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भारतीय टीम ने वैसे तो विश्व क्रिकेट को कई असाधारण खिलाड़ी दिए, जिन्होंने अपने खेल से पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध किया. सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, अनिल कुंबले ये वो नाम हैं , जो विश्व क्रिकेट के क्षितिज पर हमेशा चमकता रहेगा. कप्तानों की बात हो, तो कपिल देव और महेंद्र सिंह धोनी हैं, जिन्होंने भारत को विश्व चैंपियन बनाया लेकिन एक ऐसा भी कप्तान हुआ, जिसने भारतीय क्रिकेट को हमेशा के लिए बदल दिया. इनकी कप्तानी में भले ही भारतीय टीम विश्व कप नहीं जीत सकी लेकिन इन्होंने भारतीय टीम को लड़ना सिखाया. इस कप्तान ने भारतीय खिलाड़ियों में नया जोश भरा, और बताया कि जब तक आखिरी गेंद फेंकी नहीं जाती तब तक खेल का फैसला नहीं हो सकता.

आज के सेगमेंट में बात भारत के महान बल्लेबाज और कप्तान सौरव गांगुली की. दादा, महाराजा, बंगाल टाइगर, द वारियर प्रिंस और ऑफ साइड के भगवान, ये सब गांगुली के उपनाम हैं. आज हम आपको भारत दिग्गज सौरव गांगुली के जीवन और क्रिकेट से जुड़ी कुछ अनकही बात बताएंगे.

फुटबॉल था पसंदीदा खेल 

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8 जुलाई, 1972 को कोलकाता के बेहाला में चंडीदास गांगुली और निरूपा गांगुली के घर एक बच्चे का जन्म हुआ जिसका नाम सौरव रखा गया. चंडीदास शहर के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक थे, जिनका खुद का फलाफुला प्रिंट बिज़नस का कारोबार था. उस वक्त कोलकाता में क्रिकेट का उतना चलन नहीं था इसलिए गांगुली ने शुरुआत के दिनों में फुटबॉल खेलना शुरू किया. गांगुली की मां उनके खेल के खिलाफ थी, वो नहीं चाहती थी कि उनका बेटा किसी भी स्पोर्ट को अपना करियर बनाए. उस वक्त सौरव गांगुली के बड़े भाई स्नेहाशीष गांगुली ने खुद को एक क्रिकेटर के रूप में स्थापित कर लिया था. बड़े भाई ने गांगुली के क्रिकेटर बनने के सपने का समर्थन किया और अपने पिता को गर्मी की छुट्टियों के दौरान गांगुली को क्रिकेट कोचिंग कैंप में दाखिला दिलाने के लिए राजी कर लिया. और क्रिकेट अकैडमी में गांगुली के बैटिंग प्रतिभा की पहचान हुई. गांगुली ने अपने बड़े भाई के साथ क्रिकेट सीखना जारी रखा और दाएं हाथ के गांगुली बाएं हाथ के बल्लेबाज बन गए. इसके पीछे भी एक मजेदार थ्योरी है. दरअसल गांगुली के बड़े भाई स्नेहाशीष एक लेफ्टी थे और इसलिए उनके स्पोर्टिंग इक्विपमेंट को यूज करने के लिए गांगुली भी एक बाएं हाथ के बल्लेबाज बन गए. अंडर-15 में खेलते हुए गांगुली ने ओडिशा के खिलाफ शतक ठोक दिया और इसके बाद उनको सेंट जेवियर स्कूल क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया.

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साल 1989 में बंगाल की टीम में उनका चयन हो गया लेकिन संयोग देखिए उसी साल उनके भाई को ड्रॉप कर दिया गया. लेकिन बाएं हाथ के बल्लेबाज गांगुली रणजी ट्रॉफी सीजन 1990-91 सीजन में शानदार प्रदर्शन के बाद लाइमलाइट में आ गए.

अंतराष्ट्रीय डेब्यू

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इसके बाद साल 1992 में सौरव गांगुली ने अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया. वेस्टइंडीज के खिलाफ ब्रिसबेन में अपने पहले वनडे मैच में गांगुली नंबर-6 पर बल्लेबाजी करने आए और सिर्फ 3 रन बनाकर आउट हो गए. इसके बाद उनको तुरंत ड्रॉप कर दिया गया लेकिन सिर्फ खराब प्रदर्शन ही इसका कारण नहीं था बल्कि गांगुली का व्यव्हार. गांगुली को अहंकारीमाना जाता था और खेल के प्रति उनके रवैये पर खुले तौर पर सवाल उठाया गया था. यह भी अफवाह थी कि सौरव गांगुली ने अपने साथियों के लिए पानी आदि ले जाने से इनकार कर दिया, यह टिप्पणी करते हुए कि ऐसा करना उनका काम नहीं है. नतीजतन, उन्हें टीम से हटा दिया गया था. हालांकि बाद में गांगुली ने इन सब बातों से इनकार कर दिया था.

