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वीरेन्द्र सहवाग एक पूर्व भारतीय बल्लेवाज और दुनिया के सबसे खतरनाक ओपनर में से एक माने जाते हैं | लोग प्यार से उन्हें वीरू कहते हैं , वैसे उन्हें नाफ्ज्गढ़ के नवाब , आधुनिक क्रिकेट के जेन मास्टर के रूप में भी जाना जाता है | वे दाये हाथ के आक्रामक बल्लेवाज तो हैं ही है किन्तु आवश्कता के समय दाएँ हाथ से ऑफ़ स्पिन गेंदवाजी भी कर लेते हैं | इन्होंने भारत की ओर से पहला एकदिवसीय मैच 1999 में व पहला टेस्ट मैच 2001 में खेला था | अप्रैल 2009 में सहवाग एकमात्र एसे भारतीय बने जिन्हें विजडन लीडिंग ऑफ़ द इयर के ख़िताब से नवाज़ा गया था इन्होंने अगले ही वर्ष इस ख़िताब को फिर जीता था | उन्होंने भारत के लिए 104 टेस्ट, 251 वनडे, और 19 टी-20 खेले हैं | उन्होंने अपने करियर कई खिलाडीयों के साथ ओपनिंग साझेदारी की हैं |

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1. 309 (375 ) बनाम पाकिस्तान पहला टेस्ट, मुल्तान 2004

वीरेन्द्र सहवाग ने अपने करियर में कई यादगार पारियाँ खेली हैं लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान में खेली गईं उनकी 309 रनों की पारी कुछ खास मायने रखती है इस तिहरे शतक ने सहवाग को मुल्तान का सुल्तान बना दिया साथ ही उन्होंने वनडे स्टाइल में खेलने की अपनी छवि से पूरी दुनिया को वाकिफ कराया | नजफ़गढ़ के नवाब वीरेन्द्र सहवाग का शुमार दुनिया के सबसे आक्रामक ओपनिग बल्लेवाजों में होता है यह कहा जाता है की टेस्ट क्रिकेट को बेखोफ अंदाज में खेलना उन्होंने ही सिखाया है |

सहवाग ने यह तिहरा शतक साल 2004 में जड़ा था जब भारतीय टीम तीन टेस्ट और पांच वनडे मुकाबला के लिए पाकिस्तान के ऐतिहासिक दौरे पर गई थी इस दौरे का आगाज मुल्तान से हुआ जहा टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला खेला गया था | इस मैच में सौरव गागुली की अनुपस्थिति में कार्यवाहक कप्तान राहुल द्रविड़ थे |

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वीरेन्द्र सहवाग किसी भी टेस्ट में तिहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय हैं जब भारत 2004 में पाकिस्तान दौरे पर गई थी इसमें मैच में भारत ने पहले टेस्ट में टॉस जीतकर बल्लेवाजी करने का फैसला लिया सगवाग ने इस मैच में विनाशकारी पाकिस्तानी गेंदवाजी क्रम की जमकर धुनाई की उन्होंने अपनी पारी के दौरान 375 गेदों में 309 रन बनाये इस दौरान उन्होंने 39 चौके और 6 छक्के लगाये और 82 का स्ट्राइक रेट बनाये रखा | सहवाग की इस पारी बदौलत भारत ने पाकिस्तान के सामने 675 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया | पाकिस्तान ने भी इस मैच में अच्छा संघर्ष किया लेकिन पाकिस्तान यह मैच हार जाती है | पहली पारी में पाकिस्तान केवल 407 ही बना पाती है और उन्हें फॉलो ऑन खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा दूसरी पारी में भी वे केवल 216 रन ही बना पाती है | इस तरह भारत यह मैच पारी और 52 रन से जीत जाता है | इस मैच में सहवाज मैन ऑफ़ द मैच बनते हैं | मैच के बाद उन्हें इस पारी से मुल्तान के सुल्तान की उपाधि दी गई थी |

254 ( 247 ) बनाम पाकिस्तान , पहला टेस्ट 2006

वीरेन्द्र सहवाग की दूसरी सबसे अच्छी पारी पाकिस्तान के खिलाफ हीं है यह भारत और पाकिस्तान के बीच एक और मुकाबला था जहाँ सहवाग ने पूरी दुनिया पर अपना दबदबा दिखाया | भारतीय टीम के पूर्व खिलाड़ी वीरेन्द्र सहवाग और राहुल द्रविड़ अपने करियर की कई ऐतिहासिक पारियाँ खेल चुके हैं इन दोनों खिलाडीयों ने टेस्ट के साथ वनडे में भी कई बार जीत दिलाई है लेकिन इसमें लाहौर में इन दोनों के बिच हुई 410 रनों की साझेदारी सबसे खास है |

भारतीय टीम जब पाकिस्तान दौरे पर गई थी इसमें पहले टेस्ट में पाकिस्तान पहले बैटिंग करते हुए सात विकेट के नुकसान पर 679 रन बनाता है इसके बाद पाकिस्तान पारी घोषित कर देता है | इसके बाद टीम इंडिया की ओर सहवाग और द्रविड़ ओपनिंग करने आते आते है और इन दोनों ने पहले विकेट के लिए रिकॉर्ड 410 रनों की साझेदारी करते है | इस पारी में सहवाग ने 247 गेंदों का सामना करते हुए 254 रन बनाये वहीं द्रविड़ ने 128 रन की नाबाद पारी खेली सहवाग ने अपनी पारी में 47 चौके जबकि द्रविड़ ने 19 चौके जड़े थे |

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पाकिस्तान ने पहले बल्लेवाजी करते हुए 679 रन का बनाया यह एक बड़ा लक्ष्य था लेकिन भारत जवाबी हमला करना जानती है | सहवाग ने राहुल द्रविड़ के साथ ओपनिंग बल्लेवाजी की | सहवाग ने अपना स्वाभाविक खेल खेला और 100 से उपर का स्ट्राइक रेट बनाये रखा उन्होंने इस मैच में 247 गेंद पर 254 की पारी खेली इस दौरान उन्होंने 47 चौके और केवल एक छका लगाया दूसरी ओर, द्रविड़ ने भी अपना सवाभाविक खेल खेला और 50 से उपर काउ स्ट्राइक रेट बनाये रखा | हालाकि यह मैच डॉ हुआ क्योंकि कोई भी टीम अपनी दूसरी पारी में बल्लेवाजी नहीं कर सकी | इस मैच में वीरेन्द्र सहवाग को मैन ऑफ़ द मैच मिला | अगर सहवाग यह पारी नहीं खेलते तो भारत को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ सकता था |

319 (304 ) बनाम साउथ अफ्रीका पहला टेस्ट 2008

वीरेन्द्र सहवाग की तीसरी सबसे अच्छी पारी साउथ अफ्रीका के खिलाफ थी पूर्व भारतीय बल्लेवाज वीरेन्द्र सहवाज हमेशा ही अपनी ताबड़तोड़ बल्लेवाजी के लिए जाने जाते है सगवाग ऐसे बल्लेवाज थे जो क्रिकेट के तीनों फोर्मेट में एक सामान खेलते थे 2008 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच खेलते हुए इतिहास रच दिया था उन्होंने इस टेस्ट सबसे तेज तिहरा शतक लगाया था | सहवाग ने 278 गेंद में अपना तिहरा शतक लगाया था जो अभी ये रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज है |

इस मैच में सहवाग ने तिहरा शतक लगाकर एक बार फिर इतिहास रचा और टेस्ट क्रिकेट में दो बार तिहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय बन गये | इस मैच में साउथ अफ्रीका पहले बल्लेवाजी करती है और कुल 540 रन का स्कोर भारत के सामने रखता है भारत ने भी इसका बेहतरीन जवाब दिया और 627 रन बनाया यह सहवाग की इस पारी से ही संभव हो पाया जिन्होंने 304 गेंद पर 319 रन बनाये और 104 का स्ट्राइक रेट भी बनाये रखा | इस पारी के दौरान सहवाग ने 42 चौके और 5 छके लगाये थे | सहवाग की इस पारी से लोग असमंजस में थे की वो टेस्ट खेल रहे है या टी-20 मैच , हालाँकि यह मैच डॉ पर पर समाप्त हुआ | इस मैच में सहवाग को मैन ऑफ़ द मैच का पुरुस्कार दिया गया |

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293(254 ) बनाम श्रीलंका तीसरा टेस्ट 2009

वीरेन्द्र सहवाग की चौथी अच्छी पारी श्रीलंका के खिलाफ आई थी 14 साल पहले वीरेन्द्र सहवाग ने 293 के स्कोर पर मुरलीधरन की गेंद पर शतक जड़ने से चुक गये अगर सहवाग अपने स्कोर में सात रन और जोड़ लेते तो वे द ग्रेट ब्रायन लारा को पछाड़कर दुनिया के पहले बल्लेवाज बन जाते | इसके वाबजूद सहवाग दुनिया के इकलौते एशे क्रिकेटर है जिसने टेस्ट क्रिकेट में तीन बार 290 का स्कोर पार किया है |

