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किसी ने खूब कहा है खेल हो या जिंदगी , अपना इक्का तभी निकालना चाहिए जब सामने वाला बादशाह हो।

साल 2008 में ललित मोदी ने कुछ ऐसा ही किया था जब एसएल ग्रुप के मालिक सुभाष चंद्रा ने खुद की लीग आईसीएल शुरू की। टेस्ट और वनडे क्रिकेट के प्रति कम होती रोचकता को देखते हुए आधुनिक युग के खेल टी 20 की चमक ने ना जाने इंडियन क्रिकेट में कौन सा भूचाल ला दिया जिसके बाद आईसीएल को पछाड़ कर आईपीएल कैसे बन गई दुनिया की सबसे बड़ी और फेमस लीग।

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 दोस्तों, हम बात करने वाले है इंडियन प्रीमियर लीग के उस सिगमेंट की जिसने इंडियन क्रिकेट लीग के चमकते करियर को उठने से पहले ही नेस्तनाबूत कर दिया। दोस्तों आज हम आपको इस लेख में आईपीएल के प्रसिद्ध होने और आईसीएल के डूबते भविष्य के बारे में बताने जा रहे है। जिसकी पटकथा कई वर्षो पहले ही लिखी जा चुकी थी। और ये भी बताएंगे कि आईपीएल के ढांचे को कैसे एक ऑस्ट्रेलियाई टीवी मालिक ने तैयार किया।

लंबे छक्के, आतिशी पारियां ,विकटों के बीच थमी धड़कने और भावनाओं से जुड़ा बेमिसाल मनोरंजन। ये दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट लीग आईपीएल यानि इंडियन प्रीमियर लीग की पहचान बन चुकी है। दोस्तों, भारत में आईपीएल एक ऐसे त्योहार के रूप में मनाया जाता है जिसे खेलती तो सिर्फ दस टीमें है लेकिन इसका जश्न पूरा भारत मनाता है। यह ऐसा समय होता है कि जब अखबारों के फ्रंट पेज में क्रिकेट के छपे आर्टिकलो से भरे मिलते है। सोशल मीडिया से लेकर नुक्कड़ों तक सिर्फ आईपीएल की ही चर्चा होती है । शायद ही किसी को पता हो कि आईपीएल जैसी लीग की पटकथा 46 साल पहले लिखी जा चुकी थी। चलिए आपको विस्तार से बताते है।

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यह कहानी है साल 1978 की , जब ऑस्ट्रेलिया के चैनल 9 के मालिक कैरी पैकर ने क्रिकेट के भविष्य को बखूबी पहचान लिया था। उस समय उनकी कम्पनी ने एशेज टेस्ट के लिए ब्रॉडकास्टिंग के लिए बिड की थी। कैरी पैकर को क्रिकेट के अगले दस साल में बहुत मुनाफा दिखाई दे रहा था। इसलिए उन्होंने अपनी कॉम्प्टिशन से कहीं ज्यादा बिड की। लेकिन उनके चैनल को स्पोर्ट्स की ब्रॉडकास्टिंग का एक्सपीरियंस कम होने की वजह से मना कर दिया गया। लेकिन पैकर निराश नही हुए उनके दिमाग में एक आईडिया आया और वो आइडिया था वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट। जो पूरी तरह से एक प्राइवेट टूर्नामेंट था। उन्हे पता था कि अगर ये बात किसी भी क्रिकेट बोर्ड को पता लग गई तो उनके सारे किए कराए पर पानी फिर जाएगा। फिर उन्होंने क्रिकेट के कई खिलाड़ियों को इस टूर्नामेंट में खेलने के लिए न्योता भेजा। साथ ही अधिक पैसे देने की भी बात कही। उस दौर में कम पैसों में खिलाड़ी मैदान पर पसीना बहाते थे। ऐसे में क्रिकेट के बड़े बड़े दिग्गज भी इसमें शामिल हो गए। और क्रिकेट दो खेमों में बंट गया। फिर क्या था आईसीसी को बीच में आना ही पड़ा। आईसीसी ने सभी बोर्ड से कहा कि जिन जिन खिलाड़ियों ने कैरी पैकर के टूर्नामेंट को ज्वाइन किया हो उन्हे इंटरनेशनल क्रिकेट से बैन कर दें। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी का समर्थन किया लेकिन उस समय सबसे ताकतवर बोर्ड वेस्टइंडीज ने ना तो खिलाडियों को मना किया और ना ही इस टूर्नामेंट का विरोध किया।

