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आज हम बात करेंगे एक ऐसे जिले के बारे में जो अलगअलग संस्कृतियों के संगम स्थान से प्रचलित है. बता दें की हम बात कर रहें हैं अररिया जिले के बारे में. अररिया जिला बिहार के 38 जिलों में से एक है जो की पूर्णिया प्रमंडल के हिस्से में आता है. इस जिले का मुख्यालय अररिया जिले में हीं स्थित है. ब्रिटिश काल के समय उन क्षेत्रों को रेसिडेंसीयल एरिया कहा जाता था जहाँ ए जे फोबर्स का बंगला स्थित था. ए जे फोबर्स की चर्चा हम आगे करेंगे. फ़िलहाल हम जानते हैं की इस जिले का नाम अररिया कैसे पड़ा. बता दें की रेसिडेंसीयल एरिया नाम को लोगों द्वारा आर एरिया में संक्षिप्त किया कर दिया गया था. बीतते समय के साथ आर एरिया का उच्चारण स्थानीय लोगों द्वारा अररिया किया जाने लगा और अब भी यह जिला अररिया नाम से हीं लोगों के बीच प्रचलित है.

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चौहद्दी और क्षेत्रफल

यदि इस जिले के चौहद्दी की बात करें तो बिहार के चार जिले के साथसाथ नेपाल की अंतर्राष्ट्रीय सीमा भी इसकी सीमा को छूती हैं. इस जिले के पूरब दिशा में किशनगंज जिला, पश्चिम में सुपौल और मधेपुरा, दक्षिण में पूर्णिया और उत्तर में नेपाल अवस्थित है. इस जिले का क्षेत्रफल 1830 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. 2011 के जनगणना के अनुसार 28,11,569 यहाँ की कुल आबादी है. बता दें की यहाँ तीन नगरपालिका, नौ प्रखंड और 751 गाँव मौजूद हैं. यहाँ की साक्षरता दर 53.53% है.

इतिहास

आइये अब जानते हैं इस जिले के इतिहास के बारे में. इतिहासकारों के अनुसार यह जिला अनिश्चितताओं के बीच कटा लेकिन इसका अतीत काफी प्रतिष्ठित रहा. प्राचीन इतिहास की माने तो यह जिला तीन अलगअलग संस्कृतियों के संगम का स्थान है जो तीन महत्वपूर्ण वंशों के शासनकाल के कारण कहा जाता है. इस क्षेत्र के उत्तरी दिशा में किरता के महत्वपूर्ण जनजाति द्वारा शासन किया गया, वहीँ पक्ष पुन्द्रस द्वारा यहाँ पूरब की दिशा में साथ हीं अंगार द्वारा उस काल के कोसी नदी के पश्चिम में शासन किया गया था. ए जे फोबर्स जो की एक साहसी सैन्य थे उन्होंने इस जिले के अनेक जगहों पर कई इंडिगो के कारखानों की स्थापना भी की थी. विद्रोहियों और सेनाओं के बीच 1857 के क्रांति के समय इस क्षेत्र में भी झड़प देखने को मिली थी. इस चीज को देखते हुए कानून और व्यवस्था को ध्यान में रख कर इस क्षेत्र को वर्ष 1864 में एक बेहतर प्रशासन प्रदान करने के लिए अररिया, मटियारी, दिमिया और हवेली के कुछ हिस्सों को तथा बहादुरगंज को विलय कर के उपप्रभाग के रूप में गठित किया गया था. फिर आगे चल कर 1990 में इसे एक जिला बना दिया गया.

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प्रसिद्ध व्यक्ति

आइये अब हम अपनी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए जानते हैं अररिया जिले के प्रसिद्ध व्यक्ति के बारे में. तो यहाँ के प्रसिद्ध व्यक्ति की सूचि में हम बात करेंगे फणीश्वरनाथ रेणु के बारे में. इनका जन्म 4 मार्च वर्ष 1921 में बिहार के अररिया जिले में हुआ था. पेशे से यह उपन्यासकार और संसमरणकार थे. इन्होने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी सक्रीय भूमिका निभाई. इन्हें जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण क्रांति में भी सक्रीय रूप से भाग लेते देखा गया. भारत के स्वतंत्रता संग्राम के साथसाथ इन्होने वर्ष 1950 के नेपाली क्रांतिकारी आन्दोलन में भी हिस्सा लिया. इनके प्रसिद्ध उपन्यास में मैला आँचल, जुलूस, कितने चौराहे और कलंक मुक्ति आदि शामिल है. वहीँ इनके कथा संग्रह की बात करें तो इस सूचि में ठुमरी, एक आदिम रात्री की महक, एक श्रावणी दोपहर की धुप और अच्छे आदमी शामिल है. यदि इनके प्रसिद्ध कहानियों की बात करें तो मारे गये गुलफाम, लाल पान की बेगम पंचलाइट और ठेस आदि शामिल है.

कैसे पहुंचे

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आइये अब हम जानते हैं की इस जिले में यातायात के लिए रेल, सड़क और हवाई मार्ग की क्या सुविधाएँ उपलब्ध हैं.

