vishy

भारत ने विश्व क्रिकेट को एक से बढ़कर एक बल्लेबाज दिए. फिर चाहे बात सुनील गावस्कर की हो या फिर सचिन तेंदुलकर. एक समय भारतीय टीम अपनी मजबूत बैटिंग लाइनअप के लिए जानी जाती थी और आज भी भारत के पास विश्व के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों की फ़ौज है. गावस्कर के ही समय टीम इंडिया में एक ऐसा स्टाइलिश बल्लेबाज था, जो ताकत से ज्यादा टाइमिंग पर भरोसा करता था. 70 के दशक में जब भारतीय क्रिकेट में एक तरफ सुनील गावस्कर रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे थे, तो दूसरी तरफ यह बल्लेबाज अपनी स्टाइलिश बल्लेबाजी से विश्व क्रिकेट को अपना दीवाना बना रहा था.

Sunil gavaskar records list ODI and test matches
महान सुनील गावस्कर

आप ही सोचिए कि अगर कोई बल्लेबाज भारतीय टीम में रहते हुए सुनील गावस्कर के पीक में उनको टक्कर दे रहा था तो वह बल्लेबाज किस कद का होगा. उसमें क्या खूबी होगी ? आज बात भारत के उस बल्लेबाज की, जिसने सुनील गावस्कर के साथ खेलते हुए उनको टक्कर दिया. जिसने अपनी स्टाइलिश बल्लेअबाजी से विश्व क्रिकेट को मंत्रमुग्ध किया. आज बात भारत के उसी स्टाइलिश बल्लेबाज गुंडप्पा विश्वनाथ की.

Young Vishy 1
युवा गुंडप्पा विश्वनाथ

12 फरवरी, 1949 को मैसूर के शिवमोगा जिले के भाद्र्वती कस्बे में रंगनाथ विश्वनाथ के घर एक बच्चे का जन्म हुआ, जिसका नाम रखा गया गुंडप्पा, गुंडप्पा विश्वनाथ. गुंडप्पा के पिता रंगनाथ मैसूर स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में एक स्टेनोग्राफर थे. गुंडप्पा की उम्र तब 4 वर्ष रही होगी, जब पिता रंगनाथ का तबादला भाद्र्वती से 250 किलोमीटर दूर बैंगलोर में हो गया. यहां पूरा परिवार विश्वेश्वर पुरम में एक किराए के घर में रहता था.

गुंडप्पा विश्वनाथ बताते हैं कि 7 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार हाथ में बल्ला लिया था. यहां से गली क्रिकेट में अपने दोस्तों के साथ टेनिस बॉल से खेलते हुए गुंडप्पा को इस खेल से प्यार हो गया और यह प्यार अगले 5 सालों में शीर्ष पर पहुंचकर जुनून बन गया.

G Vishwnath with Sunil Gavaskar 1

गुंडप्पा विश्वनाथ को क्रिकेट के करीब लाने में उनके भाई जगन्नाथ का बहुत बड़ा हाथ रहा. जगन्नाथ बहुत अच्छे क्लबक्रिकेटर थे और मैच वाले दिन वो अपने भाई को जल्दी उठाकर मैच की कमेंट्री सुनाते थे. इसके अलावा जगन्नाथ अपने भाई गुंडप्पा को क्रिकेट से जुड़े किस्सेकहानियां भी सुनाया करते थे.

इन किस्सों और कहानियों को सुनतेसुनते गुंडप्पा ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट और खासकर नील हार्वे को पसंद करने लगे और धीरेधीरे वो उनके आइडल यानी आदर्श बन गए.

Neil Harvey batting 1950b 1
नील हार्वे

और फिर वो दिन आया जब गुंडप्पा विश्वनाथ को एक फर्स्ट क्लास मैच के चलते अपने पसंदीदा खिलाड़ी नील हार्वे को देखने और छूने का मौका मिला. उस वक्त गुंडप्पा सिर्फ 11 साल के थे. आज भी उस पल को गुंडप्पा किसी सपने की तरह मानते हैं.

नील हार्वे और भाई जगन्नाथ के अलावा जिस इंसान का असर गुंडप्पा विश्वनाथ के क्रिकेट पर पड़ा उसका नाम था एस कृष्णा. एस कृष्णा विश्वनाथ के पड़ोस में रहते थे और अपनी कॉलेज क्रिकेट टीम के कप्तान थे. कृष्णा ने गुंडप्पा को टेनिस बॉल से खेलते देखा था और वो इससे प्रभावित थे. यही वजह थी कि कृष्णा गुंडप्पा के खेल को और अधिक निखारने में दिलचस्पी लेने लगे.

