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पटना जिले में फतुहा और धनरुआ अंचल में जमीन का अधिग्रहण आमसदरभंगा फोर लेन के निर्माण के लिए किया जाना है. बता दें की दोनों अंचलों के सीओ के अलावे DCLR जमीन अधिग्रहण में तेजी लाने को लेकर मामले के निबटारे में लगे हुए हैं. खास कर एलायनमेंट वाले हिस्से में जिन किसानों की जमीन आ रही है उन जमीन के कागजातों को तैयार किया जा रहा है. ताकि मुआवजे का वितरण किसानों के बीच आसानी से हो सके. डीएम के निर्देश के बाद जमीन अधिग्रहण वाले मामले में अधिकारी रूचि दिखा रहें हैं. साथ हीं साथ 29.82 एकड़ सरकारी जमीन की रिपोर्ट भी फतुहा और धनरुआ प्रखंड की तैयार हो रही है.

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बताते चलें की धनरुआ अंचल के अंतर्गत 35 खेसरा आते हैं वहीँ फतुआ अंचल के अंतर्गत 39 खेसरा आते हैं. DCLR और सीओ से डीएम ने रिपोर्ट भी मांगी है. सरकारी जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया रिपोर्ट तैयार होने के बाद शुरू हो जाएगी. मीडिया में चल रही ख़बरों के अनुसार आधिकारिक सूत्र द्वारा बताया गया है की यह मामला अभी अंडर प्रोसेस है. अभी जमीन का अधिग्रहण फतुहा के चार गांवों में होना है. इन चार गांवों में रबिया चक, वाजितपुर, जैतिया और भेरगामा शामिल है. मिली जानकारी के अनुसार मुआवजा दर कमर्शियल रेट पर मिलना चाहिए इस बात का दावा इन गांवों के किसानों द्वारा किया जा रहा है.

मीडिया में चल रही ख़बरों के मुताबिक आधिकारिक सूत्रों द्वारा यह बताया गया है की ग्रीनफ़ील्ड में हीं फोरलेन का निर्माण किया जाना है. यानी अधिग्रहण की गयी जमीन खेती योग्य है. बिहार सरकार द्वारा निर्धारित MVR के आधार पर भारतीय राष्ट्रिय राजमार्ग प्राधिकरण यानि NHAI की तरफ से जमीन का दर निर्धारित किया गया है. गांव में शिविर लगा कर जमीन के कागजात दुरुस्त कराने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है. सीओ को इस बात का निर्देश दिया गया है की वे राजस्व रसीद तथा खेसरावार भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र की समस्या को दूर करें. फतुआ में जमीन का दर निर्धारित है. इसलिए मुआवजे की राशी निर्धारित दर से हीं मिलेगी. साथ हीं साथ जल्द हीं परियोजना का कार्य शुरू किया जाएगा.

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जानकारी के अनुसार बिहार के आठ जिलों से होते हुए यह एक्सप्रेसवे असम तक जाएगा. इन 8 जिलों में औरंगाबाद, नालंदा, पटना, अरवल, वैशाली, दरभंगा, जहानाबाद और समस्तीपुर शामिल है. आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे की लंबाई 189 किलोमीटर तक होगी. बताते चलें की 4 फेज में इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जाना है. जिसमे से दो फेज के टेंडर को जारी भी किया जा चूका है और दो फेज के टेंडर के लिए प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है. इस एक्सप्रेस वे को बनाने की प्लानिंग साल 2024 तक की है. उत्तरी बिहार और दक्षिणी बिहार के बीच की आवाजाही इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से आसान हो जाएगी. साथ हीं साथ चार घंटे तक की दूरी भी कम हो जाएगी. बता दें की इस प्रोजेक्ट का निर्माण भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा है. जितने भी एक्सप्रेस वे के निर्माण को मंजूरी अब तक बिहार में हुई है वो सभी एक्सप्रेस वे दूसरे राज्यों से होकर गुजरते हैं. लेकिन यह ऐसा पहला प्रोजेक्ट है जो बिहार के आठ जिलों से होकर गुजरेगी. जो औरंगाबाद से शुरू होकर दरभंगा तक जाएगी.

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