gopalganj

बिहार में दो सीटों पर होने वाले विधानसभा के उपचुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों की तरफ से तैयारी शुरू हो गई है. दोनों ही विधानसभा में राजनीतिक पार्टियों ने अपने अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है. ऐसे में यह बताया जा रहा है कि इस बार गोपालगंज में कड़ा मुकाबला देखने को मिलने वाला है. आपको बता दें कि बिहार के पूर्व मंत्री और बीजेपी के नेता सुभाष सिंह के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी. ऐसे में बीजेपी की तरफ से सुभाष सिंह की पत्नी कुसुम देवी को अपना उम्मीदवार बनाया है तो वहीं महागठबंधन की तरफ से इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. राजनीतिक जानकार यह बता रहे थे कि यह सीट कांग्रेस की पारंपरिक सीट है लेकिन जब टिकट बंटवारे की बात सामने आई तो यह सीट से राजद ने अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी. राजद ने मोहन प्रसाद गुप्ता पर भरोसा किया है और उन्हें चुनाव मैदान में उतारा है. मोहन प्रसाद गुप्ता राजद के पुराने सिपाही रहे हैं. राजद सुप्रीमो लालू यादव और तेजस्वी यादव के काफी करीबी माने जा रहे हैं. ऐसे में कहा जा रहा है कि मोहन प्रसाद गुप्ता के नाम पर राजद एक तरफ जहां वैश्य समाज का वोट अपनी ओर खिंचना चाह रही है तो वहीं राजद की पांरपरिक वोटों में अल्पसंख्यक और यादव पहले से हैं. तो वहीं बीजेपी के उम्मीदवार कुसुम देवी को लेकर यह कहा जा रहा है कि उन्हें सहानुभूति वोट मिलने की बात कही जा रही है साथ ही बीजेपी का पिछले 4 चुनाव में यहां से जीतते आई है. ऐसे में एक बार फिर से कुसुम देवी के जीत की उम्मीद की जा रही है.

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गोपालगंज विधानसभा की पिछले चार चुनाव की स्थिति को अगर हम देखें तो यहां पर बीजेपी का दबदवा रहा है. साल 2005 से 2020 तक लगातार बीजेपी का कमल खिलता रहा है. साल 2020 के विधानसभा चुनाव में सुभाष सिंह ने बसपा के उम्मीदवार साधु यादव को 36 हजार वोटों के बड़े अंतर से हराया था. महागठबंधन की तरफ से यह सीट कांग्रेस के पास गई थी और उनके उम्मीदवार थे आसिफ गफूर जिन्हें मात्र 36 हजार मत ही मिले थे. पिछले चार चुनाव से भले ही बीजेपी गोपालगंज में अजेय रही है लेकिन इस विधानसभा में राजद को कमजोर न समझा जाए क्योंकि साल 2005 से पहले यह सीट राजद के पास ही थी. बता दें कि साल 1995 में राम अवतार यहां से विधायक तो वहीं साल 2000 में यहां से साधु यादव जीतने में सफर रहे थे. हालांकि इन दिनों साधु यादव और लालू परिवार से संबंध अच्छे नहीं हैं. साल 2005 के फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव में भी इस सीट पर राजद के रेयाजुल हक राजु जीतने में सफल रहे थे. बता दें कि साल 1995 में राम अवतार यहां से विधायक तो वहीं साल 2000 में यहां से साधु यादव जीतने में सफर रहे थे. हालांकि इन दिनों साधु यादव और लालू परिवार से संबंध अच्छे नहीं हैं. साल 2005 के फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव में भी इस सीट पर राजद के रेयाजुल हक राजु जीतने में सफल रहे थे. अगर 1995 से पहले की बात करें तो इस विधानसभा में पहले कांग्रेस का दवदबा था.

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महागठबंधन के उम्मीदवारों की बात करें तो वे पेशे से सोनाचांदी के व्यवसायी हैं. जेपी आंदोलन के समय उन्होंने छात्र राजनीतिक से अपने करियर की शुरुआत की थी. वे लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के काफी करीबी माने जाते हैं. यह भी कहा जा रहा था कि पिछले विधानसभा चुनाव में गोपालगंज से वे दावेदार थे लेकिन यह सीट कांग्रेस के खाते में चली जिसकी वजह से मोहन प्रसाद गुप्ता चुनाव नहीं लड़ पाए थे. अब उपचुवाव में राजद ने इनपर भरोसा जताया है.

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इस विधानसभा उप चुनाव में तेजस्वी यादव की मामी चुनाव मैदान में उतर गई है. बता दें कि साधु यादव पिछले विधानसभा चुनाव में सुभाष सिंह से चुनाव हार गए थे ऐसे में उन्होंने इस बार अपनी पत्नी इंदिरा देवी को चुनाव मैदान में उतारा है. कहा तो यह भी जा रहा है कि साधु यादव के चुनाव मैदान में आ जाने से राजद गोपालगंज में चुनाव मैदान में उतरा है. गोपालगंज विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी, राजद, बसपा के साथ ही अब AIMIM चुनाव मैदान में उतर गई है. ऐसे में अब कहा जा रहा है कि गोपालगंज में होने वाला यह उपचुनाव काफी रोमांचक होने वाला है.

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