गुंडप्पा विश्वनाथ एक अच्छे बल्लेबाज के तौर अपने आसपास फेमस होने लगे, उनके साथ खेलने वाले बच्चे उनको एक अच्छा खिलाड़ी मानते थे. लेकिन गुंडप्पा अपनी छोटी उम्र और हाईट की वजह से रिजेक्ट हो रहे थे.

image

ऐसे समय में गुंडप्पा विश्वनाथ की मुलाकात चंद्रा शेट्टी से हुई, जो स्पार्टन क्रिकेट क्लब के ओनर थे. गुंडप्पा उस वक्त हाई स्कूल में थे. चंद्रा शेट्टी ने विश्वनाथ को खेलते हुए देखा था और इसलिए उन्होंने गुंडप्पा को अपने क्लब में शामिल होने के लिए कह दिया. चंद्रा शेट्टी के लिए विश्वनाथ का हुनर उनकी उम्र और हाईट से ज्यादा मायने रखती थी और इसलिए तो विश्वनाथ के सेलेक्शन के लिए वो टीम के कप्तान से भी उलझ गए. विश्वनाथ भी शेट्टी की उम्मीदों पर खरे उतरे और क्लब क्रिकेट टीम की तरफ से खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया.

हाई स्कूल पास करने के बाद गुंडप्पा विश्वनाथ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में काम करने लगे और वहां sbi की क्रिकेट टीम के लिए खेलते हुए उन्होंने अपने हुनर का परिचय दिया. यहां से विश्वनाथ को डोमेस्टिक क्रिकेट सर्किट में भी लोग जानने लगे और साल 1967 में गुंडप्पा विश्वनाथ ने मैसूर की तरफ से खेलते हुए आंध्र प्रदेश के खिलाफ अपना रणजी डेब्यू किया और अपने डेब्यू मैच में ही गुंडप्पा ने 230 रनों की शानदार पारी खेल डाली.

gvishy 1

फिर 1969 में विश्वनाथ को इंडियन बोर्ड प्रेजिडेंट एलेवेन की तरफ से न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलने का मौका मिला. यहां विश्वनाथ ने अपनी टीम को मुश्किलों से निकाला. निरंतर शानदार प्रदर्शन के दम पर गुंडप्पा विश्वनाथ ने भारत की अंतराष्ट्रीय टीम का भी दरवाजा खटखटा दिया और 15 नवंबर, 1969 को वो दिन आया जब गुंडप्पा को भारत का अंतराष्ट्रीय कैप मिला. लेकिन अपने डेब्यू टेस्ट की पहली पारी में विश्वनाथ 0 पर आउट हो गए. वो पवेलियन में उदास बैठे थे तब कप्तान पटौदी ने हिम्मत बांधते हुए उनसे कहा था कि उदास मत हो तुम अगली पारी में जरुर शतक लागाओगे. अगली पारी में चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे 20 साल के विश्वनाथ ने शुरू से ही अपने तेवर दिखा दिए. गुंडप्पा ने अपनी स्टाइलिश शॉट से सबका मन मोह लिया और भारत मैदान पर एक नौसिखिए को सुपरस्टार बनते देख रहा था.

विश्वनथ ने 137 रनों की पारी खेली, जिसमें उन्होंने 25 खुबसूरत चौके लगाए थे. विश्वनाथ की इस पारी के चलते भारत यह मैच ड्रा कराने में सफल हुआ था.

इस सीरीज में ऑस्ट्रेलिया की मजबूत टीम और बल्लेबाजों के लिए कब्रगाह मानी जाने वाले पिचों पर गुंडप्पा ने 2 अर्धशतकीय पारियां खेली. पूरी दुनिया ने तब विश्वनाथ के प्रतिभा को देखा.

