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चक दे क्रिकेट के आज के सेगमेंट में बात एक ऐसे खिलाड़ी के बारे में जिसके लिए यह कहा जाता है कि 80 के दशक में अगर टी-20 मुकाबला हुआ होता तो यह खिलाड़ी छक्के चौके लगाने में पहले स्थान पर होता. इसके बल्लेबाजी का अंदाज बेखौफ था. यह बल्लेबाज इस बात की चिंता नहीं करता था कि पिच की स्थिति क्या है कौन गेंदबाज गेंदबाजी कर रहा है. बस गेंदबाज की पिटाई करना है तो करना है. इस खिलाड़ी के बारे में यह कहा जाता है कि सुनील गवास्कर के साथ ये सलामी बल्लेबाज के रूप में मैदान में आते थे. एक तरफ गवास्कर धीरेधीरे रन को आगे बढ़ाते थे तो वहीं दूसरी तरफ यह खिलाड़ी गेंद बो बॉउंडरी लाइन के पार पहुंचाने में विश्वास रखता था. इस बल्लेबाज से हमेशा यह उम्मीद की जाती थी कि जब यह मैदान में आए तो रनों की वारिश कर दे. आज हम बात करने जा रहे हैं 80 के दशक के बेखौफ बेपरवाह ,विस्फोटक बल्लेबाज श्रीकांत के बारे में

Kris Srikkanth

कृष्णमाचारी श्रीकांत का जन्म 21 दिसंबर 1959 को चेन्नई के तमिलनाडु में हुआ था. उनकी शुरुआती शिक्षा दिक्षा सेंट बेड्स एंग्लो इंडियन हायर सेकेंडर स्कूल और विद्या सागर प्ले स्कूल और विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में इनकी शुरुआती पढ़ाई लिखाई हुई थी. उसके बाद इन्होंने इंजिनियरिंग की पढ़ाई के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज गिंडी में बी.. इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से पढ़ाई की. पढ़ाई के साथ ही श्रीकांत तमिलनाडु और दक्षिण क्षेत्र के लिए घरलू क्रिकेट खेला. उन्हें साल 1981 में इंग्लैंड के खिलाफ अमहदाबाद में अपना पहला अंतराष्ट्रीय पदार्पण किया. इसके दो ही दिन के बाद इंग्लैंड के खिलाफ बॉम्बे में टेस्ट डेब्यू भी कर लिया था. उन्होंने अपने पहले टेस्ट मैच में सुनील गवास्कर के साथ बल्लेबाजी की शुरुआत की थी. तब श्रीकांत आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे. उनका यह आक्रमक शैली लोगों को खुब पसंद आता था. लेकिन श्रीकांत जैसे जैसे अपने क्रिकेट कैरियर को आगे बढ़ाते गए उनमें स्थिरता दिखने लगी. वे अब कुछ हद तक अपनी आक्रामकता को कम करने लगे थे. जिसके बाद वे भारतीय टीम के मुख्य आधार बन गए हैं. हालांकि श्रीकांत की एक आदत बहुत खराब थी जिसके चलते विपक्षी टीम मैदान में हंस रही थी और साथी खिलाड़ी पवेलियन में गुस्सा रहे थे दरअसल हुआ यह था कि अपने पहले टेस्ट मैच में इंग्लैंड के खिलाफ बल्लेबाजी कर रहे थे. पारी के दौरान गेंद डेड नहीं हुई थी उसके बाद भी वे क्रीज से बाहर निकलने की अपनी आदत से मजबूर श्रीकांत क्रीज से बाहर हो गए. तभी इंग्लैंड के फिल्डर ने उन्हें रन आउट कर दिया. श्रीकांत की यह गलती देख मैदान के खिलाड़ी हंस रहे थे तो वहीं साथी खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम में गुस्से में थे.

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श्रीकांत के बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने अपने खेल के बदौलत क्रिकेट में एक नये शब्द का ईजाद किया था जिसका नाम है हिटिंग. जोकि बाद के समय में कई बेहतरीन बल्लेबाजों के नाम के साथ जुड़ गया. जैसे कि सचिन तेंदुलकर, सनथ जयसूर्या, विरेंद्र सहवाग, एडम गिलक्रिस्ट. रोहित शर्मा को भी हिटमैन के नाम से भी जाने जाते है.

