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फैफ़ डू प्लेसिस वो खिलाड़ी जिसके खेल को बोर्ड ने कभी इज्जत नहीं दी …

साउथ अफ्रीका का वो कप्तान जिसे कप्तानी छोड़ने को मजबूर किया गया

फैफ डू प्लेसिस ने जब अपने साले की गेंदों पर शतक ठोक डाला

जिस देश के लिए सबकुछ छोड़ा उसी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया

एक रग्बी प्लेयर कैसे बना क्रिकेटर

अनोखे बैटिंग स्टाइल से खेलने वाला फैफ़ डू प्लेसिस गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा देता है

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दोस्तों, दुनिया में करोड़ों की संख्या में ऐसे युवा है जो क्रिकेटर बनने का सपना देखते है और उसे पूरा करने के लिए क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन भी कर लेते हैं। सही मायनों में जब कोई युवा लड़का क्रिकेट एकेडमी में क्रिकेट के गुण सीखता है तो उसे पहले क्रिकेट के बेसिक्स सिखाए जाते है। जैसे बैट को पकड़ना , क्रीज पर कैसे खड़े होना है कुछ ऐसे ही बेसिक्स सिखाए जाते हैं लेकिन सबसे अहम चीज सिखाई जाती जाती है ..ग्रिप

ग्रिप एक ऐसा शब्द है जो बल्लेबाजी करने के लिए सबसे अहम गुण होता है। एक बल्लेबाज का बैट पर जितनी अच्छी ग्रिप होगी। बल्लेबाज को मैदान के चारों दिशाओं में शॉट लगाने में उतनी ही सहूलियत होगी। लेकिन दुनिया में कई ऐसे बल्लेबाज आए और गए जिनके खेलने का स्टाइल और बैट पकड़ने का तरीका काफी आकर्षक रहा है। सचिन तेंदुलकर वो महान क्रिकेटर जो बल्ले को काफी नीचे से पकड़ते थे और वर्तमान में श्रेयस अय्यर। वहीं कुछ ऐसे खिलाड़ी होते है जिनका एक हाथ नीचे तो एक ऊपर होता है। इस तरह के ग्रिप पकड़ने से शॉट में पॉवर जनरेट होता है। जिससे गेंद तेजी से बहुत दूर जाती है।

दोस्तों, क्रिकेट की दुनिया में एक ऐसा बल्लेबाज भी है जो बैट की ग्रिप को पकड़ते समय एक हाथ नीचे रखता है तो एक बैट के ऊपर रखता है। उसे देखने बाद मानो वो बल्ला नहीं कोई तलवार लिए खड़ा है।

आज बात करने वाले है ऐसे क्रिकेटर की जिसका बल्लेबाजी करने का अंदाज निराला है जो अनोखे तरीके से बैट की ग्रिप पकड़ता है। एक ऐसा खिलाड़ी जिसने अपने देश के लिए सबकुछ छोड़ा और उसी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। जी हां हम बात करने वाले है फैफ डू प्लेसिस की….

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फैफ डू प्लेसिस का जन्म 13 जुलाई 1984 को दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया शहर में हुआ है । इनका पूरा नाम फ्रेंकोइन डू प्लेसिस है। इनके पिता फ्रेकोइस डू प्लेसिस एक रग्बी प्लेयर थे। जो कि 80 के दशक में ट्रांसवाल की टीम के लिए खेला करते थे। और नामीबिया के रग्बी प्लेयर मार्शल डू प्लेसिस इनके कजिन भाई है। फैफ एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते थे जिसकी जड़ें स्पोर्ट्स से जुड़ी थी। और फाफ को रग्बी में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं थी। उन्होंने क्रिकेट खेलना पसंद था। फाफ जब छोटे से तो वह सिर्फ मनोरंजन के लिए क्रिकेट खेला करते थे। लेकिन जब फाफ 16 साल के हुए तो उन्होंने क्रिकेट में करियर बनाने की सोचा। फाफ के लिए क्रिकेट करियर का सफर उनके स्कूली दिनों में शुरू हुआ। जब वो पहली बार स्कूली क्रिकेट टीम का हिस्सा बने। उन्होंने अपनी पढ़ाई अफ्रीकन हाई स्कूल से पूरी की। आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि ये वही स्कूल है जहां से साउथ अफ्रीका के ही विस्फोटक बल्लेबाज और क्रिकेट के 360 कहे जाने वाले खिलाड़ी एबी डिविलियर्स ने भी अपनी पढ़ाई पूरी की थी। फाफ और डिविलियर्स अच्छे दोस्त थे। दोनो ने अपनी एज ग्रुप में काफी क्रिकेट खेला है और सफलता भी प्राप्त की है।

