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भारत और वेस्टइंडीज के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जा रही है. जिसमें भारत की पकड़ मजबूत बनी हुई है. वेस्टइंडीज की टीम पहली पारी में 150 रनों पर सिमट गई है. जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी भारत की टीम ने शुरुआत बेहतरीन तरीके से की. भारतीय टीम की सलामी जोड़ी कप्तान रोहित शर्मा और यशस्वी जायसवाल ने कमाल की बल्लेबाजी की और दोनों ने मिलकर 200 से ज्यादा रनों की पार्टनरशीप की है. भारतीय टीम ने बल्लेबाजी करते हुए कई रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिए. एक तरफ जहां भारतीय समाली जोड़ी ने अपने क्रिकेट इतिहास में अपने लिए एक स्वर्णिम पन्ना खोज लिया है जिसमें रोहित शर्मा और जायसवाल ने मिलकर कमाल की तारीख दर्ज की है. डॉमिनिका में खेले जा रहे मैच में टीम इंडिया पिछले 91 साल के टेस्ट क्रिकेट इतिहास में अपना नाम दर्ज करवा लिया है. आपको बता दें कि भारत ने अपना पहला टेस्ट मैच 1932 में खेला था, तब से लेकर अब तक भारत इस रिकॉर्ड को तोड़ नहीं पाया था. दरअसल भारत की टीम टेस्ट इतिहास की पहली पारी में बिना विकेट खोए विपक्षी टीम पर लीड लेने में कामयाब नहीं रहा था. भारत की टीम ने यह रिकॉर्ड यशस्वी जायसवाल और रोहित शर्मा की सलामी जोड़ी के दम पर हासिल किया. इन दोनों खिलाड़ियों के बीच में पहले विकेट के लिए 229 रनों की साझेदारी हुई.

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यशस्वी जायसवाल ने अपने डेब्यू मैच में शतक ठोक दिया है. आपको बता दें कि अपने डेब्यू मैच में शतक लगाने वाले वे भारत के सातवें खिलाड़ी बने हैं. इनसे पहले सौरभ गांगुली, वीरेंद्र सहवाग, सुरेश रैना, अब्बास अली बेग, प्रवीण आमारे और सुरिंदर अमरनाथ ने यह कारनामा कर दिखाया है. यशस्वी ने टेस्ट क्रिकेट का पहला शतक 215 गेंदों में पूरा किया था. इस दौरान उनके बल्ले से 11 चौके निकले थे. आपको जानकर हैरानी होगी कि यशस्वी को आईपीएल के प्रदर्शन के आधार पर टेस्ट मैच में डेब्यू करने का मौका मिला था. ऐसे में टेस्ट मैच में यशस्वी की बल्लेबाजी देख हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है. एक तरफ जहां कहा जा रहा था कि टी-20 खेलने वाला कोई भी खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट में कैसे खेल सकता है. यशस्वी ने यह दिखाया है कि खिलाड़ी कोई भी हो जब वह बल्ला पकड़ता है तो रन ही बनाता है. यशस्वी के आईपीएल की बात करें तो साल 2023 के सीजन में उन्होंने 165 के ताबड़तोड़ स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए 428 रन बनाए थे. जायसवाल को इस IPL सीजन की वजह से ही भारतीय टीम में खेलने का मौका मिला था.

यशस्वी ने कहा कि यह क्षण मेरे लिए और मेरे परिवार के लिए बेहद इमोशनल था. यह लंबा सफर रहा है. मैं उन सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने मेरी किसी भी तरह से मदद की है. यह शतक मातापिता को समर्पित है, मेरी लाइफ में उनका बड़ा योगदान है. उन्होने कहा कि अभी और आगे जाना है. भगवान हैं तो बस. अब ज्यादा नहीं बोलना चाहूंगा.

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उत्तर प्रदेश के रहने वाले यशस्वी जायसवाल का क्रिकेट का सफर मुंबई से शुरू हुआ था. उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा मुंबई में गुजारा था. जहां उन्होंने क्रिकेट सीखने के लिए क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए कई बड़े संघर्ष किये हैं. उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों में जिस स्टेडियम में वे खेलते थे उसमें ही गोलगप्पे तक बेचे हैं ताकी उनका भरन पोषण हो सके. इतनी गरीबी से गुजरने वाला यह खिलाड़ी जब भारतीय टीम में पहुंचता है और अपने डेब्यू मुकाबले में ही जब शतक बना  देता है तो हर कोई इस खिलाड़ी के खेल से प्रभावित होता है. यशस्वी आने वाले दिनों में गांव के उन खिला़ड़ियों के मॉडल बनने वाले हैं जिन्हें देखकर ये खिलाड़ी भविष्य में क्रिकेटर बनने का सपना देख सकेंगे. महेंद्र सिंह धोनी में भी यह करके दिखाया है कि वह छोटे से शहर के होने के बाद भी भारतीय टीम का हिस्सा बन सकते हैं. यशस्वी जायसवाल को हमारी टीम की तरफ से ढेरों शुभकामनाएं.

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