आइए अब एक नजर डाल लेते हैं श्रीकांत के दिलचस्प फैक्ट्स को लेकर

वेस्टइंडीज के खिलाफ लॉर्ड्स के मैदान पर 1983 के विश्वकप में श्रीकांत सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने थे. इस विश्वकप में उन्होंने अपने पारी की शुरुआत करते हुए 57 गेंदों में 7 चौके और एक छक्के की मदद से 38 रनों की शानदार पारी खेली थी. आपको जानकर हैरानी होगी कि उस दौर में वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों का दबदवा था. कहा जाता है कि वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों के सामने बल्लेबाजों की एक न चलती थी. लेकिन श्रीकांत इन गेंदबाजों से कभी न डरे इन्होंने माइकल होल्डिंग, एंडी रॉबर्ट्स, जोएल गार्नर और मैलकम मार्शल जैसे तेज गेंदबाजों का डट कर सामना किया और भारतीय टीम के लिए रन भी बनाए. इसके साथ ही साल 1985 में मेलबर्न में खेले गए मुकाबले में पाकिस्तान के खिलाफ फाइन में श्रीकांत ने शानदार 67 रन की पारी खेली थी. इस मैच के दौरान उन्होंने छह चौके और दो छक्के भी लगाए थे. जिसके बदौलत भारत की टीम यह मैच 8 विकेट से जीतने में कामयाव रही थी.

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1983 के विश्वकप से ठीक पहले सिंतबर 1982 में भारत और श्रीलंका के बीच मुकाबला खेला जा रहा था. इस मैच में श्रीकांत ने सिर्फ 66 गेंदों में 95 रनों की धमाकेदार पारी खेली थी. इस पारी में श्रीकांत ने 13 चौके और एक छक्का लगाया था. उनकी पारी की बदौलत भारत ने सिर्फ 41 वें ओवर में 278 रनों के लक्ष्य का पीछा किया था. यह पारी उस समय वेनडे क्रिकेट इतिहास में स्ट्राइक रेट के लिहाज से चौथी सबसे तेज पारी थी. उस समय श्रीकांत का स्टाइक रेट 143.93 का था. इसके साथ ही श्रीकांत अपने समय में वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट रखने वाले खिलाड़ी रहे हैं. उन्होने नवंबर 1981 से मार्च 1992 तक भारतीय टीम के टॉप ऑर्डर के पांच बल्लेबाजों में सबसे बेहतरीन स्टाइक रेट रहा है. आपको बता दें कि उस समय के भारतीय टीम के बेहतरीन बल्लेबाजों में नवजोत सिंह सिद्धू, दिलीप वेंगसरकर, मोहम्मद अजहरुद्दीन, सुनील गावस्कर, मोहिंदर अमरनाथ और रवि शास्त्री इन सब में मोहिंदर अमरनाथ के बारे में यह कहा जाता है कि ये एक मात्र ऐसे खिलाड़ी थे जोकि किसी भी खतरनाक गेंदबाज की जमकर धुनाई कर सकते थे लेकिन इसके बाद भी इनका स्ट्राइक रेट उतना रहा जितना कि श्रीकांत का रहा है. साल 1984 में श्रीकांत के साथ एक बड़ा मजाक हुआ था जिसमें उन्हें यह बताया गया कि भारत और पाकिस्तान के साथ होने वाली सीरीज में उनका चयन हो गया है, जिसके बाद वे फ्लाइट पकड़कर मुंबई पहुंच गए लेकिन वहां जाने के बाद पता चला की ऐसा कुछ नहीं था.