इंटरनेशनल टीम से ड्रॉप होने के बाद गांगुली ने डोमेस्टिक क्रिकेट में वापसी की और वहां कड़ी मेहनत की. 93, 94 और 95 का रणजी सीजन में गांगुली ने खूब सारे रन बनाए. 1995-96 दलीप ट्रॉफी में गांगुली के 171 रनों की पारी के बाद उनको इंटरनेशनल टीम से वापस बुलावा आया. साल 1996 में भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर जा रही थी, और गांगुली का चयन टीम में हो गया. लेकिन सिर्फ 1 वनडे खेलने के बाद पहले टेस्ट के लिए टीम से बाहर कर दिया गया. बाद में, तत्कालीन कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन द्वारा दुर्व्यवहार के कारण नवजोत सिंह सिद्धू ने इंग्लैंड का दौरा छोड़ दिया.

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इसलिए सौरव गांगुली को टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिल गया. सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच में, जो कि ऐतिहासिक लॉर्ड्स के मैदान में खेला गया था, गांगुली ने अपना टेस्ट डेब्यू किया. आपको जानकर हैरानी होगी कि उसी टेस्ट में राहुल द्रविड़ भी अपना डेब्यू कर रहे थे. दोनों ने अपने डब्यू पर शानदार पारी खेली. गांगुली ने 131 रनों की पारी खेली जबकि द्रविड़ ने 95 रन बनाए. इसके बाद ट्रेंटब्रिज में खेले गए दूसरे टेस्ट में भी गांगुली ने 136 रन ठोक दिए और लगातार 2 इन्न्निंग्स में शतक जड़ने वाले वो विश्व के तीसरे बल्लेबाज बन गए. गांगुली की बेदाग़ टाइमिंग को देखते हुए उनको ऑफ साइड का देवताकहा जाने लगा. सचिन तेंदुलकर के साथ उनकी 255 रनों की साझेदारी तब भारत से बाहर किसी विकेट के लिए सर्वश्रेष्ठ साझेदारी बनी.

कप्तानी का युग

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साल 2000 आया, और गांगुली को भारतीय टीम का कप्तान नियुक्त किया गया. उस वक्त भारतीय क्रिकेट और टीम मैचफिक्सिंग के काले साए से निकलने की कोशिश कर रही थी. टीम के कप्तान अजहरुद्दीन समेट कुछ अन्य खिलाड़ियों पर मैचफिक्सिंग के आरोप लगने से भारतीय क्रिकेट को भयंकर क्षति पहुंची थी ऐसे में नए कप्तान गांगुली के लिए चुनौती बड़ी थी. दरअसल उस वक्त भारतीय टीम के कप्तान सचिन तेंदुलकर थे और गांगुली उपकप्तान लेकिन खराब स्वास्थ के चलते सचिन ने कप्तानी छोड़ने का फैसला किया और गांगुली तब कप्तान बने. गांगुली ने बतौर कप्तान गजब शुरुआत की और अपनी कप्तानी में दक्षिण अफ्रीका को वनडे सीरीज हराया और भारतीय टीम को साल 2000 में ICC नॉकआउट ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचाया, जहां न्यूजीलैंड से मेन इन ब्लू को हार का सामना करना पड़ा था.

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फिर एक और सीरीज आया, जो गांगुली के लिए गेमचेंजर साबित हुआ. उस वक्त ऑस्ट्रेलियाई टीम चैंपियन थी और उनको हराना किसी सपने से कम नहीं था. लेकिन गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम ने साल 2001 में ऑस्ट्रेलिया के 16 टेस्ट जीत के स्ट्रीक को तोड़ा था.

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और फिर नेटवेस्ट सीरीज को कोई भूल सकता है क्या, जब गांगुली ने लॉर्ड्स की बालकनी में अपने जेर्सी को लहराया था. यह गांगुली का बदला था. दरअसल इससे पहले इंग्लैंड के एंड्रू फ़्लिंटॉफ़ ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में जीत के बाद अपनी टीशर्ट उतार दी थी और ग्राउंड पर जश्न मनाया था.

इसके बाद गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम वर्ल्ड कप 2003 के फाइनल तक पहुंची लेकिन ऑस्ट्रेलिया से हार का सामना करना पड़ा. 1983 के बाद यह पहला मौका था जब टीम इंडिया विश्व कप का फाइनल खेल रही थी. गांगुली ने पूरे टूर्नामेंट में 58.12 की औसत से 465 रन बनाए थे.

