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अगर आप भी प्रकृति प्रेमी हैं. थोड़े एडवेंचरस हैं, पहाड़ों पर चढ़ना उनसे बाते करना, प्रकृति की गोद में शान्ति ढूँढना ऐसे वादियों से घिरे खुले आसमान के नीचे आप भी चाहते हैं अपनी तस्वीरें खिंचवाना तो चलें हमारे साथ एक ऐसे ही सफ़र पर नमस्कार आप देख रहे हैं बिहारी न्यूज़ बिहारी विहार के आज के इस सेगमेंट में हम चलेंगे बिहार की राजधानी पटना से 122 किलोमीटर दूर नवादा स्थित कौवाकोल के सफ़र पर जहाँ आपको रोमांचित करने के लिए कौवाकोल के पहाड़ ही काफी हैं. यहाँ की प्राकृतिक नज़ारा कुछ इस तरह लोगों को अभिभूत करती हैं, जैसे बस यहीं बस जाएं. कौवाकोल स्थित पहाड़ के बड़ेबड़े चट्टान मानों कभी भी आप पर गिर सकते हैं. लेकिन घबराएं नहीं ये आप पर गिरते नहीं हैं. साथ ही ये पहाड़ आपके साथ बोलता भी है. नवादा जिला मुख्यालय से तकरीबन 41 किलोमीटर दूर कौआकोल प्रखंड के तरौन गांव स्थित यह बोलता पहाड़ आपको और भी रोमंचित कर देगी जब यह आपसे बात करेगा. जंगलों के बीच मनोरम वादियों में स्थित इस पहाड़ के नीचे एक स्थान से कुछ बोलने के बाद वही आवाज लौटकर वापस आती है. इसलिए ही यहाँ के लोग इसे बोलता पहाड़ कहते हैं यहाँ के चट्टानों पर इस पहाड़ का नाम बोलता पहाड़ लिखा हुआ है. यहाँ सालों भर पर्यटक इस पहाड़ की खूबसूरती देखने पहुँचते रहते हैं. अगर आपको अपना फ्रस्ट्रेशन निकालना हो कभीकभी ऐसा महसूस होता है की खूब जोर से बस चिल्लाऊ तो ये जगह आपके लिए बेस्ट होगा हालाँकि ये उनलोगों के लिए ज्यादा अच्चा आप्शन है जो कौवाकोल के आसपास हैं दूर रहने वालों के लिए इसका सब्सीट्यूड ढूँढना होगा खैर ये मजाक था. फोकस करते हैं इन पहाड़ों की खूबसूरती पर.

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यह इलाका प्रकृति की गोद में है, जिसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। पर्यटन की संभावना को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक स्तर पर भी इसका सौदर्यीकरण कराया गया है। पहाड़ तक पहुंचने वाले मार्ग को सुदृढ़ किया गया है। साल के पहले दिन लोग इस स्थान पर पिकनिक का भी आनंद लेते हैं। आसपास के गांवों के लोग यहां घूमने के लिए पहुंचते रहते हैं. पहाड़ के नीचे एक प्वाईंट है, जहां से बोलने पर आवाज लौटकर आती है। उस प्वाईंट को प्रशासन की तरफ से व्यवस्थित किया गया है. हरेहरे पेड़पौधे, झाड़ियाँ पहाड़ की खूबसूरती को और भी बढ़ा देते हैं इस पहाड़ के चट्टान ऐसे हैं मानों प्रकृति ने इसे एक स्थान पर रख दिया हो और ये हलकी हवा में भी आप पर कभी भी गिर सकते हैं. लेकिन ऐसा ना तो आज तक हुआ है और शायद ऐसा होगा भी नहीं क्यूंकि संसार में प्रकृति के दिए हर चीज की कोई ना कोई ख़ास वजह है. इस पहाड़ की एक और भी बहुत बड़ी खासियत है.

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अगर आप इन पहाड़ों पर चढ़ाई करेंगे तो आपको यहां पहाड़ पर नीम, और दुधकोरिया देखने को मिलेंगे. चलते चलते आप इन्हें दातून के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं. खैर ये भी मजाक ही था आपकी मर्जी मैंने आपको बस सजेस्ट किया. इसके अलावे यहां जंगली प्याज सहित और भी बहुत सारे जड़ी बूटी के पौधे भी यहाँ पाये जाते हैं, जो पेट सम्बंधी रोगों के लिए अचूक दवा है. कौवाकोल के तरौन गांव में स्थित इस पहाड़ की खूबसूरती आपको कश्मीर की वादियों का एहसास दिलाएगी.

अगर आप भी ऐसे ही जगह का ट्रॉप प्लान कर रहे हैं तो कौवाकोल भी अच्चा आप्शन होगा. जरुर जाएं पाना चाहते हैं सुकून

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