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बिहार में जारी सियासी घमासान के बीच में बयानबाजी का दौर जारी है. ऐसे में यह कहा जा रहा है कि बिहार की सियासत में कब क्या हो जाए कुछ भी कहना मुश्किल है. अब देखिए न बिहार की राजनीतिक स्थिति ही ऐसी है कि बिना गठबंधन के सरकार चल नहीं पाती है. जिसका नतीजा है कि सरकारें बदलती रही है. खैर इन सरकारों के बदलते रहने के साथ ही बिहार की सियासत भी नए नए रूप में दिखाई देती रही है. नीतीश कुमार का यह नेचर रहा है कि जब वे बीजेपी के साथ रहे हैं तब उनकी नजदीकियां राजद के बड़े नेताओं के साथ रहा है. जब वे महागठबंधन के साथ रहे हैं तो उनके संबंध बीजेपी के बड़े नेताओं के साथ रहा है. जिसका नतीजा है कि समय के साथ सरकारें बदलती रही है.

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बिहार की अगर मौजू हालात को देखेंगे तो एक बार फिर से स्थिति उसी तरह की बनती दिख रही है. पिछले कुछ दिनों में इस तरह की स्थिति बनी है कि राजनीतिक जानकार यह कहने लगे हैं कि क्या नीतीश कुमार का मन एक बार फिर से बदल रहा है. पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे हालात सामने आए हैं जिससे लोग यही अंदाजा लगा रहे हैं कि आने वाले दिनों में कुछ नया हो सकता है क्या? हालांकि नीतीश कुमार के बारे में पहले से पूर्वानुमान लगाना बड़ा मुश्किल है. लेकिन नीतीश कुमार अपने वाले में सुत्रों के हवाले से खबर चलने से पहले ही मीडिया में बता देते हैं. जरा याद करिए उस दिन को जब बिहार में नए राज्यपाल की नियुक्ति हुई थी. नीतीश कुमार ने खुद ही बता दिया था कि हमारी बात देश के गृह मंत्री अमित शाह से हुई है. आपको यह भी जानकर हैरानी होगी कि जिस दिन बिहार के राज्यपाल बदले थे उस दिन देश के कई राज्यों के राज्यपाल बदले गए थे लेकिन गृह मंत्री की बात सिर्फ नीतीश कुमार से हुई थी. इसीलिए कहा जाता है कि नीतीश कुमार कभी भी अपनी खबर सुत्रों के हवाले से चलने नहीं देते हैं उसे वे खुद ही सार्वजनिक कर देते हैं. जिस समय नीतीश कुमार ने यह बताया कि गृहमंत्री से हमारी बात हुई है उस समय राजद जदयू पर हमलावर थी. तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने की बात कही जा रही थी.

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दूसरी स्थिति देखिए कि बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और MLC संजय मयूख के यहां से निमंत्रण आने पर वे उनके घर चले गए. राजनीतिक जानकार तो यह भी कहते हैं कि इस दौरान नीतीश कुमार का जो बॉर्डी लैंग्वेज था वह यह दिखा रहा था कि वह किसी दूसरे के यहां नहीं पहुंचे हैं. आपको बता दें कि संजय मयूख के संबंध देश के प्रधानमंत्री नीतीश कुमार और गृह मंत्री अमित शाह के साथ हैं. इस घटना के बाद कई तरह के सवाल लोगों के मन में उठने लगे थे. हालांकि नीतीश कुमार के इस संजय मयुख के जाने के बाद ही यह देखा गया कि बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने नीतीश कुमार का पैर भी छुआ था. इसको इस तरह से देखा जा रहा है कि जिस तरह से रामचरित मानस वाले मामले पर नीतीश कुमार खुश नहीं थे. जिसके बाद उनपर राजद के बड़े नेताओं का दवाब उनपर बना और आखिर में चंद्रशेखर को पैर छुना पड़ गया.

इतना ही नहीं राजद के नेता जब यह कहने लगे कि अब तेजस्वी को सीएम बनाया जाए उसके ठीक बाद लालू परिवार पर केंद्रीय एजेंसियों का छापा शुरू हो गया. स्थिति यह हो गई थी कि तेजस्वी यादव को भी जेल जाने जैसे हालात उत्पन्न हो गए थे. जिसके बाद विधानसभा में तेजस्वी यादव को यह कहना पड़ा कि न तो हमें सीएम बनना है और न ही नीतीश कुमार को पीएम. पिछले दिनों रामनवमी के मौके पर जिस तरह से नीतीश कुमार बीजेपी के नेताओं के साथ मिलकर भगवान राम की आरती उतार रहे थे उस समय मंच पर राजद का कोई भी नेता मौजूद नहीं था. ऐसे में यह कहा जा रहा है कि क्या बिहार में इन दिनों सियासी दाव पेंच का दौर चल रहा है. कही पर निगाहें कही पर निशाना. हालांकि कहा तो यह भी जा रहा है कि इस सियासी दांव पेंच में जो आखिरी तक अपनी नजर बनाए रखेगा वही जितेगा लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि जो इस दाव पेंच को चल रहा है वह भी जीत सकता है. ऐसे मे बिहार कि सियासत इन दिनों दावं पेंच पर टीकी हुई है.

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