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साल 2004 आतेआते बतौर कप्तान गांगुली ने सफलता के नए मुकाम हासिल किए और मीडिया ने उनको भारत के सफलतम कप्तान का तगमा दिया. लेकिन उनकी कप्तानी के दौरान, उनका व्यक्तिगत प्रदर्शन विशेष रूप से विश्व कप, 2003 में ऑस्ट्रेलिया के दौरे और 2004 में पाकिस्तान श्रृंखला के बाद बिगड़ गया. 1969 के बाद पहली बार ऑस्ट्रेलिया ने भारत में टेस्ट सीरीज जीती.

गांगुली-चैपल प्रकरण 

2004 और 2005 में खराब फॉर्म के कारण, सौरव गांगुली को अक्टूबर 2005 में टीम से बाहर कर दिया गया था. कैपटैंसी को उनके पूर्व डिप्टी राहुल द्रविड़ को दिया गया था.

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दरअसल, सितंबर, 2005 में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व खिलाड़ी ग्रेग चैपल टीम इंडिया के हेड कोच बने. जिसके बाद सौरव गांगुली के साथ ग्रेग चैपल का विवाद कई सुर्खियों में रहा. ग्रेग चैपल ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को ईमेल किया था कि गांगुली भारत का नेतृत्व करने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप सेअयोग्य थे और उनका फूट डालो और राज करोव्यवहार भारतीय टीम को नुकसान पहुंचा रहा था. नतीजतन, बोर्ड ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की और दोनों को एक टीम के रूप में काम करने के लिए एक साथ लाने का प्रयास किया. लेकिन खराब प्रदर्शन और कोच के साथ विवादों के कारण सौरव गांगुली को कप्तानी से हटा दिया गया और टीम से भी बाहर कर दिया गया. इसलिए टीम का नेतृत्व करने के लिए राहुल द्रविड़ को कप्तान चुना गया.

इसके बाद गांगुली ने एक बार फिर डोमेस्टिक क्रिकेट का रुख किया और वहां शानदार प्रदर्शन जारी रखा. 10 महीनों के बाद दक्षिण अफ्रीका जाने वाली भारतीय टीम में गांगुली की वापसी हुई. गांगुली ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में 51 रन बनाए, भारत ने वह टेस्ट जीता और गांगुली का प्रदर्शन सराहनीय था. फिर उनको वनडे टीम में चुना गया और गांगुली ने प्रभावी प्रदर्शन के दम पर 2007 वर्ल्ड कप टीम में जगह बना ली. यह वर्ल्ड कप भारत के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा था, जहां टीम बांग्लादेश से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी.

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बाद के चरणों में, उन्होंने सभी प्रारूपों में अच्छा प्रदर्शन किया और 2007 में पाकिस्तान के खिलाफ पहले टेस्ट में दोहरा शतक बनाया. लगातार, वह अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे और एक फॉर्म में रहने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला कर लिया. उन्होंने 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक टेस्ट श्रृंखला में 4 टेस्ट मैचों में 54 की औसत से 324 रन बनाने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया.

गांगुली का IPL करियर

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2008 में, वह इंडियन प्रीमियर लीग यानी IPL के उद्घाटन संस्करण में आइकन खिलाड़ियों में से एक थे. वह बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान के स्वामित्व वाली फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान थे. टेलीविज़न चैनल ज़ी बांग्ला ने उन्हें दादागिरी अनलिमिटेड नामक रियलिटी क्विज़ शो के होस्ट के रूप में भी नियुक्त किया. इसमें पश्चिम बंगाल के 19 जिलों के प्रतिभागियों का प्रतिनिधित्व किया गया, जिन्हें सौरव गांगुली द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देना था. उन्हें CAB की क्रिकेट विकास समिति का अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया था. अक्टूबर 2009 में, उन्होंने बंगाल टीम में रणजी कप भी खेला. 2009 में केकेआर का नेतृत्व करने के लिए ब्रेंडन मैकुलम को चुना गया था. सौरव गांगुली ने 2010 में केकेआर के कप्तान के रूप में वापसी की.

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2011 में, उन्हें पुणे वारियर्स इंडिया द्वारा हस्ताक्षरित किया गया था. उन्होंने उनके लिए दो सीजन खेले और फिर आईपीएल से संन्यास ले लिया. उन्होंने 29 अक्टूबर, 2012 को आईपीएल से संन्यास की घोषणा की और अगले साल के आईपीएल में नहीं खेलने और खेल से संन्यास लेने का फैसला किया. संन्यास के बाद सौरव गांगुली क्रिकेट के विकास में सक्रिय रहे हैं.

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साल 2019 में गांगुली को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. गांगुली ने अध्यक्ष बनने के बाद भारतीय क्रिकेट के लिए अभूतपूर्व कार्य किए. उन्होंने घरेलु खिलाड़ियों के आर्थिक स्थिति को सुधारने की दिशा में काम किया. उन्होंने घरेलु खिलाड़ियों के सैलरी को बढ़ाया. इसके अलावा गांगुली के अध्यक्ष रहते IPL मीडिया राइट्स सबसे महंगे बिके.