  • रेल मार्ग

तो अपने यातायात की सुविधाओं में हम सबसे पहले बात करेंगे रेल मार्ग की. यहाँ बड़ी लाइन के रूप में आपको रेल की सुविधा आसानी से मिल जाएगी. यदि पटना से अररिया रेल मार्ग के जरिये जाना चाहे तो पटना जंक्शन से कोई भी रेल की सुविधा आपको नहीं मिलेगी. लेकिन पटना जंक्शन से थोड़ी हीं दूरी पर स्थित पाटलिपुत्र जंक्शन से आपको ट्रेन मिल जाएगी. बता दें की यहाँ से फिलहाल एक ट्रेन हीं अररिया को जाती है. वो है सीमांचल एक्सप्रेस. यदि इस ट्रेन के समय सीमा की बात करें तो यह ट्रेन रात के समय 11:25 मिनट पर खुलती है और सुबह 6:40 मिनट पर अररिया कोर्ट तक पहुंचा देती है. यदि इस जिले के प्रमुख रेलवे स्टेशन की बात करें तो अररिया कोर्ट जिसका स्टेशन कोड ARQ है. सिमराहा स्टेशन जिसका स्टेशन कोड SMH, हल्दिया बिहार हाल्ट जिसका स्टेशन कोड HOD, फोर्बिश्गंज जंक्शन जिसका स्टेशन कोड FBG है आदि शामिल है.

  • सड़क मार्ग

चलिए अब हम बात करते हैं इस जिले के सड़क मार्ग के बारे में. यह जिला NH 57 से जुड़ा हुआ है. इस जिले से आप सड़क के माध्यम से बिहार के कई हिस्सों में आसानी से आजा सकते हैं. यदि पटना से हम अररिया सड़क मार्ग के जरिये आना चाहे तो हम वाया NH 27 के जरिये आ सकते हैं. इसकी दूरी लगभग 321 किलोमटर तक में जिसे तय करने में 6 घंटे और 34 मिनट तक का समय लगता है. यदि इसके रूट की बात करें तो NH 22 के जरिये पटना से हाजीपुर, सराय, कुर्हानी, काकरा चाक, जारंग ईस्ट फिर NH27 से सकरी ईस्ट, झंझारपुर, फुलपरास, नरपतगंज और फिर फोर्बेसगंज होते हुए NH 327 के जरिये अररिया पहुंचेंगे. पटना से अररिया सड़क मार्ग के जरिये जाने के लिए आपको आसानी से बस और निजी गाड़ी मिल जाएँगी.

जानकारी के लिए बता दें की यदि आप अररिया जिले में सड़क मार्ग के जरिये जा रहें हैं और आपको रास्ते में कहीं BR 38 नंबर वाले वाहन दिखने लगें तो समझ जाइये की आप अररिया जिले में प्रवेश कर चुके हैं.

  • हवाई अड्डा

आइये अब जानते हैं इस जिले के हवाई अड्डे के मार्ग के बारे में. तो बता दें की इस जिले का अपना कोई हवाई अड्डा नहीं है. लेकिन राजधानी पटना का हवाई अड्डा अररिया जिले का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है. पटना एयरपोर्ट पर आप देश के किसी भी कोने से डायरेक्ट फ्लाइट या कनेक्टिंग फ्लाइट के जरिये आ सकते हैं. और फिर पटना से आप सड़क या रेल मार्ग के जरिये अररिया आसानी से पहुँच सकते हैं. सड़क मार्ग और रेल मार्ग के जरिये पटना से अररिया कैसे पहुंचना है इसकी चर्चा हम पहले भी कर चुके हैं.

पर्यटन स्थल

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तो चलिए अब हम जानते हैं इस जिले के पर्यटन स्थल के बारे में.

पर्यटन स्थल की सूचि में हम सबसे पहले बात करेंगे रानीगंज वृक्ष वाटिका की. तो बता दें की बिहार राज्य के अररिया जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर पश्चिम में रानीगंज वृक्ष वाटिका स्थित है. बिहार सरकार द्वारा यह स्थल अधिसूचित वन भूमि है. पहले इस क्षेत्र को लोग हसनपुर बालूधीमा के नाम से जानते थे. बता दें की यह क्षेत्र 289 एकड़ में फैला हुआ है. इसे सरकार द्वारा प्राकृतिक वन क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया है. मालूम हो की अररिया जिले का यह क्षेत्र बिहार राज्य का एक अत्यंत दर्शनीय, प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श और शोध करने वाले शोधार्थियों के लिए अध्ययन स्थल के रूप में निर्मित है.

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चलिए अब हम बात करते हैं जैव विविधता उद्यान कुसियारगाँव के बारे में. बता दें की अररिया के कुसियारगाँव में बिहार का पहला बायोडायवर्सिटी पार्क बन कर तैयार हुआ है. यह यहाँ के शोधकर्ताओं के लिए वरदान के रूप में है. इस पार्क के खुलने से पर्यटन का भी यहाँ अच्छा स्रोत हो गया है. इसकी दूरी जिला मुख्यालय से मात्र 10 किलोमीटर है. और यह उद्यान NH 57 के किनारे स्थित है.

कृषि और अर्थव्यवस्था

चलिए अब बात करते हैं. इस जिले के कृषि और अर्थव्यवस्था के बारे में. बता दें की इस जिले की अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर है. यदि यहाँ के मुख्य फसलों की बात करें तो धान, मक्का और जुट आदि है. इस जिले को देश के 250 सबसे पिछड़े जिलों में से एक भारत सरकार द्वारा वर्ष 2006 में रखा गया. बता दें की यह जिला पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि कार्यक्रम से धन प्राप्त करता है.

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