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भारतीय क्रिकेट टीम में चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने का मसला बड़ा पेंचीदा रहा है, आज भी उस पोजीशन पर किसे खिलाया जाए, यह समस्या बना हुआ है. कई खिलाड़ी आए और गए लेकिन आज भी यह समस्या जस का तस बना हुआ है.महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह जैसे धुरंधरों को भी चौथे स्थान के प्रयोग में शामिल किया गया और आज भी ऋषभ पंत, केएल राहुल, श्रेयस अय्यर और सूर्यकुमार यादव जैसे प्रतिभाशाली बल्लेबाज चौथे स्थान की कसौटी से गुजरते हैं. इस स्थान के लिए इतने सारे प्रयोगों के बावजूद रिजल्ट क्या निकला, ये आपके सामने है.

आज बात एक ऐसे खिलाड़ी की, जो नंबर-4 के प्रयोग में शामिल रहे और उम्दा प्रदर्शन से अपना जगह भी पक्का कर लिया था लेकिन चयनकर्ताओं ने उसे टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया ? आखिर क्यों ? इस लेख में हम आपको यही बताने वाले हैं.

आज बात भारत के प्रतिभाशाली बल्लेबाज अम्बाती रायुडु की.

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35 साल के हो चके अम्बाती रायुडु का क्रिकेट करियर भले ही अपने अंतिम दौर में है लेकिन अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके द्वारा बिताया गया 8 साल बेहद उतार–चढ़ाव भरा रहा और इसलिए हम उनके जीवन और क्रिकेट करियर पर विडियो लेकर हाजिर हैं. उम्मीद है आपको यह पसंद आएगी.

अम्बाती रायुडु का जन्म 23 सितंबर, 1985 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में हुआ था. रायुडु को बचपन से ही क्रिकेट के प्रति बड़ी दिलचस्पी थी और उनके क्रिकेटिंग हुनर को पहचाना पिता साम्बासिवा राव ने उनका दाखिला क्रिकेट अकैडमी में करवा दिया. उस वक्त रायुडु सिर्फ तीसरी कक्षा में पढ़ते थे.

अम्बाती रायुडु के कोच विजय पॉल, जो हैदराबाद के पूर्व क्रिकेटर थे बताते हैं कि रायुडु के पिता उन्हें स्कूटर पर बिठाकर अकैडमी लाया करते थे और मैदान से दूर घंटों खड़े रहकर अपने बेटे को खेलते हुए देखा करते थे. रायुडु ने अपनी स्कूलिंग श्री रामकृष्णा विद्यालय से पूरी की. इधर क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए हैदराबाद की यूथ टीम में जगह बना ली और यहीं से सही मायने में रायुडु के क्रिकेटिंग करियर की शुरुआत हुई.

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हैदराबाद की यूथ टीम से खेलते हुए अम्बाती ने अंडर-15 और अंडर-19 स्तर पर खेलना जारी रखा. हैदराबाद की यूथ टीम की तरफ से बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए रायुडु ने साल 2000 में आयोजित ACC India’s Under-15 Tournament में जगह बना ली. इस टूर्नामेंट में रायुडु ने कमाल की बल्लेबाजी की और टूर्नामेंट के लीडिंग रन स्कोरर रहे. फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ धुआंधार बल्लेबाजी के चलते रायुडु को ‘मैन ऑफ द मैच‘ चुना गया. निरंतर बढ़िया प्रदर्शन कर रहे अम्बाती रायुडु ने साल 2002 रणजी सीजन में हैदराबाद की तरफ से आख़िरकार अपना प्रथम श्रेणी डेब्यू कर लिया. लेकिन रायुडु अपने पहले रणजी मैच में नंबर-4 पर बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 33 रन बनाए, जिसके बाद पूरे सीजन में उनको टीम में जगह नहीं मिल पाया. लेकिन साल के अंत में रायुडु को भारत की अंडर-17 टीम का कप्तान नियुक्त कर दिया गया. यहां खेलते हुए रायुडु का प्रोमोशन इंग्लैंड दौरे पर जाने वाली भारत की अंडर-19 टीम में हुआ. रायुडु ने मिले मौके को भुनाया और इस बार बतौर ओपनर उन्होंने पूरी दुनिया को अपने हुनर का परिचय करवाया. रायुडु पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे और अपने इस प्रदर्शन के दम पर रायुडु ने 2002-03 रणजी सत्र में हैदराबाद की टीम में एक बार फिर जगह बना ली. और इस बार रायुडु ने ऐसी पारी खेली कि रिकॉर्ड ही बन गया.

