collageX X2023 01 05T192251.904X

जहाज परिचालन की गतिविधियाँ इन दिनों गंगा नदी में एक बार फिर से शुरू हो चूकी हैं. मार्च महीने तक पर्यटकों के कई जहाजों की आवाजाही भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के मुताबिक कोलकाता और वाराणसी के बीच से होगी. गंगा विलास नाम का अत्याधुनिक क्रूज़ पिछले सप्ताह कहलगांव और सुल्तानगंज विदेशी पर्यटकों को लेकर पहुंचा था. लेकिन क्रुज़ के पहुँचने के बाद क्रूज़ परिचालन करने वाली टीम को इसे किनारे करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. दरअसल कलगांव, भागलपुर और सुल्तानगंज में मिनी पोर्ट या जेटी के निर्माण नहीं होने के कारण इस तरह की समस्या होती है. ऐसे में मिनी पोर्ट के नहीं होने के कारण पर्यटकों के जहाज बीच नदी में ही रह जाते हैं और पर्यटकों को तट तक लाने के लिए किसी छोटे नाव का सहारा लेना पड़ता है. इन समस्याओं को देखते हुए मिनी पोर्ट और जेटी का निर्माण किया जायेगा. आपको बता दें की इस बात की जानकारी जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा मिली है. उनके मुताबिक कहलगांव और सुल्तानगंज में मिनी पोर्ट और एक सामुदायिक जेटी का निर्माण किया जाना है. साथ ही साथ भागलपुर में भी टूरिस्ट जेटी का निर्माण किया जायेगा.

1010218 mahabaahu cruise boat

आइये अब हम अपने चर्चा के बीच जानते है की जेटी के निर्माण के लिए राशी आवंटन के बारे में. दरअसल मिली जानकारी के अनुसार भागलपुर में प्रस्तावित हुई जेटी के लिए राशी का आवंटन तो हो चूका है. लेकिन भागलपुर, सुल्तानगंज और कहलगांव में गंगा नदी के किनारे जमींन नहीं मिल पा रहा. इसी वजह से राज्य सरकार को प्राधिकरण की तरफ से जमींन की मांग को लेकर प्रस्ताव भेजा गया है. जमींन उपलब्ध नहीं होने के कारण बिहार के भागलपुर में तीन मिनी पोर्ट का निर्माण कार्य अटका हुआ है. लेकिन आपको बता दें की कुछ समय पहले टर्मिनल के लिए एक जमींन की तलाश की गयी थी तो कही और जमींन नहीं मिलने की स्थिति में उसी हिस्से में कम्युनिटी जेटी बनाने की संभावना है. हालाँकि एक पब्लिक स्कूल के पीछे से सबौर के बीच गंगा किनारे भी एक जगह को चिन्हित किया गया है. इस जगह पर भी पर भी कम्युनिटी जेटी के लिए पर्याप्त जगह है. प्राधिकरण द्वारा यहाँ पर भी जमींन चिन्हित करने के बाद प्रस्ताव को मंत्रालय भेजने की तैयारी में है.

bea896ce0727c5f4bbce47e68374d383

यदि कम्युनिटी जेटी का निर्माण हो जाता है तो यहाँ कई रोजगार के रास्ते खुल जायेंगे. इनके निर्माण से बड़ेबड़े मालवाहक चलने की भी सम्भावना हो सकती है. साथ ही साथ वैसे जहाज जो 200 टन क्षमता के हैं वे भी चल सकेंगे. आपको बता दें की इस 200 टन क्षमता वाले जहाज पर लगभग 200 लोग सवार हो सकते हैं. इसके अलावे चारपहिया, दो पहिया और तो और ट्रक जैसे वाहन को भी लोड किया जा सकता है. गंगा नदी में गाद की समस्या भी होती है. ऐसे में मालवाहक या 200 टन क्षमता वाले जहाजों का आवगमन इस गंगा रुट में होता है तो गाद के वजह से परेशानी बढ़ सकती है. आवागमन के लिए गंगा रूट में कोई परेशानी ना हो इसके लिए गंगा नदी से गाद हटाने की पहल की जा रही है. अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की तरफ से यह जानकारी मिली है की गाद को हटाने का काम नियमित रूप से चलता रहेगा.

गंगा नदी से यदि लोकल सर्विस सेवा शुरू हो जाती है तो मालवाहक जहाज चलने लगते हैं तो सड़कों पर जाम से भी राहत मिलेगी. चुकी गंगा रूट से आवागमन की सेवा शुरू नहीं होने के कारण हर तरह के वाहनों का दबाव सड़कों पर होता है. यदि हमारे पास नदी के रास्ते का भी विकल्प हो जाता है तो सडको पर अधिक दबाव और जाम जैसी समस्या से राहत मिल जाएगी.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *