Devshayaniekadashi: सनातन धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व होता है। इस साल यानी वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को है। इसी दिन से चातुर्मास शुरु हो जाता है। इस दौरान पूजा पाठ ध्यान साधना का विशेष महत्व होता है। इस दौरान काफी सावधानियां रखनी चाहिए ताकी आपके जीवन में किसी प्रकार का अमंगल या अनिष्ट न हो।
तो आइए, देवशयनी एकादशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए, आज इस विषय पर विस्तार से चर्चा कर लेते हैं।

चावल का सेवन: सनातन परंपरा में एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं किया जाता है। देवशयनी एकादशी के दिन भी चावल सहित धान से बने हुए किसी भी पदार्थ को नहीं खाना चाहिए। इस नियम का पालन पूरे परिवार को करना चाहिए।
मांसाहार से करें परहेज: हिंदू धर्म में जीव हत्या को सदैव वर्जित बताया गया है। वैसे में भूलकर भी देवशयनी एकादशी के दिन तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। देवशयनी एकादशी के दिन मांस, मछली, अंडे, प्याज, लहसुन खाने से और मदिरा पान करने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। ऐसा करने से विपरीत परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
तुलसी के पौधे को न तोड़ें और न जल चढ़ाएं: देवशयनी एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते अथवा पौधे को नहीं तोड़ना चाहिए क्योंकि मान्यताओं के मुताबिक इस दिन तुलसी माता भी निर्जला उपवास करती हैं। ऐसे में देवशयनी एकादशी के दिन तुलसी पौधे को छूना, तोड़ना या पानी नहीं देना चाहिए। अगर पूजा करने के लिए आवश्यक है तो एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते को तोड़ कर रख लें।
दिन के समय में न सोएं: देवशयनी एकादशी तिथि को दिन में सोने से परहेज करना चाहिए। सोने की अपेक्षा भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करनी चाहिए। देवशयनी एकादशी के दिन पूरे दिन ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते रहें। लाभ ही लाभ होगा।
काले कपड़े न पहनें: सनातन परंपरा के अनुसार किसी भी मांगलिक अवसर या त्योहार के दिन काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। अगर भगवान विष्णु और माता पार्वती की असीम कृपा प्राप्त करनी है तो देवशयनी एकादशी के दिन पीले वस्त्र धाणर करने चाहिए। ये बेहद शुभ फलदायक होता है।
किसी को न बोलें अपशब्द: देवशयनी एकादशी के दिन किसी को भी कटु वचन नहीं बोलना चाहिए। झूठ बोलने ओर क्रोध करने से भी बचना चाहिए क्योंकि हिंदू धर्म के अनुसार यह व्रत केवल आहार का नहीं बल्कि विचार और व्यवहार की शुद्धता का भी है। इसके साथ ही देवशयनी एकादशी के दिन भूलकर भी किसी के साथ हिंसा नहीं करना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को बुरा नहीं बोलना चाहिए। किसा का भी अपमान नहीं करना चाहिए। सनातन धर्म यही श्रेष्ठ संस्कार देता है।
देवशयनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मसंयम, श्रद्धा और सकारात्मक जीवनशैली का पर्व है। इस दिन बताए गए नियमों का श्रद्धापूर्वक पालन करने और भगवान श्रीहरि विष्णु का स्मरण करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। मान्यता है कि सच्ची आस्था और सात्विक आचरण के साथ किया गया यह व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा दिलाता है तथा चातुर्मास के शुभ आरंभ के साथ जीवन में मंगल और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। बोलिए श्रीहरि विष्णु भगवान की जय!
डिस्क्लेमर:
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पुराणों और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य धार्मिक जानकारी देना है। किसी भी व्रत या पूजा से पहले अपने गुरु, पुरोहित या विद्वान से परामर्श अवश्य करें।
