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पिता के नक्शेकदम पर चल पड़े अर्जुन तेंदुलकर, अपने रणजी डेब्यू पर ठोक दिया शतक

मुंबई से नहीं मिले मौके तो कर लिया गोवा से खेलने का फैसला

7वें नंबर पर आकर लगाया शतक और टीम को मुश्किलों से निकाला

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 देश में इस वक्त देश में प्रतिष्ठित रणजी ट्रॉफी खेली जा रही है. बुधवार, 14 दिसंबर को राजस्थान के खिलाफ मैच में अर्जुन तेंदुलकर ने अपने फर्स्ट क्लास करियर का पहला शतक बनाकर सनसनी मचा दी है. खास बात ये है कि यह अर्जुन का फर्स्ट क्लास डेब्यू मैच भी था. अर्जुन तेंदुलकर भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के बेटे हैं. और अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए अर्जुन ने भी अपने फर्स्ट क्लास डेब्यू पर शतक ठोककर इतिहास रच दिया है.

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महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने भी 1988 में अपने रणजी डेब्यू पर शतक लगाया था. सचिन की उम्र तब मात्र 15 साल और 231 दिनों की थी. उस समय यह कमाल करने वाले वह सबसे युवा बल्लेबाज बने थे और अब उनके बेटे ने भी ये कारनामा कर दिखाया है. राजस्थान के विरुद्ध रणजी ट्रॉफी का अपना पहला मैच खेल रहे अर्जुन तेंदुलकर ने 178 गेंदों में अपना शतक पूरा किया. अपनी पारी में उन्होंने 12 चौके और 2 छक्के लगाए थे. अर्जुन तेंदुलकर ने 23 साल 81 दिनों में अपना पहला शतक लगाया है. वो इससे पहले भी शतक लगा चुके रहते लेकिन उन्हें मौके ही नहीं मिले. इसी चलते तो अर्जुन ने साल के शुरुआत में ही गोवा से खेलने का फैसला किया था. पहले वो मुंबई से खेलते थे, लेकिन वहां उनको ज्यादा मौके नहीं मिल रहे थे.

ranji trophy stock fb

गोवा के लिए अपना पहला मैच खेल रहे बॉलिंग ऑलराउंडर अर्जुन तेंदुलकर राजस्थान के खिलाफ डेब्यू मैच में नंबर-7 पर सिद्धेश लाड के आउट होने के बाद बल्लेबाजी करने के लिए उतरे थे. गोवा की टीम मुश्किलों में फसी थी, ऐसे में अर्जुन ने सुयश प्रभुदेसाई के साथ मिलकर पारी को संभाला. दोनों के बीच 200 से ज्यादा रनों की साझेदारी हुई थी. अर्जुन 120 रन बनाकर आउट हुए, जबकि सुयश प्रभुदेसाई ने 212 रनों की पारी खेली.

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अर्जुन ने 2018 में अपना अंडर-19 डेब्यू किया था, लेकिन विश्व कप नहीं खेल पाए थे. हालांकि, उन्होंने जल्दी ही मुंबई के लिए सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी खेली और उन्हें 2019 की नीलामी में मुंबई इंडियन्स ने भी खरीदा लेकिन वह आईपीएल डेब्यू का इंतजार ही कर रहे हैं. यही हाल उनका फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी था, मुंबई की तरफ से उनको खेलने के मौके ही नहीं मिल रहे थे ऐसे में अर्जुन ने इसी साल के शुरुआत में गोवा की तरफ से रणजी खेलने का फैसला लिया था. दोस्तों, आपके अनुसार अर्जुन को मुंबई की टीम की तरफ से ज्यादा मौके क्यों नहीं दिए जा रहे थे? इसके पीछे की मुख्य वजह क्या थी ? कमेंट में हमें बताएं.

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