गांगुली ने Rahul Dravid को टीम इंडिया का कोच और VVS Laxman को नेशनल क्रिकेट एकेडमी(NCA) का अध्यक्ष बनाया.

निजी जीवन

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अब बात करते हैं गांगुली के निजी जीवन के बारे में. गांगुली की शादी के किस्से किसी फ़िल्मी सीन से कम नहीं है. गांगुली साल 1997 में अपने बचपन की दोस्त डोना रॉय के साथ भाग गए क्योंकि उनके परिवार वाले इस शादी के लिए राजी नहीं थे. घटना से दोनों परिवार परेशान थे और बाद में सुलह हो गई.

फरवरी 1997 में, जोड़े ने शादी कर ली. शादी के बाद वह एकदिवसीय क्रिकेट में एक अद्भुत क्रिकेटर के रूप में विकसित हुए. श्रीलंका के खिलाफ वनडे टन में, उन्होंने अपना पहला स्कोर बनाया और फिर लगातार मैन ऑफ द मैच पुरस्कार जीते. उन्होंने 1999 विश्व कप में भी भाग लिया और श्रीलंका के खिलाफ 183 रन बनाए. यह सौरव गांगुली का वनडे क्रिकेट का सर्वोच्च स्कोर था. दंपति की एक बेटी सना गांगुली है जो नवंबर 2001 में पैदा हुई थी.

सौरव गांगुली द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड 

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1. सौरव गांगुली विदेशों में सबसे सफल टेस्ट कप्तान थे और वह लंबे समय तक बने रहे. उन्होंने 28 मैचों में कप्तानी की और इनमें से 11 में भारतीय टीम ने जीत हासिल की थी. अब इस रिकॉर्ड को विराट कोहली ने अगस्त 2019 में तोड़ा है.

2. एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में, वह लगातार चार बार मैन ऑफ द मैच पुरस्कार जीतने वाले एकमात्र क्रिकेटर हैं.

3. वनडे में वह सबसे तेज 9,000 रन बनाने वाले बल्लेबाज थे, हालांकि उनका रिकॉर्ड 2017 में दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स ने तोड़ा था.

4. वह एकदिवसीय क्रिकेट में 10,000 रन, 100 विकेट और 100 कैच लेने की अनूठी उपलब्धि हासिल करने वाले पांच क्रिकेटरों में से एक हैं.

5. दुनिया के 9 क्रिकेटरों में से एक गांगुली ने एक ही मैच में शतक लगाया है और 4 विकेट लिए हैं.

6. इसके अलावा वह दुनिया के उन बारह क्रिकेटरों में भी शामिल हैं जिन्होंने एक ही मैच में अर्धशतक और 5 विकेट लिए हैं.

7. आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के इतिहास में वह तीन शतक लगाने वाले पहले खिलाड़ी हैं.

8. आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में किसी भी बल्लेबाज द्वारा सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर (117) का रिकॉर्ड सौरव गांगुली के नाम है.

9. वह दुनिया के उन 14 क्रिकेटरों में से एक हैं जिन्होंने 100 या अधिक टेस्ट और 300 या अधिक वनडे खेले हैं.

पुरस्कार और सम्मान 

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खेल के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है. गांगुली को स्पोर्ट्स स्टार पर्सन ऑफ द ईयर, अर्जुन अवार्ड, सिएट इंडियन कैप्टन ऑफ द ईयर, पद्म श्री 2004, राममोहन रॉय अवार्ड हैं. उन्होंने 31 वनडे मैन ऑफ द मैच पुरस्कार अर्जित किए. उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 6 मैन ऑफ द मैच पुरस्कार हासिल किए.

20 मई 2013 को, पश्चिम बंगाल सरकार ने सौरव गांगुली को बंगा विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया.

गांगुली का नाता कई विवादों से भी रहा

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अभिमानी होने के लिए उनकी अक्सर आलोचना की जाती थी और देशी क्रिकेट में उनके कार्यकाल के दौरान उन्हें राजसी व्यवहारके साथ टैग किया गया था.

– 2001 में भारतऑस्ट्रेलिया श्रृंखला में, वो हर मैच में टॉस के लिए देरी से आए.

एक अंपायर के फैसले पर असहमति जताने के लिए सौरव गांगुली पर तीन मैचों का प्रतिबंध लगाया गया था.

वह 2005 में भारतीय क्रिकेट टीम के तत्कालीन कोच ग्रेग चैपल के साथ एक विवाद में शामिल थे, और बाद में उन्हें कप्तान के रूप में बर्खास्त कर दिया गया था.

तो ये थी भारत के महान खिलाड़ी सौरव गांगुली की कहानी, आप गांगुली की कप्तानी को 10 में से कितने अंक देंगे ? कमेंट में बताएं.

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