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बिहार की राजनीति में आए दिन नए नए बदलाव देखने को मिलता रहता है. खैर इन दिनों लोकसभा चुनाव को लेकर बिहार में सरगर्मियां तेज है. ऐसे में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केंद्र की सियासत को लेकर कुछ ज्यादा ही एक्टिव दिख रहे हैं. पिछले दिनों उनका दिल्ली दौरा हुआ था जिसमें विपक्ष के कई बड़े नेताओं से मुलाकात हुई थी. और विपक्षी एकता की मुहीम में तेजी लाने की बात कही गई थी. लेकिन इस दौरान कई तरह के सवाल भी उठने लगे थे कि आखिर विपक्षी एकता बन भी जाती है तो प्रधानमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा. कई नाम सामने आ रहे हैं. ऐसे में राजनीतिक जानकार से लेकर बीजेपी के नेता लगातार विपक्ष से यह सवाल पुछ रहे हैं. लेकिन विपक्ष के नेताओं ने इस बात पर फिलहाल चुप्पी साध ली है.

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बीते दिन उतराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात हुई है. जिसके बाद कई तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं. दरअसल यह मुलाकात इसलिए भी खास थी कि बिहार कांग्रेस के नेताओं को इस बात की भनक तक नहीं थी कि हरीश रावत बिहार में हैं और उनकी मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात होने वाली है. हालांकि इस मुलाकात के बाद नीतीश कुमार बिहार कांग्रेस के द्वारा बुलाए गए इफ्तार पार्टी में शामिल होने के लिए गए थे. ऐसे में हरीश रावत और नीतीश कुमार के इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इन दिनों नेताओं के बीच में ऐसी क्या बात थी कि बिहार कांग्रेस के किसी भी नेता को पता भी नहीं था और हरीश रावत मुलाकात करके चले गए.

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हरीश रावत और नीतीश कुमार के इस मुलाकात को लेकर रावत की तरफ से यह कहा गया है कि यह एक औपचारिक मुलाकात है. हालांकि राजनीतिक पंडित यह बता रहे हैं कि लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए यह मुलाकात की गई है. बताया तो यह भी जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और हरीश रावत के बीच में काफी लंबे समय तक बातचीत हुई है. इन दिनों नेताओं के बीच में क्या बातचीत हुई है इसके बारे में कुछ भी सही सही नहीं बताया गया है. लेकिन राजनीतिक गलियारें में इस बात की चर्चा है कि महागठबंधन को मजबूत करने को लेकर यह मुलाकात हुई है. हरीश रावत के बारे में यह भी बताया जा रहा है कि वे गांधी परिवार के काफी करीबी नेताओं में से एक माने जाते हैं. ऐसे में अगर हरीश रावत नीतीश कुमार से मिले हैं तो गांधी परिवार का कोई संदेश लाए हों इस ओर भी विचार किया जा रहा है. खैर इससे पहले साल 2022 में भी हरीश रावत की नीतीश कुमार से मुलाकात हुई थी तब हरीश रावत ने नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा था कि उनका भविष्य उज्जवल है. इस समय राजनीतिक दलों को बैठकर ये समझना होगा कि उनकी लड़ाई बीजेपी से हैं या फिर कांग्रेस हैं. उसके बाद कांग्रेस को इस पर विचार करने की जरूरत है.

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