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एक तरफ जहां डिविलियर्स का करियर काफी बुलंदियों पर था। डिविलियर्स ने जब हाई स्कूल पास किया तो उन्हें एज ग्रुप क्रिकेट में जगह मिल गई और बहुत जल्दी साउथ अफ्रीका की सीनियर टीम का भी हिस्सा बन गए। लेकिन उन्हें डोमेस्टिक क्रिकेट में जगह नही मिली।डिविलियर्स का संघर्ष वर्षो तक जारी रहा। इधर फाफ डू प्लेसिस ने जब अपनी स्नातक की डिग्री पूरी की तो वो अपने करियर को निखारने के लिए साउथ अफ्रीका छोड़ इंग्लैंड चले गए। यहां उन्होंने लीवरपुल की तरफ से क्रिकेट की शुरुआत की। फाफ ने क्रिकेट के गुण अफ्रीका में ही सीखे थे जब उन्हें लिवरपूल की तरफ से खेलने का मौका मिला तो उन्होंने अपने शानदार खेल से हर किसी अचंभित कर दिया। फाफ ने पहले मैच में 200 रन बनाए तो अगले बीच दो मैच में दो शतक ठोक डाले। मतलब तीन मैचों में तीन शतक फाफ ने बना दिए थे अपने इस खेल से उन्होंने कोहराम मचा दिया। हालाकि 2007 का सीजन उनके लिए बुरा साबित हुआ। फिर भी फाफ के बल्लेबाजी करने का अनोखा अंदाज हर किसी पसंद आया। ज्यादातर बल्लेबाज बैट को बीच से पकड़ते है लेकिन फाफ एक हाथ उपर से एक हाथ नीचे रखते हैं। क्रिकेट की भाषा में इसे हाई बैक लिफ्ट पोसिजन कहते हैं। अपने इसी अंदाज को उन्होंने आगे भी जारी रखा। और उन्हें पहली बार इंग्लैंड की काउंटी क्रिकेट क्लब में लंकाशायर की तरफ से खेलना का मौका मिल गया। इसके बाद फाफ ने काउंटी की दूसरी टीम नोटिंघम शायर की तरफ से खेला। फाफ को एक डील मिली। इस बीच उन्हे इंग्लैंड की तरफ से एक ऑफर दिया गया। कि उन्हें अफ्रीका को पूरी तरह से छोड़कर इंग्लैंड के लिए खेलना होगा। फाफ के दिल में अपने देश के लिए खेलना एक सपना था इसलिए उन्होंने इस डील को ठुकरा दिया। फाफ को इस बीच काफी इंतजार करना पड़ा लेकिन अफ्रीका की तरफ से कोई मौका नहीं मिल रहा था। तभी एक दिन उन्हे फिर से लंकाशायर की तरफ से एक ऑफर आया। जिसके दौरान फाफ ने 6 महीने इंग्लैंड की काउंटी क्रिकेट खेली तो 6 महीने साउथ अफ्रीका के लिए डोमेस्टिक क्रिकेट खेली। ऐसा दो सालों तक चलता रहा। फाफ इस बीच रनों का अंबार लगा चुके थे। लेकिन अफ्रीकी सेलेक्टरों के कान में जूं तक ना रेंगी।

