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लोकसभा चुनाव को लेकर बिहार में सियासत तेज हो गई है. बिहार में इन दिनों एक तरफ जहां विपक्ष सरकार पर हमलावर हैं तो वहीं दूसरी तरफ केंद्र की सियासत कोहिलाने के लिए विपक्षी एकजुटतका का केंद्र बिंदु बिहार बना हुआ है. ऐसे में बिहार में आये दिन उठापटक जैसे हालात बने हुए हैं. बिहार में जिस तरह से पिछले दिनों विपक्षी एकता की बैठक हुई उसके बाद अब एनडीए में भी बैठकों का दौर शुरू हुआ है. बीजेपी ने साफ तौर पर कह दिया है कि एनडिए की बैठकों में हर छोटी बड़ी पार्टियों को बुलाया जाएगा जो हमारी विचारधारा से आते हैं. ऐसे में बिहार के साथ ही देश के अलग अलग राज्यो में NDA के जो साझेदार हैं उन्हें बीजेपी बैठक में बुलाने जा रही है. साथ हीयह भी कहा जा रहा है कि हर पार्टी के साथ बीजेपी अपने स्तर से बात करने वाली है. कहा तो यह भी जा रहा है कि प्रधानमंत्री के भारत आगमने के बाद एनडिए के नेताओं की एक बैठक हो सकती है.

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जैसे ही एनडीए के सहयोगियों का जिक्र होता है तो ऐसे में बिहार के दो नेताओं का नाम बड़े ही जोर से लिया जाता है. एक हैं पशुपति कुमार पारस और दूसरे हैं चिराग पासवान. ये दोनों रिश्ते में तो चाचा भतीजे हैं लेकिन इनकी एक दूसरे से राजनीतिक दुश्मनी है. रामविलास पासवान के निधन के बाद लोजपा दो अलग अलग हिस्सों में बंटी एक हिस्सा पारस के पास गया तो दूसरा हिस्सा चिराग पासवान के साथ. आज पारस एनडिए का हिस्सा हैं और केंद्र में मंत्री हैं लेकिन चिराग पासवान ने तो एनडीए के साथ है और न ही उनके पास उनके आलावा कोई सांसद हैं लेकिन चिराग के बारे में यह कहा जाता है कि उनके पास उनका जनसमर्थन हैं ऐसे में बीजेपी यह चाहती है कि चिराग पासवान भी उनके साथ शामिल हो जाएं लेकिन अब समस्या यह है कि एनडिए में पहले से ही पारस हैं तो चिराग की एंट्री कैसे होगी. हालांकि यह काम बीजेपी का है कि वह इन दोनों पार्टियों को एक साथ एक मंच पर कैसे लाती है.

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लेकिन चिराग पासवान ने यह भी साफ कर दिया है कि उनके जितने सांसद पहले से जीते हुए थे उन सभी सीटों पर हम फिर से अपने उम्मीदवार उतारेंगे. यानी कि लोजपा के पास सात सीटें थी ऐसे में अब देखना है कि चिराग का कितने सीटों पर बीजेपी से डिल हो पाता है. कहा तो यह भी जा रहा है कि 6 लोकसभा की सीट और एक राज्यसभा कीसीट के साथ चिराग का डिल हुआ है लेकिन इसको लेकर कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. साथ ही एक दूसरी समस्या यह है कि लोजपा के जितने भी जीते हुए सांसद हैं वे अभी पारस के गुट के साथ हैं पारस गुट एनडिए का हिस्सा है यानी की ये सीट अब बीजेपी अपने हिसाब से डिल करेगी. ऐसे में चिराग इन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारते हैं या फिर बीजेपी अपने उम्मीदवार उतारती है.

अब बात कर लेते हैं प्रिंस राज की. प्रिंस राज समस्तीपुर सीट से सांसद हैं ऐसे में यह कहा जा रहा है कि बीजेपी इन्हें इस सीट पर छोड़ देगी. लेकिन मामला फंस रहा है कि पारस वाली सीट को लेकर. चिराग पासवान की इच्छा है कि वे वैशाली से चुनाव लड़ें. जबकि यहां से पशुपति कुमार पारस पहले से सांसद हैं ऐसे में दोनों के बीच में इस सीट को लेकर हमेशा टकराव देखने को मिलता है. खबर तो यह भी चल रहा है कि चिराग पासवान की मां इस बार लोकसभा का चुनाव लड़ सकती है. ऐसे में यह कहा जा रहा है कि चिराग वैशाली से और उनकी मां जमुई से चुनाव लड़ सकती है. हालांकि चिराग की मां किस सीट से चुनाव लड़ेंगी इसको लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं.

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ऐसे में अब कहा जा रहा है कि इन दोनों पार्टियों को मनाने का काम बीजेपी करेंगी जिसमें पशुपति कुमार पारस को राज्यसभा या फिर किसी राज्य का राज्यपाल बनाया जा सकता है ! जिससे की वैशाली की सीट खाली होगी और चिराग पासवान यहां से चुनाव लड़ सकते हैं. लेकिन नवादा और अन्य सीटें जो कि लोजपा पहले से जीतते आई है इन सीटों पर क्या होगा?

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