अब जरा चलिए साल 1985-86 में भारत की टीम ऑस्ट्रेलिया दौरा पर थी इस दौरान तीन टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जानी थी इस सीरीज में भी श्रीकांत ने 72.75 के औसत से 291 रन की शानदार पारी खेली थी. इस दौरान उन्होंने एक शतक और दो अर्धशतक भी लगाया था. यह सीरीज कोई भी टीम जीतने में सफल नहीं रही यह सीरीज ड्रा हो गया लेकिन इसके ड्रा होने में भी यह कहा जा रहा है कि श्रीकांत का बहुत बड़ा योगदान रहा है.

श्रीकांत ने अपने टेस्ट कैरियर में दो शतक लगाए हैं लेकिन यह दोनों शतक एक विस्फोटक बल्लेबाज की तरह उन्होंने लगाया. जब वे मैदान में खेल रहे थे तो उस समय कभी यह लगा ही नहीं कि यह बल्लेबाज आज टेस्ट मैच खेलने के लिए मैदान में उतरा है. साल 1986 में सिडनी में खेले जा रहे टेस्ट मैच में इन्होंने 117 गेंदो में 19 चौके और एक छक्के की मदद से 116 रन की शानदार पारी खेली. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 3314 का रहा था. इसके बाद उन्होंने एक शतक और लगाया वह भी इसी तरह की धमाकेदार बल्लेबाजी करके अपना शतक पूरा किया था. साल 1987 में चेन्नई में पाकिस्तान के खिलाफ श्रीकांत के बल्ले से रन निकल रहा था. इस दौरान उन्होंने अपनी पारी में 149 गेंदों में 123 रन बनाए थे इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 82.55 का था. टेस्ट मैचों में अमुमन इस तरह के स्ट्राइक रेट बहुत ही कम देखने को मिलता है. और भारत यह टेस्ट मैच ड्रा करने में सफल रहा था.

10 दिसंबर 1988 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलते हुए श्रीकांत ने एक पारी में 50 रन बनाए और 5 विकेट भी लिया. ऐसा करने वाले उस समय दुनिया के दूसरे खिलाड़ी बने थे. और भारत की ओर से यह कारनामा करने वाले पहले खिलाड़ी. इसके बाद आया साल 1989 में श्रीकांत को भारतीय टीम की कमान दी गई, श्रीकांत की ही कप्तानी में क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने डेब्यू किया था. जब श्रीकांत भारतीय टीम के कप्तान थे तो उन्होंने भारतीय टीम पाकिस्तान के खिलाफ चार टेस्ट मैचों की सीरीज जीतने में कामयाब हुई थी. हालांकि इस श्रृंखला के दौरान श्रीकांत की बल्लेबाजी उतनी अच्छी नहीं थी जिसके कारण उन्हें टीम से ही बाहर कर दिया गया था. हालांकि उन्हें दो साल के बाद एक बार फिर से भारतीय टीम में उन्हें खेलने का मौका दिया गया इस दौरान भी उन्होंने कोई खास प्रदर्शन नहीं किया. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए मुकाबले में उन्होंने 8 पारियों में 135 रन ही बनाया था. इसके बाद साल 1992 का विश्वकप आया इस विश्वकप में भारतीय टीम का प्रदर्शन उतना बेहतर नहीं था इसके बाद साल 1993 में उन्होंने क्रिकेट के सभी फॉमेंट से संन्यास की घोषणा कर दी. जिस समय उन्होंने क्रिकेट में संन्यास की घोषणा की थी उस समय श्रीकांत भारतीय टीम की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में शामिल थे. साल 1992 के विश्वकप में श्रीकांत के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज हो गया जो आज तक किसी भी बल्लेबाज के नाम दर्ज नहीं है. दरअसल ऑस्ट्रेलिया के मिशेल ओवल मैदान में एक मात्र रन बनाने वाले एकलौते बल्लेबाज बन गए, वह मैच मात्र दो गेंदों का हो सका जिसमें एक रन बना था उसके बाद बारिश के कारण यह मैच नहीं हो पाया और यह इस मैदान पर श्रीकांत के नाम रिकॉर्ड दर्ज हो गया.

क्रिकेट से संन्यास की घोषणा करने के बाद श्रीकांत को भारतीय टीमए का कोच बनाया गया था. हालांकि यहां भी वे लंबे समय तक नहीं रहे. इसके बाद श्रीकांत देश के कई अलग न्यूज चैनलों में एक विश्लेषक के तौर पर जुड़कर रहने लगे. इसके बाद आया साल 2008 जब देश में IPL की शुरुआत हुई. श्रीकांत को इंडियन प्रीमियर लीग की चेन्नई सुपर किंग्स फ्रेंचाईजी के लिए ब्रांड एंबेस्डर बनाया गया. इसके बाद साल 2008 में उन्हें भारतीय टीम के मुख्य चयनकर्ता बनाया गया था. वे साल 2012 तक भारतीय टीम के साथ जुड़कर रहे. भारतीय टीम से बाहर होने के बाद वे सनराइजर्स हैदराबाद फ्रेंचाइजी के ब्रांडएमवेस्डर बनाया गया था.इसके अलावा वह टीवी नेटवर्क स्टार स्पोर्ट्स तमिल चैनल के कमेंटेटर भी रहे हैं. इसके बाद साल 2020 में इन्हें अखिल भारतीय खेल परिषद के पैनल के सदस्य रहे हैं.

अपने टेस्ट क्रिकेट कैरियर में श्रीकांत ने 43 टेस्ट मैच के 73 इनिंग में 2 हजार 62 रन बनाए हैं इस दौरान इनका स्ट्राक रेट 75.34 का रहा है. हालांकि इन्होंने 2 शतक और 12 अर्धशतक भी लगाए हैं. वहीं अगर हम वनडे क्रिकेट की बात करें तो 146 मैच में इन्होंने 4 हजार 91 रन बनाए हैं इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 71.75 का रहा है. वनडे में इन्होंने चार शतक और 27 अर्धशतक भी लगाये हैं. वहीं अगर हम इनकी गेंदबाजी को देखें तो इन्होंने 146 वनडे मैच में 25 विकेट लेने में सफल रहे हैं. उन्होंने अपने क्रिकेट कैरियर में 27 रन देकर 5 विकेट भी लिया है.

श्रीकांत की बल्लेबाजी को लेकर बोलते हुए कपिल देव ने कहा था कि श्रीकांत की तकनीक अनूठी थी. वह औरों से अलग था. वह एक ऐसा बल्लेबाज था जोगेंद का बचाव कर सकता था. और वह चाहता तो उसी तरह की गेंद को विस्फोट कर सकता था. कपिल देव ने कहा कि श्रीकांत ने गेंदबाजों को हर जगह पर मारा था. पांच दिवसीय मैच हो या फिर एकदिवसीय मैच हो उनका प्रदर्शन शानदार रहा है.मैं उनकी तकनीक का प्रशंसक नहीं था, लेकिन जिस तरह से वह गेंदबाजों पर धावा बोल सकते है, उनकी निश्चित रूप से प्रशंसा की थी.

श्रीकांत के लिए मास्टर बलास्टर सचिन तेंदुलकर ने कहा था कि वे किसी भी खिलाड़ी पर दवाब नहीं डालते थे. उन्होंने मुझे खुब प्रोत्साहित किया है. कई बार तो उन्होंने कहा था कि तुम भारतीय टीम के कप्तान बनने जा रहे हो मुझे मत भूलना. सचिन ने कहा था कि मैं भाग्यशाली हूं जो मुझे उनकी कप्तानी में खेलने का मौका मिला.वे एक मिलनसार व्यक्ति है.

श्रीकांत के दो बेटें हैं अनिरुद्ध और आदित्य दोनों क्रिकेट खेलते हैं. आपको बता दें कि अनिरुद्ध तमिलनाडू के लिए घरेलू क्रिकेट खेलते हैं, साथ ही उन्होंने अंडर-19 टीम के साथ ही IPL में चेन्नई की तरफ से और हैदराबाद की टीम का हिस्सा रह चुके हैं. आपको बता दें कि श्रीकांत को क्रिकेट के साथ ही डांच में भी रूचि है इसीलिे उन्होंने एक रियलटी शो झलक दिखला जा में भी भाग लिया था.

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