इस बीच वर्ल्ड क्रिकेट सीरीज शुरू हुई तो धीरे धीरे ऑडियंस बढ़ने लगे। पैसा और फेम सब चरम पर था। ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट के बड़े बड़े अभी बोर्ड को छोड़कर इस टूर्नामेंट में आ चुके थे। ऐसे में कैरी पैकर ने ऑफर भेजा कि मैं मेरी सीरीज बंद कर दूंगा अगर आप मुझे ऑस्ट्रेलिया के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स मुझे बेच दें और मेरे सभी खिलाड़ियों को आप बिना किसी एक्शन के वापस ले लें। तब इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड ने सारी बातें मान ली। और दुनिया ने देखा कि कैसे एक प्राइवेट चैनल ने क्रिकेट के दिग्गज बोर्ड को घुटने पर ला दिया।

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अब आते है एक और मीडिया कंपनी एक और कंपनी का मालिक एक और मीडिया राइट्स की जंग। पूरी पटकथा हू ब हू कैरी पैकर वाली। जी कंपनी के मालिक सुभाष चंद्रा ने 2003 2005 और 2006 में ब्रॉडकास्टिंग के लिए बिडिंग की। और हर बार अपने कंप्टीशन से ज्यादा बोली लगाई । लेकिन उन्हें मना कर दिया गया। कारण वही स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग में अनुभव की कमी। फिर सुभाष चंद्रा ने राजनीति में उतरकर बीसीसीआई इलेक्शन में शरद पवार की तरफ होकर जगमोहन डालमिया को हराया। लेकिन फिर भी ब्रॉडकास्टिंग के राइट्स नही मिल पाए। फिर सुभाष चंद्रा ने खुद की लीग शुरू करने का प्लान बनाया। लेकिन ललित मोदी ने उस पर ग्रहण लगा दिया। कैसे वो भी समझते हैं। आमतौर पर तो हम यह जानते है इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत 2008 में ललित मोदी ने की थी। लेकिन इसके सफल शुरुआत की राह इतनी आसान भी नहीं थी। इसके पीछे कई बड़े तथ्य और गहरे बड़े राज छिपे हुए है। तो आइए जानते है इस विडियो में। इसकी शुरुआत हुई थी आईपीएल के प्रथम संस्करण से लगभग 12 साल पहले। सितंबर 1995 से , जब ललित मोदी ने इंडियन क्रिकेट लीग नाम से एक क्रिकेट कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराया था। जिसका उद्देश्य था मोदी इंटरटेनमेंट का प्रमोशन करना। जो उस वक्त espn के साथ काम करता था। लेकिन उनका ये आइडिया फ्लॉप साबित हुआ। और आईसीएल का वजूद खत्म हो गया । इस बीच कुछ साल बीते और साल 2000 के आसपास भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता काफी तेजी से बढ़ रही थी, लोगो में इसका जुनून परवान चढ रहा था। और प्रसंशको का एक बड़ा हुजूम था। इस खेल से लगभग देश का हर वर्ग जुड चुका था। जिससे क्रिकेट खिलाड़ियों ने भी इजाफा हुआ। भारतीय टीम में खेलने का सपना लिए कई खिलाड़ी आते थे। लेकिन हर किसी का सपना साकार होना एक सपने जैसा ही था। और इंडियन टीम में ना चुने जाने के बाद इन खिलाड़ियों को अपनी काबिलियत साबित करने के लिए कोई दूसरा मंच भी नही था।