Viswanath playing the inning od 114 runs 1

ऑस्ट्रेलिया के सामने और डोमेस्टिक क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत विश्वनाथ को साल 1971 में होने वाले वेस्टइंडीज और इंग्लैंड दौरों के लिए टीम में शामिल किया गया लेकिन गुंडप्पा उन दौरों पर उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाए. 1971 में खराब प्रदर्शन के बाद लोग गुंडप्पा विश्वनाथ को वन मैच वंडर कहने लगे थे और इसलिए आलोचकों को तब जवाब देना गुंडप्पा के लिए जरुरी हो गया. उसी साल इंग्लैंड की टीम भारत दौरे पर आई थी और कानपुर टेस्ट में गुंडप्पा ने 75 रनों की शानदार पारी खेली. दरअसल कानपुर टेस्ट के दौरान ही मुंबई टेस्ट के लिए टीम का चयन हो गया था और चयनकर्ताओं ने विश्वनाथ का चयन नहीं किया था लेकिन गुंडप्पा द्वारा खेली गई 75 रनों की पारी के बाद मुंबई टेस्ट के लिए भी उनका चयन हो गया. और मुंबई टेस्ट में शानदार शतक लगाकर विश्वनाथ ने सभी की बोलती बंद कर दी.

गुंडप्पा विश्वनाथ उस दौर के सबसे उम्दा बल्लेबाज थे, शॉट लगते ही उनके बल्ले से जो आवाज आती थी वो किसी सुरमई कविता की तरह लगती थी. कलाइयों का इस्तेमाल विश्वनाथ से बेहतर आज भी कोई बल्लेबाज नहीं कर सकता है. अपनी इन्हीं खूबियों की वजह से चौदह साल के लंबे करियर में ऐसे बहुत कम मौके आए जब गुंडप्पा को भारतीय टीम से ड्रॉप किया गया.

vishy 1

1974-75 में वेस्टइंडीज का भारत दौरा, जब विश्वनाथ ने 2 मैचों में हार के बाद कोलकाता टेस्ट में 139 रनों की पारी खेलकर भारत की सीरीज में वापसी कराई थी. मुश्किल टीम और मुश्किल समय में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले गुंडप्पा विश्वनाथ ने इसके बाद मद्रास टेस्ट में अकेले वेस्टइंडीज के खूंखार गेंदबाजों पर भारी पड़े. दरअसल उस मैच में भारत ने 91 रनों पर अपने 7 विकेट खो दिए थे ऐसे में गुंडप्पा ने एक छोर से विंडीज गेंदबाजों की जमकर खबर ली और 97 रनों की पारी खेली थी. यह आज भी विश्व क्रिकेट इतिहास में खेली गई सबसे बेहतरीन पारियों में गिना जाता है, खुद गावस्कर ने इस पारी को अपनी आँखों से देखि सबसे बेहतरीन पारी बताया था.

मुश्किल गेंदबाजी आक्रमण के सामने गुंडप्पा और भी ज्यादा अच्छी बल्लेबाजी करते थे. उस वक्त ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के गेंदबाजों की तूती बोलती थी और इन 2 टीमों के विरुद्ध गुंडप्पा का बैटिंग एवरेज 50 से भी ऊपर का रहता था.

gundappa 1

साल 1976 में जब भारत ने पोर्ट ऑफ स्पेन में रिकॉर्ड 403 रनों को चेज किया था तो उसमें विश्वनाथ ने 112 रनों की पारी खेली थी. यही वो पारी थी, जिसने मैच ड्रा कराने उतरी भारतीय टीम में जीत का हौसला भरा था. अगले साल ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर विश्वनाथ ने सीरीज में सबसे ज्यादा 500 रन बनाए थे.

बात अगर गुंडप्पा के वनडे करियर की करें तो टेस्ट की तुलना में यह फीका रहा क्योंकि इस खिलाड़ी की बल्लेबाजी टेस्ट क्रिकेट को ही सूट करती थी. साल 1974 में अपना वनडे डेब्यू करने वाले विश्वनाथ 2 बार भारत की तरफ से वर्ल्ड कप खेलने वाली टीम का हिस्सा भी रहे. साल 1979 वर्ल्ड कप में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेली गई 75 रनों की पारी विश्वनाथ के वनडे करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी रही लेकिन भारत को इस मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था.

