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नवरात्रि में माता रानी के नौ रूप की पूजा की जाती है. इस दौरान आदिशक्ति की पूजा की जाती है. भारतीय परंपरा में कुमारियों को मां का साक्षात स्वरूप माना गया है. इसीलिए कन्या पूजन के बिना नवरात्रि व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता है. आपको बता दें कि कन्या पूजना नवमी के दिन किया जाता है. कई लोग कन्या का पूजन अष्टमी को भी करते हैं. कहा जाता है कि कन्या पूजन से मां बहुत प्रसन्न होती है. और मनोकमानएं पूरी करती है. कन्या पूजन को लेकर देवी पुराण में कहा गया है कि मां को जितनी प्रसन्नता कन्या भोज से मिलती है, उनको उतनी प्रसन्नता किसी और चीज से नहीं मिलती है. कर्मकांड के जानकार बताते हैं कि कन्या पूजन को बहुत फलदायी माना जाता है. ज्योतिष के जानकार ये बताते हैं कि बुध ग्रह आपकी कुंडली में अगर बुरा फल दे रहा है तो आपको कन्या पूजन करना चाहिए.

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शास्त्रों की माने तो दो से दस साल तक की कन्याओं का पूजन करना चाहिए. नौ कन्याओं का पूजन सबसे अच्छा माना जाता है. धर्म के जानकार भी यह बताते हैं कि संख्या के आधार पर अगर कन्या का पूजन किया जाता है तो उन्हें फल मिलता है. यानी की हर कन्या के पूजन का अलग अलग फल मिलता है. कहा जाता है कि एक कन्या के पूजन से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है तो वहीं दो कन्याओं के भोज से मोक्ष की प्राप्ति होती है वहीं तीन कन्याओं के पूजन से धर्म, अर्थ व काम की प्राप्ति होती है तो वहीं चार कन्याओं के पूजन से राजपद मिलता है. जबकि पांच कन्या के पूजन से विद्या की प्राप्ति होती है तो वहीं छह कन्याओं की पूजा से छह प्रकार की सिद्धियां मिलती है. सात कन्याओं की पूजा से सौभाग्य की प्राप्ति होती है तो वहीं आठ कन्याओं की पूजा से सुखसंपदा की प्राप्ति होती है. जबकि नौ कन्या की पूजा करने से संसार में आपका प्रभुत्व बढ़ता ही जाता है. इसीलिए कहा जाता है कि 2 साल से 10 साल तक की कुमारी कन्याओं को निमंत्रित कर उनका भोजन करवाना चाहिए.

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नवमी की दिन सुबह सुबह स्थान ध्यान कर मां की उपासना करें. उसके बाद खीर, पूरी, हलवा आदि बनाएं और मां को भोग लगाएं. इसके बाद आप कन्याओं को आमंत्रित करें. जब ये कन्याएं आपके घर में प्रवेश करें तो आप इनकी जितनी सेवा हो सके वे करें आते समय आप पुष्पवर्षा करें साथ हीं माता रानी का जयकारा भी लगाएं. घर में प्रवेश करने के बाद उनका पैर धोएं और साफ आसन पर बिठाएं. इसके बाद उन्हें टीका लगाएं.इसके बाद उनको रक्षा सूत्र बांधें. इसके बाद उन्हें पहले मां का भोग लगाया हुआ भोजन करवाएं. आप नौ कन्या के साथ एक छोटे से बालक का भी भोजन करवा सकते हैं. जिसे हमलोग भैरवनाथ के रूप में जानते हैं. भोजन करने के बाद आप अपने सामर्थ के अनुसार उन्हें दक्षिणा स्वरुप में कुछ दें साथ ही उनका पैर छूकर आशीर्वाद जरूर लें. उसके बाद अब आप भोजन ग्रहण कर सकते हैं.

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