को विकेट कीपिंग का जिम्मेदारी कई सीरीज में नहीं मिली। आज ऋषभ पंत एक दुर्घटना की वजह से टीम से बाहर है और के एस भरत को खेलने का मौका मिल गया। ऑस्ट्रेलिया का भारत दौरा। मौका था बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी का । 9 फरवरी 2023 दिन गुरुवार के एस भरत के लिए वह सुनहरा पल आया जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में नागपुर के जामथा क्रिकेट स्टेडियम में टेस्ट में टीम इंडिया की रीढ़ कहे जाने वाले बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने के एस भरत को 305 नंबर टेस्ट कैप देकर डेब्यू कराया।

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दोस्तों, के एस भरत ने एक दिन पहले टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया है इस लिहाज से उनके टेस्ट क्रिकेट के आंकड़ों को दूर रखते हुए भरत के डोमेस्टिक क्रिकेट और आईपीएल में रचे गए कीर्तिमानों पर नजर डालते है। 2012 में घरेलू क्रिकेट में शुरुआत करने वाले के एस भरत ने अभी तक कुल 86 फर्स्ट क्लास मैच खेले है जिसमें उन्होंने 38 की औसत से 4707 रन बनाए है। वहीं लिस्ट ए के 64 मैचों मे 1950 रन बनाए है। घरेलू टी 20 के 67 मैचों मे 1116 रन बनाए है। अगर बात आईपीएल की हो तो साल 2015 में दिल्ली डेयर डेविल्स, 2021 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, 2022 में फिर दिल्ली कैपिटल और 2023 में नई नवेली टीम आईपीएल 16 वें सीजन की विजेता गुजरात टायटंस की तरफ से खेलने वाले के एस भरत ने अभी तक कुल 10 मैच खेले है जिसमें 28 की औसत से महज 199 रन बनाए है।

दोस्तों, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम इंडिया के लिए अपना पहला टेस्ट खेलने वाले के एस भरत क्या अपने शानदार इस टीम में नियमित जगह बना पाएंगे ?

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