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Guidelines For Winter: कभी सर्दीकभी गर्मी, मौसम की इस उठापटक से कैसे बचाएं ख़ुद को?

मौसम ने बदला अपना अंदाज़

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Guidelines For Winter: दिवाली ख़तम होते ही बिहार (Bihar) में मौसम ने अपना अंदाज़ बदल दिया है. ठंडीठंडी हवाओं ने दस्तक देना शुरू कर दिया है. लोगों को अब ज़्यादा सजग रहने की ज़रूरत है. मौसम के बदलते रुख़ से तबीयत बिगड़ने की संभावना भी बढ़ गयी है. ऐसे में ज़रूरी है कि सभी अपना और अपने परिवार का ख़ास ख़याल रखें. मौसम के इस बदलते अंदाज़ से बिहार राज्य प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदयकान्त मिश्रा द्वारा राजधानी पटना से वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए शीतलहर और ठंड से बचाव और सुरक्षा के लिए गाइडलाइन्स जारी की गयी है. साथ में, डिस्ट्रीक्ट मजिस्ट्रेट अभिलाषा शर्मा ने समाहरणालय स्थित कार्यालय प्रकोष्ठ से वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग में शामिल हुईं तथा दिए गये निर्देशों का अवशोषण किया. डिस्ट्रीक्ट मजिस्ट्रेट अभिलाषा शर्मा ने बिहार राज्य प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदयकान्त मिश्रा के सामने मौके पर वांछित प्रतिवेदन को प्रस्तुत किया और इसके संदर्भ में जानकारी भी दी. साथ ही, उन्होंने सुनिश्चित कर के यह आश्वासन दिया कि निर्देशों का अनुपालन हर तरह से किया जाएगा.

ठंड से बचाव के लिए करें ये उपाय

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उपाध्यक्ष डॉ. उदयकान्त मिश्रा ने गाइडलाइन्स के बारे में बताते हुए कहा है कि शीतलहर और ठंड से बचाव के लिए सभी को सावधान रहने की ज़रूरत है. इसके लिए सभी लोगों को अपने पास पर्याप्त संख्या में गरम कपड़ें रखने की आवश्यकता है. ज़रूरत के अनुसार कंबल, रजाई, की व्यवस्था पहले से ही करके रखें. जिन भी घर में बुज़ुर्ग हैं, उनका ख़ासतौर से ख़याल रखा जाना चाहिए. शीतलहर के समय जब बहुत ज़रूरी हो तभी घर से बाहर निकलें, अन्यथा घर में ही रहें. ठंडी हवाओं से ख़ुद को बचाए रखें. अपने शरीर को सूखा रखें. अगर ग़लती से शरीर गीला हो गया है तो फ़ौरन कपड़े बदल लें. ठंड से बचने के लिए निरंगुल दस्ताने पहनें, चूंकि वो अन्य दस्तानों के मुक़ाबले ज़्यादा गरम होते हैं और ठंड से बचने के लिए बेहतर सुरक्षा देते हैं. वैसे लोग जो ज़्यादातर घर पर ही होते हैं, वें समय निकालने के लिए मौसम की ताज़ा ख़बरें सुनें, अख़बार पढ़ें या फ़िर टीवी पर कार्यक्रम देखें. इसके साथ ही नियमित रूप से गरम पेय का सेवन करें.

बच्चों का भी रखें ध्यान

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घर के बुज़ुर्गों के साथसाथ बच्चों की भी देखभाल करें. ऐसे बदलते मौसम में बच्चे भी ज़्यादा बीमार पड़ते हैं. अक्सर, ठंड के मौसम में पाइप जम जाता है, इसके निवारण हेतु पेयजल का पर्याप्त संग्रहण करके रखें. शीतलहर की चपेट में आने से उंगलियों व अंगुठों का रंग सफ़ेद हो जाता है या फ़िर उनमें फ़ीकापन आ जाता है. नाक से भी पानी आना शुरू हो जाता है. इसके बचाव के लिए प्रभावित क्षेत्रों पर गर्म पानी डालें. शीतलहर में हायपोथरमिया होने की संभावना अधिक होती है. हायपोथरमिया होने पर प्रभावित व्यक्ति को गरम स्थान पर ही ले जाकर उसके कपड़े, आदि बदलें. हायपोथरमिया के मरीज़ के शरीर को बहुत परत कपड़े या टॉवल से ढ़क कर रखें. मरीज़ के शरीर को गरम करने के लिए गर्म पेय दें. प्रभावित क्षेत्रों की मालिश ना करें. क्यूंकि, मालिश करने से मरीज़ की तकलीफ़ और बढ़ सकती है. ठंड की कंपकंपी को अनदेखा ना करें. शरीर में कंपकंपी होना ठंड का महत्वपूर्ण संकेत होता है.

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