Car Insurance Tips: नई कार खरीदना हर किसी के लिए एक सपने जैसा पल होता है। महीनों की प्लानिंग, बजट और इंतज़ार के बाद जब शोरूम से नई गाड़ी की डिलीवरी मिलती है, तो वो दिन बेहद खास बन जाता है। परिवार और दोस्तों के साथ तस्वीरें, खुशियां और गाड़ी को घर ले जाने का उत्साह हर किसी के चेहरे पर साफ दिखाई देता है। लेकिन सोचिए, अगर इसी खुशी के बीच अचानक कोई हादसा हो जाए और गाड़ी एक्सीडेंट का शिकार बन जाए, तो उस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर नुकसान की भरपाई कौन करेगा? क्या तुरंत इंश्योरेंस मदद करेगा या ग्राहक को खुद अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ेंगे?

इसे भी पढ़ें- AC Care Tips: अगर आपका AC भी नहीं कर रहा सही से कूलिंग, तो इस तरीके से बन सकता है काम!
दरअसल, नियम काफी साफ हैं। जैसे ही गाड़ी की डिलीवरी पूरी होती है—मतलब गाड़ी के कागजात यानी आरसी, इंश्योरेंस और चाबी ग्राहक को सौंप दी जाती है—तो उसकी पूरी जिम्मेदारी ग्राहक की हो जाती है। ऐसे में अगर गाड़ी का इंश्योरेंस एक्टिव है तो नुकसान की भरपाई इंश्योरेंस कंपनी करती है। ग्राहक को केवल इंश्योरेंस क्लेम दाखिल करना होता है। लेकिन अगर उस समय गाड़ी का रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस डॉक्यूमेंट्स अभी तैयार नहीं हुए हैं और डिलीवरी अधूरी है, तो ज़िम्मेदारी शोरूम या डीलर की बनती है। यही वजह है कि ज़्यादातर डीलर्स गाड़ी की डिलीवरी देने से पहले उसका इंश्योरेंस एक्टिव कर देते हैं, ताकि किसी भी तरह की दिक्कत से ग्राहक को बचाया जा सके।
अब बात आती है कि इस तरह के हादसे में क्लेम कैसे मिलता है। असल में नई कार का इंश्योरेंस लगभग हर बार डिलीवरी से पहले ही एक्टिव कर दिया जाता है। यानी जैसे ही गाड़ी ग्राहक को मिलती है, उसी समय से इंश्योरेंस कवरेज भी शुरू हो जाता है। अगर डिलीवरी के तुरंत बाद गाड़ी का एक्सीडेंट हो जाए तो ग्राहक को घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे में सबसे जरूरी होता है कि हादसे की जानकारी तुरंत इंश्योरेंस कंपनी को दी जाए। कई मामलों में पुलिस रिपोर्ट भी करानी पड़ सकती है, खासकर तब जब एक्सीडेंट गंभीर हो या किसी अन्य वाहन को नुकसान पहुंचा हो।

इसे भी पढ़ें- AC Care Tips: AC इस्तेमाल करने पर भी नहीं बढ़ेगा बिजली बिल और आपका घर भी रहेगा ठंडा!
इसके अलावा, इंश्योरेंस क्लेम प्रोसेस को आसान बनाने के लिए ग्राहक को गाड़ी के डैमेज की तस्वीरें लेना, ज़रूरी कागजात संभालकर रखना और समय पर इंश्योरेंस कंपनी के सर्वेयर को जानकारी देना जरूरी होता है। इंश्योरेंस कंपनी आम तौर पर अपने सर्वेयर को मौके पर भेजती है, जो नुकसान का जायजा लेकर रिपोर्ट तैयार करता है। रिपोर्ट के आधार पर ही क्लेम प्रोसेस आगे बढ़ता है और नुकसान की भरपाई का फैसला किया जाता है। अगर ग्राहक की तरफ से सभी डॉक्यूमेंट्स सही समय पर और पूरी तरह से उपलब्ध करा दिए जाते हैं, तो क्लेम मंजूर होने में ज्यादा दिक्कत नहीं आती।
यानी साफ है कि नई गाड़ी खरीदते समय इंश्योरेंस का एक्टिव होना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। डीलरशिप अक्सर डिलीवरी के साथ ही इंश्योरेंस पॉलिसी की कॉपी भी ग्राहक को सौंप देती है, ताकि ग्राहक को भरोसा हो सके कि गाड़ी अब पूरी तरह सुरक्षित है। इसके अलावा ग्राहक चाहें तो खुद भी इंश्योरेंस कंपनी से सीधे पॉलिसी खरीद सकते हैं और उसकी एक्टिवेशन डेट सुनिश्चित कर सकते हैं।

इसे भी पढ़ें- No Cost EMI:नो कॉस्ट ईएमआई क्या सच में है पूरी तरह से “NO COST”? जानिए छिपे हुए राज!
बहुत से लोग ये सोचते हैं कि शोरूम से गाड़ी निकालते ही अगर कोई हादसा हो गया तो शायद उन्हें जेब से पैसे भरने पड़ेंगे। लेकिन हकीकत ये है कि अगर इंश्योरेंस एक्टिव है, तो किसी भी तरह का नुकसान इंश्योरेंस कंपनी द्वारा कवर किया जाता है। बस ज़रूरत है सही जानकारी रखने और समय पर सभी औपचारिकताएं पूरी करने की।
तो अगली बार जब भी आप नई गाड़ी खरीदें और उसकी डिलीवरी लें, तो सबसे पहले यह जरूर चेक करें कि गाड़ी का इंश्योरेंस एक्टिव है या नहीं। क्योंकि एक्सीडेंट जैसी अनचाही स्थिति किसी के साथ भी और कभी भी हो सकती है। ऐसे में इंश्योरेंस न सिर्फ आपको आर्थिक नुकसान से बचाता है, बल्कि नई गाड़ी की खुशी को भी बरकरार रखता है।
इसे भी पढ़ें- New Railway Rules: इन लोगों को मिलेगा 15 मिनट पहले टिकट बुक करने का फायदा, बस करना होगा ये एक काम!