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उस वक्त घरेलू क्रिकेट तो होती थी लेकिन उनसे बाकी खिलाड़ियों को ना ही शोहरत मिलती थी और ना ही पैसा। जिसकी वजह से कई प्रतिभावान खिलाड़ी इंडियन क्रिकेट से धीरे धीरे कटने लगते थे जो खिलाड़ी इंडियन टीम में शामिल होते थे वो काफी उम्दा होते थे लेकिन किसी खिलाड़ी के सन्यास और चोटिल होने पर किसी खिलाड़ी के रिप्लेसमेंट की बात आती तो चयन कार्ताओ के पास ज्यादा विकल्प नही होते थे और इंडियन टीम के खेल में अच्छा खासा प्रभाव पड़ता था। लगभग इसी समय एसएल ग्रुप के सीईओ सुभाष चंद्रा एक क्रिकेट शुभचिंतक के रूप में इस पर काम करने को सोचा। बताया जाता है कि ये क्रिकेट के बहुत बड़े दीवाने थे। इन्होंने 2006 में ज़ी टेलिसंस के द्वारा जी स्पोर्ट्स चैनल लॉन्च किया। और साथ टेन स्पोर्ट्स के लगभग 50 प्रतिशत शेयर 2.5 अरब रुपए में खरीद लिया। और इन चैनलों में क्रिकेट की नियमित ब्रॉडकास्टिंग चाहते थे और काफी प्रयास के बाद उन्होंने पाकिस्तान, श्रीलंका, वेस्टइंडीज जैसे छोटे छोटे क्रिकेट बोर्डो से ब्रॉडकास्टिंग के राइट्स मिल गए। लेकिन बीसीसीआई ने जी स्पोर्ट्स को अनुभवहीन बताकर उन्हे भारत के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स देने से मना कर दिया। मामला कोर्ट पहुंचा। बीसीसीआई और ईएसपीएन के बीच 5 साल के स्पोर्ट्स राइट्स के लिए काफी लंबा संघर्ष चला। जी स्पोर्ट्स ने सबसे ज्यादा बोली लगाई और फिर भी उन्हें बीसीसीआई ने राइट्स नही दिए। फिर साल 2007 का वो दौर आया जब भारत ने पाकिस्तान को हराकर टी 20 विश्व कप जीता। भारत में इस क्रिकेट फॉर्मेट को अच्छी पहचान मिल गई थीं इसकी सफलता को देखते हुए सुभाष चंद्रा ने भारत में अपनी एक टी 20 लीग बनाने की सोची। और इसका खाका तैयार करने में लग गए। वो जानते थे कि बड़े खिलाड़ी इस टूर्नामेंट में होंगे तो दर्शक जरूर खींचे चले आयेंगे। जैसे कैरी पैकर ने किया था। इस बीच सुभाष चंद्रा ने कई बड़े खिलाड़ियों के साथ जैसे शाहिद अफरीदी, अब्दुल रज्जाक, क्रिस गेल, शेन वार्न और घरेलू क्रिकेट के बड़ी कीमत देकर इस टूर्नामेंट में खेलने का न्योता दिया और इस लीग का नाम आईसीएल यानी इंडियन क्रिकेट लीग रखा जो 1995 में ललित मोदी द्वारा रजिस्टर था।