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अम्बाती रायुडु ने पूरे सीजन में 69.80 की औसत से 698 रन बनाए. रायुडु ने आंध्र प्रदेश के खिलाफ नंबर-4 पर खेलते हुए मैच के पहले ही दिन 210 रनों की पारी खेल डाली. वो यहीं नहीं रुके दूसरी पारी में उन्होंने 161 गेंदों में नाबाद 159 रन बना दिए और मैच ड्रा हो गया. इस तरह किसी भी फर्स्ट क्लास मैच में दोहरा शतक और दूसरी पारी में डेढ़ सौ से ज्यादा रन बनाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने अम्बाती रायुडु. इसके अलावा रायुडू प्रथम श्रेणी क्रिकेट में दोहरा शतक बनाने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय भी बन गए और यह रिकॉर्ड अभी भी कायम है.

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रायुडु के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उनको 2004 में ICC अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम का कप्तान नियुक्त कर दिया गया. टूर्नामेंट में भारतीय टीम का सफर भले ही सेमीफाइनल तक ही रहा लेकिन रायुडु की कप्तानी सराहनीय रही. अब अम्बाती रायुडु सुर्खियाँ बटोर रहे थे और मीडिया में वो एक युवा क्रिकेट सितारे के रूप में उभरने लगे थे.

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लेकिन इसके बाद अम्बाती रायुडु एक विवाद में फस गए, जिस वजह से उनकी छवि को भारी नुकसान पहुंचा. बात है 2005-06 रणजी सीजन की. रायुडु इस बार आंध्र प्रदेश की तरफ से अपनी पुरानी टीम हैदराबाद के विरुद्ध खेल रहे थे. हैदराबाद के एक खिलाड़ी अर्जुन यादव से रायुडु की कुछ कहासुनी हो गई, मामला इतना बढ़ गया कि अर्जुन स्टंप लेकर रायुडु को मारने दौड़े लेकिन मैदान पर खड़े अंपायर और साथी खिलाड़ियों ने बीच–बचाव कर मामले को आगे नहीं बढ़ने दिया. इसके बाद मीडिया में तरह–तरह की ख़बरें चलने लगी, जिससे रायुडु के छवि को भारी नुकसान पहुंचा.

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रायुडु से जुड़ा एक और विवाद साल 2007 में सामने आया. यह घटना साल 2007 में हुई इंडियन क्रिकेट लीग की है. दरअसल इस लीग को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(BCCI) से मान्यता नहीं मिली थी और इसमें खेलने वाले खिलाड़ियों को बागी समझा जाता लेकिन रायुडु ने यह सब जानते हुए इस लीग में हिस्सा लिया. BCCI ने तुरंत एक्शन लेते हुए रायुडु पर प्रतिबंध लगा दिया. लेकिन 2 साल बाद यानी साल 2009 में बोर्ड ने रायुडु पर लगा प्रतिबंध हटा लिया.

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घरेलु क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करते हुए अम्बाती रायुडु ने भारत की अंतराष्ट्रीय टीम में भी जगह बनाई. साल 2013 में महेंद्र सिंह धोनी के इंजर्ड होने के बाद अम्बाती रायुडु को टीम इंडिया में जगह मिली. अपने डेब्यू वनडे मैच में रायुडु ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 63 रनों की पारी खेली और इस तरह डेब्यू पर अर्धशतक लगाने वाले वो 12वें भारतीय खिलाड़ी बने. रायुडु और कोहली की साझेदारी की वजह से भारत ने इस मैच में जीत दर्ज की थी. इसके बाद रायुडु ने निरंतर उम्दा प्रदर्शन के दम पर भारत की वनडे टीम में अपनी जगह बना ली और 2015 में होने वाले विश्व कप में रायुडु का चयन भारतीय टीम में हुआ. लेकिन रायुडु को एक भी मैच में प्लेइंग-11 का हिस्सा नहीं बनाया गया. प्लेइंग-11 में नहीं चुने जाने का गुस्सा रायुडु ने जिम्बाब्वे दौरे पर निकाला. दरअसल विश्व कप के तुरंत बाद भारतीय टीम ने जिम्बाब्वे का दौरा किया था. जिम्बाब्वे दौरे पर खेले गए पहले ही मैच में अम्बाती रायुडु ने 124 रन बना डाले और ‘मैन ऑफ द मैच‘ बने.

