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Electricity in bihar: बिहार में बिजली महंगी या सस्ती, ऊर्जा मंत्री ने दिया सरकारी अनुदान का हवाला

बिहार में बिजली महंगी या सस्ती

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Eletricity in Bihar: राज्य के ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री (Minister of Energy, Planning and Development) बिजेंद्र प्रसाद यादव ने विपक्षों के आरोप को बिना किसी आधार का बताया है. असल में, विपक्ष ने मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव पर यह आरोप लगाया था कि बिहार के पड़ोसी राज्यों की अपेक्षा में बिहार की जनता को बिजली महंगी प्रदान की जा रही है. इस आरोप पर ऊर्जा मंत्री ने पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार द्वारा दिए गये अनुदान (Grant) का हवाला देते हुए कहा कि पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश और बंगाल की तुलना में बिहार की जनता को सरकार सस्ती बिजली उपलब्ध करा रही है. बिजली मुहैया कराने में सरकार हर साल ही करोड़ों रूपए का अनुदान खर्च करती है. साथ में मंत्री ने यह भी कहा कि आरोप लगाने से पहले विपक्षी नेता को सच जानने के लिए थोड़ी जांच पड़ताल कर लेनी चाहिए थी.

योजना के तहत अनुदान

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ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने यह भी बताया कि राज्य सरकार बिजली कंपनी को मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना के तहत अनुदान देती है. तभी यहां राज्य में सस्ती बिजली मिल रही है. बिहार में कुल उपभोक्ताओं में से क़रीब 28 प्रतिशत बीपीएल के उपभोक्ता मौजूद है जिनको 1.97 रूपए प्रति यूनिट बिजली दी जा रही है. ग्रामीण घरेलु उपभोक्ताओं की संख्या 44 प्रतिशत है जिन्हें 2.45 रूपए प्रति यूनिट बिजली मिल रही है. वहीं, शहर के घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या 15 प्रतिशत हैं, इन्हें 4.12 रूपए प्रति यूनिट बिजली उपलब्ध करायी जा रही है. ग्रामीण व्यावसायिक उपभोक्ताओं को 3.35 रूपए प्रति यूनिट बिजली दी जा रही है. शहर के व्यावसायिक उपभोक्ताओं को 5.67 रूपए प्रति यूनिट बिजली उपलब्ध करायी जा रही है. मंत्री ने यह भी बताया कि किसानों को सिर्फ़ 55 पैसे ही प्रति यूनिट पर बिजली मिल रही है. औद्योगिक उपभोक्ताओं (industrial consumers) में छोटी श्रेणी वाले उपभोक्ताओं को 6.02 रूपए प्रति यूनिट बिजली मिल रही है. हर घर नल का जल योजना के अंतर्गत आने वाले उपभोक्ताओं को 2.45 रूपए प्रति यूनिट बिजली दी जा रही है. बड़े औद्योगिक व्यावसायिक उपभोक्ताओं को 6.30 रूपए प्रति यूनिट बिजली मिल रही है और लोहा उद्योग वाले उपभोक्ताओं को 3.86 रूपए प्रति यूनिट बिजली उपलब्ध करायी जा रही है.

मंत्री ने आकड़ों की उधेरी बखिया

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अनुदान के हवाले से ऊर्जा मंत्री ने पूरे आंकड़ें की बखिया ही उधेर कर रख दी. ऊर्जा मंत्री ने अनुदान का हवाला देते हुए बताया कि वित्तीय (financial) वर्ष 2013-14 में सरकार द्वारा 2656 करोड़ रूपए खर्च किये गए थे, तो वहीं वित्तीय वर्ष 2014-15 में 2848 करोड़ रूपए अनुदान में खर्च किये गए थे. वित्तीय वर्ष 2015-16 में 4390 करोड़ रूपए खर्च किये गए थे. वर्ष 2016-17 में 3834 करोड़ रूपए खर्च किये थे. वर्ष 2017-18 में 2505 करोड़ रूपए खर्च किये गए थे. हालांकि, वर्ष 2018-19 में 5070 करोड़ रूपए खर्च किये गए थे, वर्ष 2019-20 में 5193 करोड़ रूपए अनुदान में खर्च किये गए थे, वर्ष 2020-21 में 5494 करोड़ रूपए खर्च हुए, वर्ष 2021-22 में 6578 करोड़ रूपए खर्च हुए, वर्ष 2022-23 में 7801 करोड़ रूपए खर्च हुए थे, वर्ष 2023-24 में 13 हज़ार 114 करोड़ रूपए अनुदान के रूप में खर्च किये गए थे. फ़िलहाल वर्तमान वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 15 हज़ार 343 करोड़ रूपए अनुदान के रूप में मंज़ूर कर लिए गए हैं.

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