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फाफ डु प्लेसिस काउंटी की भट्टी में तपकर वापस देश लौटे तो साल 2010 में उन्हे साउथ अफ्रीका की टीम ए और टायटन्स के लिए खेलने का मौका मिला। उन्होंने अपने खेल का ऐसा करिश्मा दिखाया कि सेलेक्टर इस बार नजरंदाज नहीं कर पाए। आखिरकार 5 फुट 10 इंच के फाफ डु प्लेसिस के लिए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के दरवाजे खुल ही गए। 18 जनवरी 2011 फाफ के लिए वो यादगार दिन बना जब उन्होंने भारत के खिलाफ वनडे क्रिकेट में डेब्यू किया। अपने पहले ही मैच शानदार अर्धशतक ठोक 60 रन बनाए। उस सीरीज में उन्होंने अच्छा खेल दिखाया। जिससे सेलेक्टरों ने उन्हें उसी साल भारत में होने वाले विश्व कप टूर्नामेंट में अफ्रीकी टीम में जगह दे दी। फाफ ने टूर्नामेंट में कई अच्छी पारियां खेली। लेकिन जब क्वार्टर फाइनल भारत हारकर साउथ अफ्रीका खेल से बाहर हो गया तो फाफ के लिए मुसीबत का दिन बन गया। इसी मैच में फाफ ने डिविलियर्स को रन आउट करा दिया था। टीम और लोगों में इतना गुस्सा था कि उनको और उनकी पत्नी को जान से मारने की धमकी तक मिली। लेकिन धीरे धीरे सबकुछ नॉर्मल हो गया। साल 2012 के आईपीएल में सीएसके ने फाफ डु प्लेसिस को अपने साथ जोड़ा। जहां उन्होंने कई लाजवाब पारियां खेली। उनके इस प्रदर्शन का शोर साउथ अफ्रीका में सुना गया।

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22 नवंबर 2012 को फाफ पहली बार सफेद जर्सी में नजर आए। जब उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में चुना गया। और उन्होंने एडिलेड में अपना पहला टेस्ट खेला। अपने पहले ही टेस्ट की दूसरी पारी में 110 रन की शतकीय पारी खेली। उनके इस खेल से साउथ अफ्रीका हारते हारते बच गया। फाफ की लाजवाब पारी की चर्चा चारो तरफ होने लगी। उनके खेल की सराहना होने लगी। फाफ अब पूरी तरह से क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में परिपक्व हो चुके थे। फाफ टीम में देर आए लेकिन दुरस्त आए। इसी साल उन्हे टी 20 टीम का कप्तान बनाया गया। इसके बाद फाफ को टेस्ट और वनडे दोनो की कप्तानी मिली। फाफ ने अपने खेल से निराश नही किया। लेकिन उन पर दो बार बॉल टेंपरिंग के आरोप लगे। जिससे उनकी छवि खूब खराब हुई। एक खिलाड़ी के जीवन में कई ऐसे उतार चढ़ाव दिन आते है जिन्हे वो याद करना भी नहीं चाहता।

दोस्तों, दाएं हाथ के फाफ डु प्लेसिस के क्रिकेट करियर पर एक नज़र डाल लेते है 29 टेस्ट , 87 वनडे खेलने वाले फाफ ने दोनो में तकरीबन 5 हजार रन बनाए है। अपने 10 साल के आईपीएल करियर में फाफ ने 116 मैचों 3403 रन बनाए है.

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वर्तमान में वो रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु(RCB) की कप्तानी करते हैं. साल 2022 में फ्रेंचाइजी ने उन्हें टीम का कप्तान नियुक्त किया, और उनका अनुभव टीम के काफी काम आ रहा है. 2022 IPL में RCB ने प्लेऑफ्स के लिए क्वालीफाई किया था.  आपको क्या लगता क्या फाफ की कप्तानी में RCB ट्रॉफी के सूखे को खत्म करने में कामयाब हो पाएगी ?

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