आगे विश्वनाथ को 2 मैचों में भारतीय टीम का नेतृत्व करने का भी मौका मिला, जिसमें 1 मैच ड्रा रहा और दूसरा मैच भारत हार गई.

vishwa

विश्वनाथ ना सिर्फ एक अच्छे बल्लेबाज थे बल्कि एक अच्छे कप्तान और और एक अच्छे इंसान भी. उन्होंने हमेशा क्रिकेट के स्पिरिट को बनाए रखा. इंग्लैंड के खिलाफ एक मैच में अंपायर के गलत निर्णय को देखते हुए गुंडप्पा विश्वनाथ इंग्लिश बल्लेबाज बॉब टेलर को वापस बुला लेते हैं, जिनकी शतकीय पारी के चलते बाद में भारत को हार का सामना करना पड़ा लेकिन विश्वनाथ ने समूचे क्रिकेट वर्ल्ड का दिल जीत लिया.

लेकिन विश्वनाथ की बेहतरीन बल्लेबाजी से विपक्षी खिलाड़ी इस तरह खौफजदा रहते थे कि जरुरत पड़ने पर बेईमानी पर उतर जाते थे. साल 1978 में पाकिस्तान की धरती पर एक वनडे मैच के दौरान जब विश्वनाथ बल्लेबाजी कर रहे थे तब पाकिस्तानी गेंदबाजों ने हर गेंद विश्वनाथ के सर के ऊपर से निकालना शुरू कर दिया था और जब इसकी शिकायत अंशुमान गायकवाड़ ने पाकिस्तानी अंपायर से की तो उन्होंने कहा कि किसी लंबे बल्लेबाज को ले आओ. पाकिस्तान की बढ़ती बेईमानी को देखते हुए तब कप्तान बिशन सिंह बेदी ने भारतीय बल्लेबाजों को वापस बुला लिया था.

gvishwa

फिर आया साल 1981 जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बढ़िया प्रदर्शन के बाद विश्वनाथ का करियर ढलने लगा था. गुंडप्पा विश्वनाथ को ड्रॉप करने की बात होने लगी लेकिन अभी शेर की आखिरी चिंघाड़ बाकी थी. साल 1982 में इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नई टेस्ट में विश्वनाथ ने अपने टेस्ट करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेल डाली और 222 रन बनाए, जिसमें यशपाल शर्मा के व्साथ पूरे दिन बल्लेबाजी करते रहने का कारनामा भी शामिल था.

अगले कुछ सालों में श्रीलंका के खिलाफ खराब प्रदर्शन और पाकिस्तान की पेस बैटरी के सामने गुंडप्पा एक थके हुए शेर की तरह नजर आए और उनकी थकावट इस बात का इशारा कर रही थी कि अब पर्दा गिराने का समय आ गया है और साल 1983 में पाकिस्तान के खिलाफ अपना आखिरी मैच खेलने के बाद गुंडप्पा विश्वनाथ ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया.

Sunil Gavaskar and G Viswanath

क्रिकेट से संन्यास के बाद साल 1999 से 2004 तक विश्वनाथ रेफरी के रूप में और फिर नेशनल सेलेक्शन कमिटी के चेयरमैन के रूप में क्रिकेट से जुड़े रहे. विश्वनाथ ने भारत के लिए 91 टेस्ट मैचों की 155 पारियों में 6080 रन बनाए, जिसमें 14 शानदार शतक शामिल हैं. विश्वनाथ के इन शतकों की खास बात ये थी कि उन्होंने जिस भी अंतराष्ट्रीय मैच में शतक लगाया था उसमें से कोई भी मैच भारत नहीं हारी थी.

साल 1975 में गुंडप्पा विश्वनाथ ICC टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने. वो 9 महीनों तक इस स्थान पर रहे थे. विश्वनाथ ने भारत के लिए 25 वनडे अंतराष्ट्रीय मैचों में 439 रन बनाए, इस दौरान उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 95 रन रहा.

Gundappa Viswanath with his wife

बात अगर गुंडप्पा विश्वनाथ के निजी जीवन की करें तो आपको जानकर हैरानी होगी क्योंकि गुंडप्पा ने मैदान पर अपने पार्टनर सुनील गावस्कर की बहन यानी कविता से शादी रचाई. दोनों बेहद खुश हैं उनका बेटा भी है जिसका नाम दैविक है.

vishwanath

भारत सरकार ने विश्वनाथ को अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया था साथ ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI द्वारा उन्हें कर्नल सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से साल 2009 में मिला. कमेंट में बताएं चक दे क्रिकेट की पूरी टीम गुंडप्पा विश्वनाथ के स्वस्थ और सुखद जीवन की कामना करता है. आपको गुंडप्पा विश्वनाथ की बल्लेबाजी में क्या खास लगती है ? कमेंट में बताएं.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *