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आपने अभी तक अलग अलग स्थानों के कई रहस्मयी बातें और कहानियाँ सुनी होंगी. लेकिन आज के समय में तेजी से बढ़ रहे टेकनौल्जी के बीच किसी भी चमत्कार पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है. आज हम बिहार में स्थित एक ऐसे ही जगह पर ले जाएंगे. जो रहस्मयी भी है और वर्षों से पर्यटकों के मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा है. नमस्कार आप देख रहे हैं बिहारी न्यूज़ बिहारी विहार के इस सेगमेंट में और आज हम बात करेंगे राजधानी पटना से 131 किलोमीटर दूर औरंगाबाद स्थित उमगा मंदिर की. यह वो मंदिर है जिसका प्रवेश द्वार रातों रात पूर्व की दिशा से पश्चिम हो गयी थी क्यूँ और कैसे ये हम आगे जानेगे. ऊँचे पहाड़ और बड़े बड़े चट्टानों के बीच चौकोर आकार की ग्रेनाइट ब्लॉक से निर्मित यह मंदिर की भव्यता देखते बनती है. मंदिर के चारों तरफ ऊँचेऊँचे चट्टानों के बीच उगी हरीहरी छोटीछोटी झारियाँ पास में स्थित तालाब जिसे ऊँचे पहाड़ों से देखा जाए तो आँखों को सुकून मिलती है. अगर आप भी एडवेंचरस हैं पहाड़ों पर चढ़ना प्रकृति से मिलना और बड़े बड़े चट्टानों से गुजरना पसंद है. साथ ही अगर आप धर्म अध्यात्म से जुड़े तथ्य, रहस्य भरी कथाओं को पास से जानने, सुनने और समझने के शौक़ीन हैं तो यहाँ आपको इन सभी चीजों का समामेलन देखने को मिलेगा.

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इस मंदिर की रहस्यमय गाथा से पहले हम आपको इस मंदिर के इन्फ्रा स्ट्रक्चर यहाँ के मनोरम दृश्य के बारे में विस्तार से बताना चाहूंगी और यहाँ क्यूँ जाना चाहिए वो तो हमने आपको अभीअभी बताया. उमगा मंदिर औरंगाबाद के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में से एक है. औरंगाबाद शहर के पूर्व में 24 किमी की दूरी पर स्थित, तीर्थ केंद्र में यह एक वैष्णव मंदिर है. अपनी वास्तुकला के संदर्भ में, यह देव नामक जगह में निर्मित यह सूर्य मंदिर के समान है. इस भव्य वैष्णव मंदिर के निर्माण के बारे में कहा जाता है की यह त्रेता युगीन है जिसके निर्माण में चौकोर आकार की ग्रेनाइट ब्लॉक का उपयोग किया गया है. जहाँ भगवान गणेश, सूर्य देव और भगवान शिव का वास है. उमगा में कुल 52 देवी देवताओं के मंदिर थे. हालाँकि अब नहीं रहे बहुत सारे मंदिरों को नष्ट कर दिया गया था. उमगा नाम माँ उम्गेश्वरी के नाम पर पड़ा है. जो उमगा सूर्य मंदिर से कुछ दूर पहाड़ों पर ही स्थित है. एक समय में उमगा को मंदिरों का फक्ट्री कहा जाता था क्यूंकि यहाँ के पथरों से बहुत सारे मंदिरों का निर्माण हुआ है. उमगा देव सूर्य मंदिर का निर्माण भी यही के पथरों से हुआ है. उमगा रहस्य से भरा स्थल है कहा जाता है की यहाँ स्थित कुण्ड में भरा जल कभी नहीं सूखता है. वहीँ कुछ लोगो का मानना है की इस मंदिर का निर्माण खुद विश्वकर्मा भगवान ने किया था. यह देशभर में एक इकलौता स्थान है जहाँ 52 मंदिर स्थित हैं. हालाँकि अब शायद 20 से 23 ही शेष बचे हैं.

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इस मंदिर के पीछे की एक बड़ी रहस्मय बात यह है की कहा जाता है की इस मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व की दिशा से पश्चिम की दिशा में परिवर्तित हो गया था. औरंगाबाद में देव नामक जगह पर स्थित इस मंदिर को देव सूर्य मंदिर के नाम से भी जाना जाता है . बताया जाता है की इस मंदिर का निर्माण त्रेता युग और द्वापर युग के मध्य हुआ था. कहा जाता है की एकबार औरंगजेब भारतीय मंदिरों को तोड़ता हुआ औरंगाबाद के देव पहुंचा वो यहाँ के सूर्य मंदिर पर आक्रमण करने ही वाला था की तभी मंदिर के पुजारियों ने और वहां के स्थानीय लोगो ने औरंगजेब से अनुरोध किया की वो इस मंदिर को ना तोड़े. लेकिन औरंगजेब किसी की बात सुनने को तैयार ही नहीं था. लेकिन पुजारियों और वहां के लोगो के बार बार विनती करने पर औरंगजेब ने लोगो की खिल्ली उड़ाते हुए कहा की यदि सच में तुम्हारे भगवान हैं. इस मंदिर में कोई शक्ति है तो उस शक्ति से कहो की इस मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व से पश्चिम दिशा की तरफ हो जाए. यहाँ के स्थानीय लोग बताते हैं की औरंगजेब मंदिर के पुजारियों को मंदिर के मुख्य द्वार बदलने की बात कहकर उन्हें अगली सुबह तक का वक़्त दिया. इधर पुजारी काफी परेशान और दुखी थे. और रात भर सूर्य देव से प्रार्थना करते रहें की वो उनकी वचन की लाज रख ले नहीं तो औरंगजेब ये मंदिर तोड़ देगा. रात बीती जब मंदिर के पुजारी पूजा करने मंदिर पहुंचे तो उन्होंने देखा की मंदिर का प्रवेश द्वार पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर हो गया है. ये देखकर पूरा गाँव ख़ुशी से झूम उठा और कहा जाता है की यह देख औरंगजेब ने यह मंदिर नहीं तोडा और चुपचाप वहां से चला गया. उमगा मंदिर के बारे में कहा जाता है की यहाँ लोग दूर दूर से दर्शन करने आते हैं

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