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बिहार में सरकारी प्रधानाध्याकों की बहाली प्रक्रिया में अब बदलाव किया गया है. शिक्षा विभाग की तरफ से इसको लेकर बिहार लोक सेवा आयोग को लेटर भेजा गया है. ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है कि जब अगली बार बिहार में प्राधानाध्यापकों की नियुक्ति की प्रक्रिया जब शुरू होगी तो उसमें नये बदलाव के साथ परीक्षा होगी. आपको बता दें कि इन बदलावों में परीक्षा के समय में भी बदलाव किया गया है. साथ ही परीक्षा के मार्किंग में भी बदलाव किया गया है. आपको बता दें कि पिछली बार जब बिहार में 6421 पदों के लिए जब बहाली प्रक्रिया की शुरुआत हुई तो उसमें मात्र 421 परीक्षार्थी ही सफल हो पाए थे. जिसके बाद बिहार सरकार को एक बार फिर से परीक्षा बहाली प्रक्रिया को लेकर विज्ञापन जारी करने की बात कही जा रही है.

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आयोग की तरफ से जो बात कही जा रही है कि उसमें यह बात कहा गया है कि जो लोग प्रधानाध्यापक पद के लिए चयनित हो गए हैं उन्हें नवंबर के अंतिम सप्ताह में नियुक्त करने की बात कही जा रही है. साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि जिन अभियर्थियों का काउंसेलिंग के बाद चयन होगा उसके बाद उनकी तैनाती की जाएगी. बता दें कि शिक्षा विभाग पहले से ही यह चाहता था कि माइनस मार्किंग में बदलाव होना चाहिए. ऐसे में अब जब लोक सेवा आयोग दूसरी परीक्षा लेने की बात कह रहा है तो ऐसे में प्रधान अध्यापकों की परीक्षा में कई बदलाव देखने को मिलने वाला है.

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प्रभात खबर की एक खबर की माने तो प्रधान अध्यापकों की परीक्षा के समय में बढ़ोतरी की बात कही गई है. बता दें कि पहले यह समय डेढ़ घंटे का था जोकि अब बढ़कर 2 घंटे करने की बात कही गई है. बिहार शिक्षा विभाग की तरफ से इस बार यह साफ कर दिया गया है कि हम इस बहाली प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकते हैं. साथ ही विभाग ने यह भी कहा है कि परीक्षा के दौरान होने वाली तकनीकी विसंगतियों को दूर किया जाए. साथ शिक्षा विभाग ने यह भी कहा है कि परीक्षा के दौरान माइनस मार्किंग को भी हटना चाहिए. अगर हम उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के पदों की नियुक्ति को देख लें तो इसी साल 31 मई को पटना के 25 केंद्रों पर लिखित वस्तुनिष्ट परीक्षा हुई थी. इस परीक्षा में 13 हजार 55 अभ्यर्थी शामिल हुए थे. जिसमें से 12 हजार 5 सौ 47 अभ्यर्थी पास नहीं हो पाए थे. इतना ही नहीं इसमें से 87 ऐसे थे जिन्होंने अपना OMR सीट भी सही से नहीं भर पाये थे. ऐसे में जब इस परीक्षा का परिणाम सामने आया तो उसमें जितने लोगों ने फॉर्म भरा था उसमें से महज 3.22 प्रतिशत लोग ही पास हो गाए और उनकी संख्या थी 421. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ये वो शिक्षक हैं जोकि स्कूल में 8 से 12 तक अपनी सेवा दे चुके हैं.

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हालांकि इस पूरे मसले पर बोलते हुए BPSC के सचिव सह परीक्षा नियंत्रक अमरेंद्र कुमार ने बताया कि उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक नियुक्ति को लेकर हमारे पास अब तक परीक्षा में होने वाले बदलाव जैसे की मार्किंग पद्धति में परिवर्तन या फिर परीक्षा के समय में बदलाव को लेकर कोई भी प्रस्ताव सामने नहीं आया है. अगर विभाग की तरफ से इस तरह का कोई भी मंतव्य आता है तो आयोग इस पर विचार करेगा.

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