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सरकार ने मॉडल डीड के आधार पर तैयार दतावेजों की रजिस्ट्री जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए शुरू की थी, जिले में अब वह 75 प्रतिशत लागू हो गया है. वहीँ सामान्य दस्तावेजों से जो रजिस्ट्री कातिब से तैयार की जाती थी वह अब हर दिन घटकर 20 से 25 हीं रह गयी है. सामान्य तरीके से की जाने वाली रजिस्ट्री में लोगों को इन्तेजार भी करना पड़ता था. लेकिन नए वाले रजिस्ट्री प्रक्रिया यानि मॉडल डीड के आधार पर अपना दस्तावेज तैयार करवाते हीं क्रेता और विक्रेता को हाथोंहाथ रजिस्ट्री होती है. बता दें की कातिबों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है जब से सामान्य दस्तावेजों की रजिस्ट्री के स्लॉट की संख्या घटाकर 25 तक कर दी गयी है. कातिबों द्वारा कहा जा रहा है की स्लॉट को घटाने की वजह विभागीय मनमानी है. अपॉइंटमेंट के ऑनलाइन माध्यम से लेने मे भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कहा जा रहा है की कातिबों को विभाग की तरफ से एकतरफ़ा लाइसेंस देकर ऑफिस में बैठाये हुए है और दूसरी तरफ रजिस्ट्री को रोक कर परेशान किया जा रहा है. इसके खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी भी कातिबों की तरफ से दी गयी है. वहीँ राकेश कुमार जो की डिस्ट्रिक्ट सब रजिस्ट्रार हैं उनका कहना है की विभागीय आदेश के अनुसार अधिक से अधिक संख्या में मॉडल डीड से रजिस्ट्री करायी जा रही है. उन्होंने ये भी बताया की मॉडल डीड से तैयार दस्तावेजों की रजिस्ट्री 75 से 80 प्रतिशत तक हो रही है.

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वहीँ सब रजिस्ट्रार का मोबाइल और गाड़ी जब्त कर लिया गया है, जहाँ मुजफ्फरपुर जिले के चारो मुफस्सिल सब रजिस्ट्रार जिसमें कटरा, पारु, मोतीपुर और सकरा शामिल है. बता दें की सरकारी मोबाइल को फ़िलहाल तिरहुत प्रमंडल के सहायक महानिरीक्षक के हवाले कर दिया गया है. मुजफ्फरपुर के अलावे इस फैसले को विभाग द्वारा राज्य के अवर निबंधकों को लेकर किया गया है. अवर निबंधकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जब से सरकारी नंबर और मोबाइल जब्त किये गये हैं. दरअसल अब उन्हें अपने निजी नंबर को विभागीय कार्यों के लिए देना पड़ रहा है. वहीँ गाड़ी के जब्त किये जाने से उन्हें आनेजाने की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है. जिसके कारण विभागीय फैसले के खिलाफ अन्दर हीं अन्दर सब रजिस्ट्रार गोलबंद होने शुरू हो गये हैं.

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बता दें की कातिब की भूमिका अब रजिस्ट्रेशन कार्यालय में जमीनफ्लैट के रजिस्ट्री के वक्त खत्म हो रही है. ऐसे में लोगों को इस पहल से जमीन या अन्य किसी तरह की रजिस्ट्री करवाने में आसानी होगी. साथ हीं साथ वैसी राशी जो कातिब या ऑफिस खर्च के नाम पर लगते थे उससे भी छुटकारा मिल जाएगा. इस योजना से लोग रजिस्ट्रेशन को खुद से हीं मॉडल डीड भर कर करवा सकते हैं. यदि निबंधन कार्यालय की बात करें तो 2 से 5 हजार रुपये तक का शुल्क एक डीड को रजिस्टर्ड करवाने में कातिब को देने पड़ते हैं. बता दें की करीब 12 लाख तक के डीड साल 2021-22 में रजिस्टर्ड करवाने में हुए हैं. जब से निबंधन विभाग की तरफ से इस चीज की पहल की गयी है तब से खुद हीं डीड तैयार कर लोग रजिस्ट्री करवा पा रहें हैं और कातिब के पास लगने वाले खर्च से भी छुटकारा मिल गया है.

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