इस टेस्ट में सहवाग ने बल्लेवाजी करना इतना आसन बना दिया था बस उन्हें लगातार देखने रहने का मन हो रहा था | श्रीलंका ने सहवाग को रोकने के लिए अनगिनत तरीके अपना लिए लेकिन एक भी तरीका काम नही कर रहा था | सहवाग ने दुसरे दिन स्टंप के समय तक 284 रन बना लिए थे और तीसरे दिन की शुरुआत सहवाग ने कई रिकॉर्ड तोड़ने के उद्देस्य से की थी उस दिन सहवाग के निशाने पर सबसे तेज तिहरा शतक और लारा के 400 रनों का रिकॉर्ड था दोनों ही रिकॉर्ड सहवाग के निशाने पर थे लेकिन , तीसरे दिन अचानक मैदान में सन्नाटा पसर गया मुरली की गेंद पर सहवाग ने उन्हें आसन कैच थमा दिया | सहवाग को खुद पर काफी गुस्सा आया लेकिन फिर वे मुस्कुराएँ और दर्शको का अभिवादन करते हुए पवेलियन लौट गये |

इस मैच में श्रीलंका टॉस जीतकर पहले बल्लेवाजी करने का फैसला करता है और 393 का एक सम्मान जनक स्कोर भारत के सामने रखता है | भारत की तरफ से पारी की शुरुवात सहवाग करने आते है और श्रीलंका गेदवाजी की जमकर धुनाई करते करते है उन्होंने 293 रन बनाने के लिए केवल 254 गेंद का हीं सामना करते हैं इस पारी में उन्होंने 40 चौके और 7 छके लगाये थे | श्रीलंकाई बल्लेवाज यह दबाव नही झेल पाते हैं और वे दूसरी पारी में महज 309 पर आल आउट हो जाती है| इस तरह भारत यह टेस्ट मैच पारी और 24 रन से जीत जाता है | सहवाग को इस पारी से मैन ऑफ़ द मैच का पुरुस्कार मिलता है |

219 (149 ) बनाम वेस्ट इंडीज चौथा वनडे 2011

वीरेन्द्र सहवाग की पाचवी सबसे अच्छी पारी वनडे में वेस्ट इंडीज के खिलाफ थी ,8 दिसम्बर 2011 को वीरेन्द्र सहवाग ने वेस्ट इंडीज के खिलाफ विस्फोटक पारी खेलकर सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ दिया था और बल्लेवाजी के बदौलत टीम इंडिया ने वनडे का अपना सबसे बड़ा स्कोर भी खड़ा किया था जो आज भी बरकरार है |

यह रिकॉर्ड सहवाग ने 2011 में इंदौर के होलकर स्टेडियम में वेस्ट इंडीज के खिलाफ बनाया था | इन्होंने सबसे बड़ी पारी खेलते हुए दो साल से भी कम समय में सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़कर वनडे में दोहरा शतक जमाने वाले महज दुसरे बल्लेवाज बन गये थे | सचिन ने यह रिकॉर्ड 24 फ़रवरी 2010 को साउथ अफ्रीका के खिलाफ 147 गेंदों पर 200* रन बनाकर अपने नाम किया था , वही सहवाग ने वेस्ट इंडीज के खिलाफ 149 गेंदों में 219 रन बनाकर इस रिकॉर्ड को अपने नाम कर लिया था |

इस मैच में वीरेन्द्र सहवाग ने गौतम गंभीर के साथ पारी की शुरुवात की दोनों खिलाडीयों ने भारत को एक ठोस शुरुवात दी हालाकिं गौतम गंभीर अर्द्शतक लगाने के बाद आउट हो गये पर सहवाग ने रन गति को जारी रखा और गेंद को चारों दिशायों में मारा उन्होंने अपनी पारी के दौरान 149 बॉल में 219 रन बनाये इस पारी में उन्होंने 25 चौके और 7 गगनचुंबी छक्के लगाये | उन्होंने इस पारी से सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड 200 रनों को भी पीछे छोड़ दिया | वीरेन्द्र सहवाग की पारी के बदौलत भारत ने वेस्ट इंडीज को 418 का विशाल स्कोर खड़ा किया जवाब में वेस्ट इंडीज 265 रन पर आलआउट हो गई 153 से जीत गया और सहवाग को मैन ऑफ द मैच का पुरुस्कार मिला यह उनकी वनडे की सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक है |

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