लेकिन बढ़िया प्रदर्शन के बावजूद रायुडु टीम इंडिया में अपनी जगह पक्का नहीं कर पा रहे थे. वो लगातार टीम से अंदर–बाहर हो रहे थे. रायुडु के लिए साल 2018 बेहद शानदार रहा, जहां IPL में मिली सफलता के बाद भारतीय टीम में एक बार फिर रायुडु की वापसी हुई. लेकिन जब 2019 विश्व कप आया तो एक बार फिर रायुडु को दरकिनार कर दिया गया. चयनकर्ताओं द्वारा ये दलील दी गई कि अम्बाती रायुडु टीम के लिए उपयोगी बल्लेबाज नहीं हैं, हमें विजय शंकर जैसे 3 dimensonal प्लेयर्स की आवश्यकता है.

चयनकर्ताओं के इस फैसले पर क्रिकेट एक्सपर्ट हैरान थे और मीडिया में भी रायुडु के पक्ष में काफी कुछ लिखा और कहा गया. सोशल मीडिया पर अम्बाती रायुडु के प्रशंसकों ने चयनकर्ताओं का विरोध करते हुए रायुडु को 3-D प्लेयर की उपाधि दे दी.

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रायुडु भी इस उथल–पुथल से परेशान होकर 2 जुलाई, 2019 को गुस्से में क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया. भारतीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद आयरलैंड क्रिकेट बोर्ड ने रायुडु को टीम का कप्तान बनने का ऑफर दिया जिसे रायुडु ने स्वीकार नहीं किया और 29 अगस्त, 2019 को अपने रिटायरमेंट के फैसले को वापस ले लिया. लेकिन रायुडु उसके बाद अभी तक टीम इंडिया में वापसी नहीं कर पाए हैं. साल 2019 में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना आखिरी वनडे इंटरनेशनल खेला है.

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अम्बाती रायुडु के अबतक के क्रिकेट करियर पर नजर डालें तो उन्होंने भारत के लिए 55 वनडे मैचों की 50 पारियों में 47.06 की उम्दा औसत से 1694 रन बनाए हैं, इस दौरान वो 14 पारियों में नॉटआउट भी रहे हैं. रायुडु के नाम वनडे अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में 3 शतक और 10 अर्धशतक दर्ज हैं. वहीं 6 टी20 इंटरनेशनल की 5 पारियों में रायुडु ने 42 रन बनाए हैं. वनडे अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में रायुडु के नाम 3 विकेट भी दर्ज हैं. वनडे क्रिकेट में रायुडु का औसत भारतीय खिलाड़ियों में 5वें नंबर पर है.

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वहीं रायुडु के IPL करियर को देखें तो उन्होंने 188 मैचों की 175 पारियों में 30 बार नाबाद रहते हुए 4190 रन बनाए हैं. आईपीएल में रायुडु के नाम 1 शतक और 22 अर्धशतक दर्ज हैं. आईपीएल में भी रायुडु का नाता विवादों से रहा. साल 2016 में एक आईपीएल मैच के दौरान रायुडु मुंबई इंडियन्स के हरभजन सिंह से उलझ गए. हालांकि मुंबई के खिलाड़ियों ने बीच–बचाव कर मामले को शांत कर दिया.

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अम्बाती रायुडु के निजी जीवन की बात करें तो उन्होंने अपनी कॉलेज फ्रेंड चेनुपल्ली विद्या से साल 2009 में शादी की थी. दोनों की एक बेटी हैं, जिसका जन्म 12 जुलाई, 2020 को हुआ था. इस वक्त रायुडु सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में बरोडा के कप्तान की भूमिका में हैं और भारतीय टीम में वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं. आपको क्या लगता है ? क्या अम्बाती रायुडु एक बार फिर भारतीय टीम में वापसी करने में कामयाब हो पाएंगे या नहीं ? कमेंट में बताएं.

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