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उस समय ललित मोदी राजस्थान क्रिकेट के अध्यक्ष थे। जो बीसीसीआई का भी हिस्सा थे बहराल देश के सभी स्टेडियम से क्रिकेट कराने के लिए अनुमति ले ली गई। और तैयारिया जोरो शोरो से चली। इनके इस प्रयास को सबने सराहा सिर्फ बीसीसीआई ने नहीं । दरअसल बीसीसीआई ने इसे घरेलू क्रिकेट लीग मानने से इंकार कर दिया। और इसे बंद करवाने के जद्दोजहद में जुट गया। लेकिन सुभाष चंद्रा ने सभी को नजरंदाज कर आईसीएल शुरू करा दिया, ये भारत ही नहीं किसी भी देश का सबसे बड़ा टूर्नामेंट था। इसलिए पूरे विश्व ने इसका दिल खोलकर स्वागत किया गया। यह लीग 2007 से 2009 तक चली।जिसमे टीमों, प्रारूप आज की आईपीएल से काफी अलग था। आईसीएल में कुल 13 टीमों ने शिरकत किया जिसमे भारत, पाकिस्तान, बंगलादेश की विश्व एकादश की चार टीम और नौ बड़े देशों ने हिस्सा लिया। आईसीएल की प्राइज मानी एक मिलियन डॉलर थी। और शुरुआत में आईसीएल ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया लेकिन ये बातें ना जाने क्यों बीसीसीआई को खटक रही थी। बीसीसीआई ने आईसीएल को बर्बाद करने के लिए जो रुख अपनाया आप सोच भी नहीं सकते। बीसीसीआई ने सभी खिलाड़ियों की सैलरी लगभग दुगनी कर दी। साथ ही घरेलू टूर्नामेंट की प्राइज मनी बड़ाई। और जब इससे भी बात नही बनी तो उन्होंने आईसीएल खेलने वाले खिलाड़ियों को बैन करने की मांग रखी। साथ ही कपिल देव और सैय्यद किरनामी जैसे दिग्गजो पर प्रतिबंध लगा दिया जो उस वक्त आईसीएल के सदस्य हुआ करते थे। अब भारतीय खिलाड़ियों को ना चाहते हुए भी आईसीएल से अपने पैर खींचने पड़े। बीसीसीआई की इस मुहिम को आईसीसी ने भी समर्थन दिया। इस तरह भारत में जगमगाता तारा आईसीएल एक टूटा तारा बनकर बिखर गया। जो खुद टूटकर आईपीएल के सपने को हकीकत में बदल गया। कहा जाता है की आईसीएल पर सट्टे और फिक्सिंग के आरोप भी लगाए गए। लेकिन इसमें कितनी सच्चाई रही होगी आप खुद समझ सकते हैं। आज आईपीएल में कोई कॉमेंटेटर आईसीएल का जिक्र तक नहीं करता। 13 सितम्बर 2007 को बीसीसीआई द्वारा ललित मोदी के नेतृत्व में आईपीएल की घोषणा की गई। और इस तरह आईपीएल के आते ही आईसीएल का अस्तित्व 2009 तक पूरी तरह समाप्त हो गया। तो कुछ इस तरह शुरू हुआ 2008 में दुनिया की सबसे बड़ी और लोकप्रिय लीग इंडियन प्रीमियर लीग। जिसमें आज देश के दस बड़े शहरों की टीमें धमाल मचा रही है।

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2003 में जिस टी 20 क्रिकेट को बीसीसीआई ने जोकर कहा था आज क्रिकेट के उसी फॉर्मेट से खुद दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बन बैठा है। आईपीएल शुरू में कुछ विवादित जरूर था लेकिन अब ये करोड़ों भारतीयों के दिलों की धड़कन बन चुका है। आईपीएल से नए युवा खिलाड़ियों को फेम और पैसा दोनो मिल रहा है साथ ही इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन कर टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए भी आईपीएल दरवाजे खोल रहा है। दोस्तों आईपीएल की सफलता हो देखते हुए हमारे दुनिया के कई क्रिकेट बोर्ड ने भी अपनी खुद की लीग भी शुरू कर दी जैसे ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग, बांग्लादेश प्रीमियर लीग, पाकिस्तान सुपर लीग, कैरेबियन प्रीमियर लीग और श्री लंका क्रिकेट लीग इत्यादि। इतना ही नही अन्य खेलों ने अपनी लीग आईपीएल की तर्ज़ पर ही शुरू की।

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