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बिहार में नए साल की शुरुआत के साथ ही सियासत तेज हो गई है. बिहार में इन दिनों एक साथ तीन यात्राएं चल रही है. जिसे नीतीश कुमार, कांग्रेस और प्रशांत किशोर आगे बढ़ा रहे हैं. ऐसे में अब देखना है कि इन यात्राओं से इन राजनीतिक पार्टियों को कितना फायदा होता है. हालांकि नीतीश कुमार बिहार में जनता के बीच में जाकर लोगों के मन को टोह रहे हैं. वे बिहार में इस तरह की कई यात्राएं कर चुके हैं. जबकि कांग्रेस राहुल गांधी के तर्ज पर बिहार में भी यात्राएं कर रही है. तो वहीं पिछले तीन महीने से प्रशांत किशोर बिहार में जनसुराज यात्रा कर रहे हैं. प्रशांत किशोर भी बिहार में अपनी जमीन को तलाश रहे हैं. इन यात्राओं से इतर अगर हम बिहार कि सियासत को एक बार गौर से देखें तो इसमें कई तरह के बदलाव के संकेत आपको दिखेंगे. हालांकि इन बदलावों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर आरोप लगा रही है.

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बिहार में सियासी पारा बढ़ने का एक कारण यह भी है कि बिहार बीजेपी के दो बड़े नेताओं की तरफ से यह बयान सामने आ गया है जिसमें यह बताया गया है कि जदयू के कई मंत्री और विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं. साथ ही बीजेपी नेताओं की तरफ से यह बयान बयान सामने आया है कि खरमास के बाद बिहार में सियासत का पारा ऊपर चढ़ने वाला है, भले ही बिहार में कड़ाके की ठंढ़ पड़ रही हो. दरअसल बिहार विधानपरिषद के नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी ने ने अपने बयान में कहा है कि जदयू के विधायक उनके टच में हैं. साथ ही जदयू का वोट बैंक भी बीजेपी में शिफ्ट हो गया है. इसीलिए जदयू के नेता परेशान हैं ऐसे में उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें. ऐसे में उनके सामने बीजेपी एक बेहतर ऑप्सन के रूप में है. उन्होंने आश्वस्त होते हुए कहा कि कुछ दिन इंतजार कर लिजिए राजनीतिक तस्वीरें साफ हो जाएगी.

इससे पहले बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद ने दावा किया है कि जदूय के विधायक और एमपी बीजेपी के संपर्क में हैं. जदयू में बहतु ही जल्दी टूट होने वाली है. हालांकि जदयू की तरफ से बचाव करते हुए प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि बीजेपी जिसके हाथ को पकड़ कर बिहार की सियासत में बढ़ी है आज उसी को तोड़ने की बात कह रहा है. इससे ज्यादा हास्यास्पद और क्या हो सकता है. जदयू की नीव इतनी मजबूत है कि उससे तोड़ना तो छोड़ दीजिए हिला भी नहीं सकता है. बीजेपी नीतीश जी की मुहिम और बढ़ती लोकप्रियता से घबरा गई है.

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राजनीतिक गलियारों में तो इस बात की भी चर्चा चल रही है कि खरमास के बाद राजनेता अपने नए नए घर की तलाश में लगे हुए हैं. इसीलिए कहा जा रहा है कि इस बार का दही चूड़ा कई मामले में खास होने वाला है. ऐसे में इस बात को खुब हवा मिल रही है कि जैसे ही खरमास समाप्त होगा वैसे ही राजनेता अपने अपने घर की ओर चल देंगे. बता दें कि इस बार लालू राबड़ी आवास पर भी दही चूड़ा देखने को मिलेगा तो वहीं उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर भी इस बार दही चूड़ा में राजनेताओं का जुटान होना है.

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बता दें कि खरमास के बाद बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव रंजन ने पार्टी से नाता तोड़ लिया है. ऐसे में इस बात की उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में वे एक बार फिर से जदयू का दामन थाम सकते हैं. वहीं केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस के नेता रहे श्रवण कुमार को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. ऐसे में यह कहा जा रहाहै कि दोनों ही राजनेता किसी भी पार्टी में नहीं है. वहीं बीजेपी नेता की तरफ से जदयू में टूट को लेकर जो बात कही जा रही है उसको लेकर भी बिहार में हवा खुब तेज है. ऐसे में अब देखना है कि खरमास के बाद बिहार में किस तरह की राजनीतिक बदलाव देखने को मिलता है. बता दें कि नीतीश सरकार के मंत्रिमंडल का भी विस्तार होना है ऐसे में कई बातें यहां भी स्पष्ट तौर पर साफ हो जाएगी.

हालांकि बिहार की राजनीति को समझने के लिए अभी लोगों को खरमास तक का इंतजार करना होगा.

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